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ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों का सर्वे कर किसानों को दिया जायेगा मुआवजा

crop damage survey
बारिश से फसल नुकसान (प्रतीकात्मक फोटो)

बारिश से फसल नुकसान का सर्वे

देश के अधिकांश क्षेत्रों में अभी दलहन एवं तिलहन की फसल कटाई के लिए तैयार है परन्तु लगातार हो रही बारिश से इन फसलों को काफी नुकसान हुआ है | ऐसे में हरियाणा के उपमुख्यमंत्री श्री दुष्यंत चौटाला ने उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदेश में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों की अगले 48 घंटे में रिपोर्ट दें ताकि प्रभावित क्षेत्र की स्पेशल गिरदावरी करवा कर किसानों को उनके नुकसान की भरपाई की जा सके। जो फसलें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत कवर नही होती हैं उन फसलों के नुकसान का भी मुआवजा दिया जाएगा।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार 30 सितंबर 2021 तक गैर-मौसमी बारिश होने की संभावना है। उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिला की रिपोर्ट बनाकर भेजें जिसमें 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश तथा बारिश के कारण जलभराव की रिपोर्ट भेजना सुनिचित करें।

इन फसलों के नुकसान पर भी दिया जायेगा मुआवजा

राज्य सरकार द्वारा बागवानी व दलहनी जैसी उन फसलों के नुकसान की भी क्षतिपूर्ति की जाएगी जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर नहीं होती हैं। वर्तमान में दलहन व कपास की फसल में ज्यादा नुकसान होने की संभावना है जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद स्पेशल गिरदावरी करवाई जाएगी । केएमपी के आस-पास के क्षेत्र में करीब साढ़े सात हजार एकड़ में जलभराव की समस्या भी सामने आई है, इसमें जिन-जिन किसानों को नुकसान हुआ है, रिपोर्ट आने के बाद गिरदावरी करवाकर प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति के लिए मुआवजा दिया जाएगा।

किसानों को जल्द दिया जायेगा पहले हुई फसल क्षति का मुआवजा

इस वर्ष फसलों के नुकसान की जो नियमित गिरदावरी हुई थी उसकी भी रिपोर्ट आ गई है, सरकार ने बीमा कंपनियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे किसानों के मुआवजे का भुगतान जल्द से जल्द करें, इसके अलावा जो फसलें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर नहीं होती हैं उनके नुकसान का भुगतान करने के लिए भी उपायुक्तों को निर्देश दे दिए गए हैं।

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16 टिप्पणियां

    1. जी मधुमक्खी पालन के लिए आप अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में सम्पर्क करें | वहां से आप प्रशिक्षण एवं अन्य जानकारी ले सकते हैं |

    1. जी फसल नुकसानी का सर्वे करवाएं | अपने यहाँ के पटवारी या कृषि अधिकारीयों से या यदि फसल बीमा है तो कंपनी से सम्पर्क करें |

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