सर्दी में आम में लग सकते हैं यह रोग

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आम में रोगों का नियंत्रण

जनवरी माह में आम के पेड़ में मंजर लगने लगता है | उससे पहले कुछ बातों को ध्यान में रखें जिससे आप के पेड़ में रोग मुक्त तथा अधिक से अधिक संख्या में आम का फल रह सके | इन ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए किसान समाधान ने यह जानकारी लेकर आया है |

ऐसा पाया गया है कि उत्तर भारत में जनवरी माह में अचानक कुछ दिनों के लिए तापक्रम बढ़ जाने के फलस्वरूप आम के पेड़ों पर मंजरियां निकल आती है | इन जल्दी निकली मंजरियों को यथा सम्भव तोड़ देना चाहिए | जनवरी माह में निकली मंजरियों के गुच्छा रोग से ग्रसित होने की संभवना अधिक होती है तथा इन मंजरियों पर फल नहीं लगते हैं |

रोग एवं रासायनिक उपचार 

जिन बागों में दिसम्बर माह में गुजिया कीट की रोकथाम हेतु पर्दों के मुख्य तनों पर एल्काथेन की पत्ती (400 गेज मोटी, 30 से.मी चौड़ी) नहीं लगाई गयी है और गुजिया कीट पेड़ों पर चढ़ रही हैं | एसे पेड़ों पर कार्बोसल्फान (0.05 प्रतिशत) अथवा डाइमेथोएट (0.05 प्रतिशत) का एक छिड़काव अवश्य करें | यह छिड़काव गुजिया कीट की रोकथाम के साथ – साथ मिज कीट के नियंत्रण में भी सहायक होता है | येसे बाग जंहा पेड़ों के मुख्य तनों पर एल्काथेन की पत्ती समय से बांधी गई है, उन पट्टियों को नियमित अन्तराल पर साफ करते रहें जिससे पट्टी पर धूल इत्यादि न जमा होने पाए |

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इस बात का भी ध्यान रखें 

खेतों की सिंचाई कर पौधों को पाले के प्रकोप से बचाना | छोटे पौधों के ऊपर छप्पर बनाकर उनकी रक्षा की जनि चाहिए | इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि छप्पर का पूर्वी भाग खुला रहे ताकि कम से कम समय में सूर्य का प्रकाश अंदर आ सके | आम में गुच्छों की विकृत आकृति (मालफार्मेशन) की समस्या को नियंत्रित करने के लिए नई कलियों अथवा नए बढ़ते हुए पुष्प गुच्छों को विकसित नहीं होने देना चाहिए |

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