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Ethanol Blended Petrol: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सरकार ने दिया स्पष्टीकरण, जानें किसानों और उपभोक्ताओं को कैसे मिल रहा फायदा

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को लेकर सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। जानें FCI चावल, E20 पेट्रोल, किसानों को मिलने वाले लाभ, विदेशी मुद्रा बचत और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े सभी तथ्य।

Ethanol Blended Petrol Program

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol – EBP) कार्यक्रम को लेकर हाल के दिनों में कई तरह के दावे और सवाल सामने आए हैं। इन दावों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम में किसी भी स्तर पर खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाता और गरीबों के हिस्से का अनाज इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल नहीं होता।

खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), कल्याणकारी योजनाओं और आवश्यक बफर स्टॉक की जरूरत पूरी होने के बाद ही अधिशेष खाद्यान्न को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है। इथेनॉल उत्पादन में मुख्य रूप से ऐसे खाद्यान्नों का उपयोग किया जाता है जो—

  • टूटे हुए चावल (Broken Rice) हों,
  • क्षतिग्रस्त अनाज हों,
  • मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हों,
  • या गोदामों में लंबे समय तक पड़े अधिशेष स्टॉक हों।

सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य भोजन छीनना नहीं बल्कि अनुपयोगी संसाधनों को स्वच्छ ऊर्जा में बदलना है।

FCI चावल को सस्ते में बेचने के दावे पर सरकार का जवाब

सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) का चावल डिस्टिलरी को विशेष रियायती दर पर बेचा गया। सरकार के अनुसार—

  • FCI चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध कई अनुमोदित कच्चे माल में से केवल एक है।
  • इसकी कीमत सरकार द्वारा तय मूल्य निर्धारण व्यवस्था के तहत निर्धारित होती है।
  • किसी एक फीडस्टॉक को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाती।

इथेनॉल उत्पादन में किन कच्चे माल का उपयोग होता है?

सरकार के अनुसार इथेनॉल कार्यक्रम केवल चावल पर आधारित नहीं है। ESY 2023-24 में इथेनॉल उत्पादन में FCI चावल की हिस्सेदारी केवल 0.02 प्रतिशत रही। ESY 2025-26 में यह बढ़कर 24.64 प्रतिशत हुई, क्योंकि खाद्य सुरक्षा की सभी जरूरतें पूरी होने के बाद अधिशेष स्टॉक उपलब्ध था।

इसी अवधि में-

  • मक्का (Corn) की हिस्सेदारी 42.6% से घटकर 35.96% रही।

इससे स्पष्ट है कि उद्योग उपलब्धता के अनुसार विभिन्न फीडस्टॉक का उपयोग करता है।

चावल को विशेष रियायत और मूल्य निर्धारण का सच

सरकार के मुताबिक FCI का चावल इथेनॉल बनाने के लिए उपयोग होने वाले कई अनुमोदित कच्चे माल (Feedstock) में से केवल एक है। इसकी कीमत सरकार के निर्धारित मूल्य ढांचे के अंतर्गत ही तय होती है। विभिन्न फीडस्टॉक की निर्धारित कीमतें नीचे दी गई हैं:

फीडस्टॉक (ESY 2025-26)

भुगतान की गई इथेनॉल की कीमत (रुपए प्रति लीटर)

मक्का (Maize)

71.86

गन्ने का रस / सीरा (Sugarcane Juice/Syrup)

65.61

क्षतिग्रस्त अनाज (Damaged Grain)

64.00

बीभारी गुड़ (B-Heavy Molasses)

60.73

एफसीआई चावल (FCI Rice)

60.32

सीभारी सीरा (C-Heavy Molasses)

57.97

E20 पेट्रोल से कैसे मिलता है फायदा?

सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य केवल सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना नहीं बल्कि देश को वैश्विक तेल संकट से बचाना है।

  • जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब अनुमान था कि बिना इथेनॉल मिश्रण के दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी।
  • लेकिन E20 मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं ने लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल खरीदा।
  • यानी संकट के समय प्रति लीटर करीब 30 रुपये तक की राहत मिली।

इथेनॉल कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां

  • विदेशी मुद्रा की बचत: देश के 1.97 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
  • कच्चे तेल का प्रतिस्थापन: 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात को सफलतापूर्वक प्रतिस्थापित किया गया है।
  • पर्यावरण संरक्षण: 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) उत्सर्जन में कमी आई है।
  • किसानों को सीधा लाभ: किसानों और डिस्टिलर्स को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है।

यह कार्यक्रम केवल ईंधन का विकल्प नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल ऑयल संकट के खिलाफ एक मजबूत ‘बीमा पॉलिसी’ है जो भारत को आत्मनिर्भरता और स्थिरता की ओर ले जा रही है।

किसानों को कैसे मिल रहा फायदा?

इथेनॉल कार्यक्रम से किसानों को अपनी फसलों के लिए अतिरिक्त बाजार मिल रहा है। इससे—

  • मक्का सहित अन्य फसलों की मांग बढ़ रही है।
  • कृषि उत्पादों की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ी है।
  • किसानों की आय में वृद्धि को समर्थन मिल रहा है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

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