कामधेनू डेयरी योजना का लाभ लेने हेतु सम्पूर्ण जानकारी

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कामधेनू डेयरी योजना का लाभ लेने हेतु सम्पूर्ण जानकारी 

कामधेनु डेयरी योजना से सम्बंधित सभी जानकारी किसान समाधान आपके लिए लेकर आया है | कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेने के लिए  प्रक्रिया/दिशानिर्देश क्या है, लाभार्थियों का चयन किस तरह किया जायेगा एवं इस योजना के लिए वित्तीय प्रावधान किस तरह रहेगा |

पशुपालकों, गोपालकों, कृषकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में उपलब्ध दुधारू गौवंश का संवर्धन कर उन्नत गौवंश से पशुपालकों की आय बढ़ाने हेतु डेयरी संचालन / प्रबंधन को विकसित करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक विधि एवं मशीन के माध्यम से स्वच्छ एवं स्वास्थ्यप्रव दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाना है | गौमय गौमूत्र आदि के साथ खनिज जैसे लिग्नाईट, राक फास्फेट, जिप्सम आदि को मिश्रित कर एनरिच क्म्पोष्ट आर्गेनिक फर्टिलाईजर तथा वर्मी क्म्पोष्ट तैयार करने के अतिरिक्त औषधीय उपयोग हेतु गौमूत्र अर्क तथा कृषि हेतु कीटनाशक आदि उत्पादन किये जाने के लिए वित्तीय वर्ष 2018 – 19 में कामधेनू डेयरी योजना प्रारंभ करने के संदर्भ में निम्न प्रकार दिशा निर्देश जारी किये जाते है |

योजना की प्रक्रिया / दिशानिर्देश :-

  • योजना जयपुर जिले में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारम्भ की जा रही है लघु एवं सीमान्त कृषकों, पशुपालकों / गोपालकों के सकारात्मक रुझान एवं योजना के उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त होने एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में शेष सब्सिडी यदि इसी वर्ष प्राप्त हो जायेगी तो एसी स्थिति में लक्ष्यानुसार सम्पूर्ण प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से कामधेनू योजना प्रारम्भ कर डी जावेगी |
  • उच्च दुग्ध उत्पादक क्षमता वाली 30 एक ही नस्ल (गीर अथवा थारपारकर) की देशी गायों की डेयरी इकाई व्यक्तिगत लाभार्थी द्वारा स्थापित की जायेगी |
  • 30 दुधारू देशी एक ही नस्ल की गायों की डेयरी स्थापित करने के लिए आधारभूत संरचना, पर्याप्त स्थान एवं हरा चारा उत्पादन हेतु भूमि के अतिरिक्त 1 एकड़ (बैंक के बंधक योग्य) स्वंय के स्वामित्व की भूमि का होना आवश्यक होगा | योजना में जिसके नाम से जमीं है उसे co – borrower रखा जायेगा |
  • देशी दुधारू गाय की उम्र 5 वर्ष या दो ब्यांत (second – lactation) जो भी कम हो एवं दुग्ध उत्पादन 10 – 12 लीटर तथा बछड़े / बछड़ी की उम्र 1 – 2 माह होना आवश्यक है |

 

