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समर्थन मूल्य MSP 2023: सरकार ने धान, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की भारी वृद्धि

खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2023-24

देश में किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल सके इसके लिए सरकार द्वारा खरीफ एवं रबी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP पर खरीदा जाता है। जिसके लिए सरकार द्वारा फसलों की बुआई से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP की घोषणा कर दी जाती है ताकि किसान इन फसलों के मिलने वाले दामों के अनुसार ही फसलों का चयन कर खेती कर सकें। इस कड़ी में केंद्र सरकार ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सत्र 2023-24 के दौरान सभी स्वीकृत खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने फसल उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और फसलों में विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विपणन सत्र 2023-24 हेतु खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है। इसमें सर्वाधिक वृद्धि तिल की फसल में एवं न्यूनतम वृद्धि मक्का में की गई है। वहीं लागत से अधिक लाभ वाली फसल में बाजरा के भाव सबसे अधिक है।

खरीफ वर्ष 2023-24 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) क्या है?

फसल 
न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2023-24
न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP में की गई वृद्धि

धान (सामान्य)

2183 रुपए प्रति क्विंटल

143 रुपए

धान (ग्रेड ए)

2203 रुपए प्रति क्विंटल

143 रुपए

ज्वार (हाइब्रिड)

3180 रुपए प्रति क्विंटल

210 रुपए

ज्वार (मालदंडी)

3225 रुपए प्रति क्विंटल

235 रुपए

बाजरा 

2500 रुपए प्रति क्विंटल

150 रुपए

रागी 

3846 रुपए प्रति क्विंटल

268 रुपए

मक्का 

2090 रुपए प्रति क्विंटल

128 रुपए 

तूर (अरहर)

7000 रुपए प्रति क्विंटल

400 रुपए

मूंग 

8558 रुपए प्रति क्विंटल

803 रुपए

उड़द 

6950 रुपए प्रति क्विंटल

350 रुपए

मूँगफली

6377 रुपए प्रति क्विंटल

527 रुपए 

सूरजमुखी बीज 

6760 रुपए प्रति क्विंटल

360 रुपए

सोयाबीन (पीला)

4600 रुपए प्रति क्विंटल

300 रुपए

तिल 

8635 रुपए प्रति क्विंटल

805 रुपए 

रामतिल 

7734 रुपए प्रति क्विंटल

447 रुपए 

कपास (मध्यम रेशा) 

6620 रुपए प्रति क्विंटल

540 रुपए 

कपास (लम्बा रेशा)

7020 रुपए प्रति क्विंटल

640 रुपए

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फसलों की लागत में इन मदों को किया गया है शामिल

सरकार ने फसलों की लागत में किराए पर लिया गया मानव श्रम, बैल श्रम / मशीन श्रम, भूमि पर पट्टे के लिए भुगतान किया गया खर्च, फसल उत्पादन में इस्तेमाल सामग्री जैसे बीज, उर्वरक, खाद, सिंचाई शुल्क, उपकरणों एवं कृषि भवनों पर मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, पंप सेटों के संचालन के लिए डीजल/बिजली आदि पर किए गए खर्च, विविध मूल्य तथा पारिवारिक श्रम के अनुमानित व्यय को शामिल किया गया है। 

नोट:-धान (ग्रेड ए), ज्वार (मालदंडी) और कपास (लंबा रेशा) के लिए अलग से लागत डेटा संकलित नहीं किया गया है।

सभी फसलों पर दिया जा रहा है लागत का 1.5 गुना मूल्य

सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि विपणन सत्र 2023-24 के दौरान खरीफ फसलों के दौरान एमएसपी में वृद्धि किसानों को उचित पारिश्रमिक मूल्य उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय बजट 2018-19 की अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर एमएसपी तय करने की घोषणा के अनुरूप है। सरकार के अनुसार इस वर्ष किसानों को बाजरा पर 82%,  तुअर पर 58%, सोयाबीन पर 52% और उड़द पर 51%  उत्पादन लागत से अधिक का मुनाफ़ा दिया जाएगा। शेष अन्य फसलों के लिए किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50% मार्जिन प्राप्त होने का अनुमान है।

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सरकार दलहन तिलहन फसलों के उत्पादन पर दे रही है जोर

देश को दलहन एवं तिलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा इन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी चलते सरकार ने पिछले वर्षों में इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP में अधिक वृद्धि की है। सरकार लगातार इन फसलों के लिए उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य रखकर दलहनों, तिलहनों और अन्य पोषक धान्य/श्री अन्न जैसे अनाजों के अलावा कई फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने किसानों को उनकी फसलों में विविधता लाने के उद्देश्य से प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) जैसी विभिन्न योजनाएं एवं गतिविधियां भी शुरू की हैं।

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