बरसात के मौसम में कुक्कुट को इस तरह रोगों से बचाएं

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kukkut ki barsat me kya kare

बरसात में कुक्कुट पालक कौन से कार्य करें

बरसात के मौसम में कुक्कुट पक्षियों के सही रख – रखाव एवं उनकी देखभाल बहुत ही जरुरी हो जाती है | बरसात में उचित रख – रखाव न होने के कारण कुक्कुट व्यवसायियों को काफी क्षति उठानी पड़ती है | बरसात के मौसम में कुक्कुट पक्षियों की सही देखभाल हेतु बरसात शुरू होने से पूर्व कुक्कुट गृहों की मरम्मत का कार्य पूर्ण कर लिया जाय जैसे छतों से दरार / रिसाव , फर्श मरम्मत, पर्दे आदि ए सारी चीजें तैयार हो जानी चाहिए | प्लास्टिक के पर्दे से दोहरा फायदा कुक्कुट पलकों को मिलता है | पहला कि बरसात के बौछारों से बचाव दूसरा तेज हवाओं को रोकना, कुक्कुट आहार में फफूंद रोग हो जाना बरसात में आम बात हो जाती है | इसकी सावधान हेतु कुक्कुट पलकों को आहार का आयत बरसात में ज्यादा नहीं करना चाहिए | इसके लिए सुखा तथा ताजा आहार पहले से इकट्ठा कर भंडार गृह में रख लेना चाहिए |

कुक्कुट पालन में इन बातों का ध्यान रखें

मूंगफली की खली में फंगस का असर जल्दी होता है तथा इसके बचाव हेतु एन्टीफंगस का प्रयोग करना चाहिए | इस बात को ध्यान में रखे कि आहार में नमी की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक न होने पायें | मुर्गी जाली में एक से डेढ़ फिट दुरी पर पर्दों लगाना चाहिए ताकि पर्दों से पानी का रिसाव सीधे मुर्गियों के विछावें को गीला न करने पाये | गिला विछावे को तत्काल निकाल कर नया तथा सुखा विछावा/ बरादा को तुरन्त लगवाना चाहिए | गिले बरादे के कारण काक्सिडियोसिसजैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है | जिसके कारण फलकों में मृत्यु दर की सम्भावना अधिक हो जाती है तथा चूजे में विकास चाहिए इससे एस्परजिलासिस जैसी बीमारी की सम्भावना बढ़ जाती है | विछावन अगर ज्यादा गीला हो जाय तो इसमें चुना मिला दि ताकि बिछावन की नमी थोड़ी कम हो जाए |

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 विछावन ज्यादा सख्त हो जाये तो उसे निकलकर बाहर फिकवा दे तथा उसकी जगह सूखा लिटर रखवा दे | बरसात के दिनों में बिछावन की गहराई बढ़ा दे तथा प्रत्येक मुर्गियों को आधा वर्ग फीट की जगह और बढ़ा दे | 2 – 3 इंच सुखी रेट फर्श पर डालकर उस पर बिछवान बिछाने से जमीन की नमी से बिछावन का बचाव होता है | आहार का भंडारण गृह सीलन रहित होना चाहिए | आहार को रखने से पहले जमीन पर लकड़ी के पटरे रखेंगे | तदनुसार उस पर आहार की बोरी बारी – बारी से रखना चाहिए | इससे जमीन की नमी से आहार को बचाया जा सकता है |

 नये आहार की बोरी को 10 – 15 दिन के अन्दर अवश्य प्रयोग कर लेना चाहिए | बरसात के मौसम में मक्खियों का प्रकोप बढ़ जाता है | इसके कारण बहुत अधिक बीमारियों के फैलने की सम्भावनायें बढ़ जाती है | इसके लिए मैलाथियान का छिड़काव शेड के बाहर करवा लेने से इनका बचाव किया जा सकता है | जहाँ – जहाँ पर बीट अधिक गीली हो जाए उस जगह पर सुखी रेट बीट के ऊपर डाल दें |

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मक्खियों की रोकथाम हेतु बीट के ऊपर थोडा फिनायल का स्प्रे करने से मक्खियों का बचाव किया जा सकता है | दस्त की बीमारी बरसात में अधिक उत्पन्न हो जाती है | जो कि पेट में किडन की मौजूदगी से होती है | इसके लिए शाम के समय पिपराजीन साल्ट का प्रयोग उत्तम होता है | कुक्कुट गृहों की खाली जगह / गड्डे आदि को मिट्टी से भरवा दे ताकि मच्छरों , कीड़ों आदि के प्रजनन को रोका जा सकें | पानी के सभी भंडारण / स्त्रोत यानि पानी की टंकी, कुएं के पानी का कीटाणु रहित रकने के लिए ब्लींचिग पाउडर या पोटैशियम परमैगनेट का प्रयोग पानी में करना चाहिए |

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