  • प्रथम चरण में 15 देशी एक ही नस्ल (गीर अथवा थारपारकर) की दुधारू गाय तथा 4 से 6 माह पश्चात् दिवतीय चरण में शेष 15 देशी एक ही नस्ल (गीर अथवा थारपारकर) की दुधारू गाय क्रय कराई जायेगी | स्वास्थ्य प्रमाण जारी करते समय इस बात का ध्यान रखा जाने की क्रय करागी गगी नवीं गायें उचित आयु स्वस्थ्य एवं देशी नस्ल की हो | स्थानीय अथवा अन्य उपयुक्त माध्यम (बाजार / पशुपालन) से नियमानुसार क्रय किये जाने में होने वाले वास्तविक व्यय का भुगतान लाभार्थी द्वारा किया जायेगा |
  • एक ही नस्ल की नवीं देशी (गीर अथवा थारपारकर) दुधारू गौवंश का क्रय लाभार्थी द्वारा स्वंय किया जावेगा | पशु स्थनीय पशुपालन अथवा ब्रीडर्स एसोसिएसन के माध्यम से क्रय किये जा सकते हैं , गौवंश क्रय किये जाने से पूर्व पशु चिकित्सा अधिकारी का वहां उपस्थित होकर पशु के देशी नस्ल की पहचान हेतु स्क्रीनिंग (screening) की जायेगी तथा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं परिवहन बीमा जारी किया जाना होना अनिवार्य होगा, जिसका समस्त व्यय एवं क्रय संबंधित कार्यवाही की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लाभार्थी की होगी |
  • सभी दुधारू देशी गौवंशी का बीमा प्रथमतया तिन वर्षों के लिए एवं उसकी निरन्तरता में बैंक लोन चुकारा किये जाने तक लाभार्थी की होगी |
  • पशुपालन संबन्धी अनुभव के अतिरिक्त युवा बेरोजगार व्यक्ति स्टार्टअप निति के अवसर के तहत डेयरी संचालन के लिए आवेदन कर रोकेगे, परन्तु योजनान्तर्गत नवीं दुधारू देशी गाय क्रय करनी आवश्यक होगी | जो गौवंश पूर्व में डेयरी संचालक के पास है उनके टैग किसी भी सुरत में नहीं लगाये जायेंगे |
  • बैंक ऋण बैंक की शर्तों के अनुरूप ही दिया जायेगा | लेकिन पूर्व में डेयरी स्थापना हेतु किसी भी संस्थान से ऋण, अनुदान प्राप्त करने वाला लाभार्थी स्वंय या उसके परिवार का कोई सदस्य इस योजना में पात्र नहीं होगा |
  • योजना में राशि का व्यय योजना में सलग्न परिशिष्ट व अन्य बिन्दुओं अनुसार ही किया जाना है, जिसमें गौवंश का सत्यापन पशु चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य बिन्दुओं का सत्यापन संबंधित बैक अधिकारी द्वारा किया जायेगा |
  • क्रय करायी गयी दुधारू देशी गायों की पहचान सुनिशिचत करने हेतु 12 डिजिट का टेग लगाकर उसे ईनाफ (INAPH) से जोड़ा जायेगा |
  • गायों के स्वास्थ्य का रखरखाव संतुलित पशु आहार, रोगों से बचाव हेतु टीकाकरण / उपचार तथा प्रजनन स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी के परामर्श अनुसार किया जा सकेगा |
  • गौवंश के प्रजनन योग्य साड़ों से गौ – संवर्धन हेतु प्राकृतिक परिसेवा / कृत्रिम गर्भाधान कराने हेतु लाभार्थी स्वतंत्र होगा परन्तु नकारा बछड़ों / साड़ों का शत – प्रतिशत बधियाकरण करना अनिवार्य होगा |
  • पशु के स्वास्थ्य एवं मृत्यु प्रमाण पत्र हेतु राशि का भुगतान संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी को क्रमश: 250 व 500 रूपये लाभार्थी द्वारा देय होगा |
  • लाभार्थी को डेयरी क्षेत्र में कम करने का कम से कम 3 – 5 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है, जिसके संबंध में शपथ पत्र दिया जाना अनिवार्य है | इसके अतिरिक्त भूमि के संबंध में जमाबंदी की नकल एवं पुर्न विवरण सक्षम पदाधिकारी द्वारा सत्यापित करवा कर आवेदन पत्र के साथ संलगन करना होगा |
  • कामधेनू डेयरी योजना की स्वीकृति स्थानीय निकाय (नगर परिषद / नगर पालिका / नगर निगम) की सीमा क्षेत्र से बाहर ही संचालित होगी |
  • लाभार्थी द्वारा समस्त देशी गायों के दुग्ध उत्पादन, वत्स उत्पादन, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भधान अथवा प्राक्रतिक परिसेवा, बिडिंग, पोषण (हरा चारा, सुखा चारा) लेक्टेशन ईल्ड (lactation) इत्यादी का रिकार्ड संधृत करना आवश्यक होगा |
  • पशु क्रय की अग्रिम राशी लाभार्थी द्वारा चैक के माध्यम से दिए जाने पर ही लाभार्थी लोन एवं सब्सिडी प्राप्त कर सकेगा |
  • योजना में लाभार्थी के नाम निदेशालय की वेबसाईट पर प्रदर्शित किये जायेंगे |
  • निदेशालय गोपालन द्वारा लाभार्थी को दुग्ध एवं उसके उत्पाद विक्रय करने हेतु समय – समय पर दिशा – निर्देशों के माध्यम से मदद दी जाती रहेगी |
  • चयनित लाभार्थियों को निदेशालय गोपालन द्वारा आयोजित डेयरी प्रबंधन, पशु पोषण / स्वास्थ्य / प्रजनन तथा अभिलेख संधारण सम्बन्धी नि:शुल्क प्रशिक्षण में आवश्यक रूप से भाग लेना होगा |
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लाभार्थी के चयन की प्रक्रिया :-

