अधिक बारिश से प्रभावित 40 जिलों के 55 लाख किसानों के लिए राज्य सरकार ने की 6621 करोड़ रुपये की मांग

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fasal nuksani ka nirikshan karta kendriya dal
अधिक बारिश से हुए नुकसान का निरिक्षण करता केंद्रीय दल

बारिश से हुए फसल नुकसान हेतु मुआवजा

इस वर्ष अधिक बारिश एवं बाढ़ से किसानों को बहुत अधिक नुकसान हुआ है, बारिश से खरीफ फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है | मानसून अब देश से वापस लौट चूका है एवं किसानों की फसलें खेत में तैयार हो चुकी है परन्तु अभी तक किसान मुआबजे का इन्तजार कर रहे हैं | प्रदेश में अभी तक सर्वे का कार्य चल रहा था |

मध्यप्रदेश में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रदेश को हुई क्षति के लिये नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फण्ड (एनडीआरएफ) से 6 हजार 621 करोड़ रूपये की सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। प्रदेश में खरीफ की 149.35 लाख हेक्टेयर फसल में से 60.52 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। इससे लगभग 55.36 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए  केन्द्र की ओर से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध करते हुये प्रदेश की स्थिति को गंभीर आपदा के रूप में लेने का अनुरोध किया ।

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केन्द्रीय दल के साथ राज्य शासन की बैठक

संयुक्त सचिव केन्द्रीय गृह मंत्रालय श्री एस.के.शाही के नेतृत्व में आये अंतर मंत्रालयीन केन्द्रीय दल ने प्रदेश के 15 जिलों का भ्रमण कर आज राज्य शासन के अधिकारियों के साथ मंत्रालय में बैठक की। केन्द्रीय दल को अवगत कराया गया कि प्रदेश में एक जून से 30 सितम्बर तक की अवधि में 1348.3 एम.एम. वर्षा हुई, जो सामान्य से 43 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 20 जिले अतिवृष्टि से प्रभावित हैं। भारी बारिश के कारण लगभग 75 हजार लोगों को राहत शिविरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर लाना पड़ा और लगभग 289 राहत शिविर संचालित किये गये।

राज्यपाल से मिला अंतर मंत्रालयीन केन्द्रीय दल

राज्यपाल श्री लालजी टंडन से प्रदेश में अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति के आंकलन के लिए प्रदेश प्रवास पर आये अंतर मंत्रालयीन केन्द्रीय दल ने आज राजभवन में भेंट की। राज्यपाल ने दल से कहा कि प्रदेश के अतिवृष्टि पीड़ित किसान और गरीब के प्रति संवेदनशील दृष्टि के साथ क्षति का अध्ययन किया जाए।

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क्षति का आंकलन उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अतिवृष्टि से सोयाबीन और अन्य फसलों की काफी हानि की सूचनाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बड़े भू-भाग में सोयाबीन फसल का उत्पादन होता है। अतिवृष्टि से सोयाबीन की फसल को काफी नुकसान हुआ है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की कृषि अर्थ-व्यवस्था में सोयाबीन का बड़ा योगदान है। फसल की क्षति से ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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