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World Soil Day: जानिए आखिर क्यों 5 दिसंबर को मनाया जाता है “विश्व मृदा दिवस”, क्या है इसके मायने 

विश्व मृदा दिवस

हर साल 5 दिसंबर यानि के आज के दिन दुनिया भर में विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। हमारा 95 प्रतिशत भोजन मिट्टी और पानी से ही उत्पन्न होता है ऐसे में मिट्टी की खराब स्थिति के कारण मिट्टी का तेजी से कटाव हो रहा, जो दुनिया भर में एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बनता जा रहा। लगभग 45 साल पहले भारत में ‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों का ध्यान मृदा संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन की ओर लाना है।

लगातार असंतुलित खाद-उर्वरक के प्रयोग, अत्याधिक फसल उत्पादन, जनसंख्या का दबाव, बढ़ते प्रदूषण एवं अनुपयुक्त कृषि क्रियाओं के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मानव समृद्धि एवं मानव सभ्यता तथा पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बनाये रखने में मिट्टी की महत्व पूर्ण भूमिका है। ऐसे में लोगों का ध्यान मिट्टी के महत्व की और आकर्षित करने के लिए विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के द्वारा 5 दिसंबर को मृदा विश्व दिवस बनाने की घोषण की गई है।

कब से मनाया जा रहा है विश्व मृदा दिवस

स्वस्थ मिट्टी के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने और मिट्टी संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन की वकालत करने के लिए विश्व स्तर पर इसकी शुरुआत वर्ष 2013 से की गई थी। वर्ष 2002 में अंतर्राष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ (आईयूएसएस) द्वारा मिट्टी का जश्न मनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस की सिफारिश की गई थी।

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थाईलैंड साम्राज्य के नेतृत्व में और वैश्विक मृदा भागीदारी के ढांचे के भीतर, एफएओ ने वैश्विक मृदा के रूप में डब्ल्यूएसडी की औपचारिक स्थापना का समर्थन किया है। जागरूकता बढ़ाने वाला मंच. एफएओ सम्मेलन ने जून 2013 में सर्वसम्मति से विश्व मृदा दिवस का समर्थन किया और 68वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसे आधिकारिक रूप से अपनाने का अनुरोध किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 दिसंबर 2014 को पहले आधिकारिक रूप से विश्व मृदा दिवस के रूप में मनाया।

विश्व मृदा दिवस 2023 की थीम क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व मृदा दिवस 2023 का विषय मिट्टी और पानी, जीवन का एक स्रोत पर आधारित है। हमारा 95 प्रतिशत से अधिक भोजन इन दो मूलभूत संसाधनों से उत्पन्न होता है। मिट्टी का पानी, पौधों द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण है, हमारे पारिस्थितिक तंत्र को एक साथ बांधता है। यह सहजीवी संबंध हमारी कृषि प्रणालियों की नींव है। इसमें आगे कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधि के कारण, हमारी मिट्टी खराब हो रही है, जिससे हमारे जल संसाधनों पर अत्याधिक दबाव पड़ रहा है। कटाव प्राकृतिक संतुलन को बाधित करता है, जिससे पानी की घुसपैठ और सभी प्रकार के जीवन के लिए उपलब्धता कमी हो जाती है।

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इस तरह रखें मिट्टी का ध्यान

अधिक समय तक अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य का भरपूर ध्यान रखा जाए। समय-समय पर मिट्टी की जाँच करायी जाए तथा जाँच के अनुसार फसल के लिए जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों की अनुशंसित मात्रा का उपयोग किया जाए। अनुशंसित उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है, साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहता है। खेती की लागत में कमी आती है तथा फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है।

भारत में किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाये जाते हैं, जिसमें मिट्टी में मौजूद सभी पोषक तत्वों की जानकारी किसानों को दी जाती है। जिसके आधार पर खाद-उर्वरक का प्रयोग कर सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कृषि विभाग द्वारा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड का वितरण किया जाता है, साथ ही जगह जगह कार्यक्रम का आयोजन कर किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य के प्रबंधन के लिए जानकारी दी जाती है। 

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