  • महिला आवेदकों को योजना में प्राथमिकता डी जावेगी |
  • योजना के सफल एवं प्रभवि क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर संयुक्त निदेशक द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार किया जायेगा | पशु चिकित्सा अधिकारी / वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी के द्वारा गाँव के समस्त पशुपालकों / गोपालकों / डेयरी संचालकों को योजना के बारे में विस्तृत जानकारी डी जायेगी | इसके उपरान्त लाभार्थियों से योजना के अनुरूप प्रार्थना पत्र निर्धारित प्रारूप में लिये जायेंगे | प्रार्थना पत्र के साथ भूमि के खातेदारी तथा अनुभव प्रमाण पत्र, बैंक स्टेटमेंट एवं संलगन प्रारूप में शपथ पत्र नोटरी से सत्यापित करवाकर संलगन करना अनिवार्य है |
  • लाभार्थी का चयन सम्बंधित लाभार्थी के क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी / वरिष्ट पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा किया जावेगा | पशु चिकित्सा अधिकारी को यह भी सुनिशिचत करना होगा कि लाभार्थी देशी गौवंश के दूध को 50 रूपये प्रति लीटर विक्रय करने में सक्षम है | जिस लाभार्थी की दूध विक्रय क्षमता उपरोक्तानुसार नहीं होगी उसका चयन नहीं किया जावेगा | इस हेतु लाभार्थी द्वारा आवेदन पत्र के साथ दुग्ध विक्रय का प्लान आवेदन के साथ संलगन करना होगा |
  • पशु चिकित्सा अधिकारी / वरिष्ट पशु चिकित्सा अधिकारी एवं बैंक के भूमि मूल्यांकन अधिकारी द्वारा योजना के परिपेक्ष्य में आवेदन पत्रों की जाँच उचित पाये जाने के उपरान्त अपनी टिप्पणी के साथ नोडल अधिकारी को प्रस्तुत करंगे | तत्पश्चात नोडल अधिकारी अपनी अनुशंषा उपरान्त आवेदन पत्र संयुक्त निदेशक कार्यालय को अग्रेषित करेंगे |
  • जिला संयुक्त निदेशक द्वारा समस्त अग्रेषित प्रार्थना पत्रों को लक्ष्य के अनुसार योग्य लाभार्थी के चयन हेतु जिला स्तरीय गोपालन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा | जिला स्तरीय गोपालन समिति के निर्णय के उपरान्त योग्य लाभार्थी की सुचना निदेशालय गोपाल को प्रेषित की जायेगी |

 

  • निदेशालय गोपालन को प्राप्त लाभार्थी के प्रस्तावों के परिक्षण एवं फील्ड निरिक्षण हेतु राज्य स्तरीय गोपालन समिति का गठन किया गया है , जिसमें निदेशालय गोपालन के अधिकारी नामित होंगे |जो अपनी रिपोर्ट गुणावगुण के आधार पर निदेशक, निदेशालय गोपालन द्वारा जरी की जायेगी एवं इसके विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकेगी | लाभार्थियों की सूची की एक प्रति बैंक प्रबन्धक (अग्रणी जिला प्रबंधक) को सदस्य सचिव जिला स्तरीय गोपालन समिति के माध्यम से अग्रिम कार्यवाही हेतु भिजवाई जायेगी | इसके पश्चात् बैंक द्वारा सैद्धांतिक सहमती के आदेश जरी होने के उपरान्त ही देशी गौवंश के क्रय की कार्यवाही लाभार्थी द्वारा प्रारम्भ की जायेगी |
  • लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर वरीयता सूचि का निर्धारण होगा , जिन्हें आगामी वर्षों में उपलब्ध लक्षों के विरुद्ध संचालित किया जावेगा |
  • योजना के संबंध में किसी भी समस्या के निराकरण का अन्तिम अधिकार निदेशक निदेशालय गोपालन को होगा |
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कामधेनू डेयरी का निरिक्षण एवं पर्यवेक्षण :-

गोपालन, पशुपालन विभाग एवं ऋण प्रदाता बैंक के स्थनीय एवं जिला स्तरीय अधिकारी उक्त डेयरी का निरिक्षण कर लाभार्थी को गौवंश के रख – रखाव, नस्ल संवर्धन चारा उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकता / विपणन के सम्बन्ध में विभागीय योजना की जानकारी देंगे |

वित्तीय प्रवधान :-

  1. बैंक लोन राजकीय अथवा निजी बैंक द्वारा 5 से 7 वर्षों तक लाभार्थी एवं बैंक की परस्पर सहमती पर दिया जा सकेगा |
  2. योजना में लाभार्थी द्वारा सर्वप्रथम निर्माण / दुग्ध उपकरण / पशुक्रय हेतु 10 प्रतिशत (लगभग रु.3.67 लाख) राशि व्यय की जायेगी | तत्पश्चात बैंक द्वारा उनकी शर्तों अनुसार 90 प्रतिशत (लगभग रु. 33.021 लाख) ऋण लाभार्थी को निदेशक, निदेशालय, गोपालन की अनुशंषा पर उपलब्ध कराया जायेगा | जिसमें 30 प्रतिशत (लगभग रु. 11.007 लाख) अनुदान राशी रिन्दता बैंक को ऋण स्वीकृति उपरान्त निदेशालय गोपालन द्वारा उपलब्ध करायी जायेगी | इस तरह से एक डेयरी इकाई में रु. 36.69 लाख राशी व्यय की जायेगी |
  3. लाभार्थी द्वारा यदि पूर्व से ही स्वंय की भूमि पर नवीं निर्माण (शेड पानी की खेली, चारे की खेली) करा रखा है तो उक्त निर्माण को किसी भी राजकीय संस्था के कनिष्ठ अभियंता स्तर के अधिकारी से सत्यापन प्रमाण पत्र प्राप्त कर संलगन करे एवं यदि छ: माह के अन्दर उपकरण क्रय किये गए है तो राशि का बिल अथवा आंकलन प्रस्तुत करने पर लाभार्थी को अपनी स्वंय की मार्जिन राशि के भाग को व्यय करने में छूट डी जा सकेगी अर्थात लाभार्थी द्वारा स्वंय के स्तर से 10 प्रतिशत हिस्सा राशि के उपरोक्त निर्माण एवं उपकरणों के विरुद्ध समायोजित किया जा सकेगा |

  1. बैंक द्वारा प्रतिदिन डेयरी में होने वाले व्यय यथा चारा, पशुआहार , चिकित्सा, श्रमिक एवं अन्य विविध व्यय हेतु लाभार्थी एवं बैंक की परस्पर सहमति के आधार पर सी.सी लिमिट तय किया जाना आवश्यक होगा |
  2. केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित डेयरी उद्ध्मिता विकास योजना की तरह बैंक एंडेड पूंजी अनुदान का प्रवधान किया जाकर इस न्यूनतम ०३ वर्ष के लिए लाक – इन पीरियड में रखकर इसका समायोजन बैक एंडेड रूप में किया जायेगा | संबंधित बैंक अनुवाद की राशी को सब्सिडी रिजर्व फण्ड खाते (ऋणीवार) में रखेंगे व अनुदान राशी का समायोजन ऋण की बकाया अंतिम किश्तों से करेंगे एवं खाते के एन.पी.ए. (NPA) होने की स्थिति में लाभार्थी के लिए जारी अनुदान की राशी को निदेशालय गोपालन को लौटायेंगे |
  3. ए.पी.ए. खाता पुन: नियमित यथा standard category / regular/upgrade होने की स्थिति में लाभार्थी अनुदान राशी प्राप्त करने का पात्र होगा | लाभार्थी द्वारा एक अथवा दो किस्ते न चुकाये जाने एवं बाद में एक साथ किस्तें चुकाये जाने की स्थिति में बैंक की सहमति से उसे एन.पी.ए. की श्रेणी में नहीं रखा जायेगा |
  4. खाते के अतिरिक्त / एनपीए (NPA) होने की स्थिति में जिला स्तरीय गोपालन समिति एवं संबंधित संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग एनपीए ऋण वसूली में अनिवार्य रूप से पूर्ण सहयोग करेगी |
  5. लाभार्थी योजना में आवश्यक समस्त स्थयी सामान को क्रय करके उनके बिल बैंक की शाखा, निदेशालय गोपालन एवं एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखेगें | बैंक अपनी शर्तों के अनुसार लाभार्थी को ऋण उपलब्ध करायेगें |

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डेयरी विकास कार्ड योजना

डेयरी योजना या बैंक ऋण हेतु प्रोजेक्ट रिपोर्ट

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