राजस्थान

राजस्थान में लम्पी रोग को लेकर अलर्ट, 10 जिले प्रभावित; पशु मेले-हाट पर रोक, घर-घर होगा बीमार पशुओं का सर्वे

राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज से 10 जिले प्रभावित हैं और अब तक 16 पशुओं की मौत हुई है। सरकार ने पशु मेले-हाट पर रोक लगाकर घर-घर बीमार पशुओं के सर्वे के निर्देश दिए हैं।

Lumpy Skin Disease Alert Rajasthan Review Meeting

राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) की स्थिति को देखते हुए पशुपालन विभाग ने निगरानी और नियंत्रण के उपाय तेज कर दिए हैं। प्रदेश में फिलहाल 10 जिले लम्पी रोग से प्रभावित हैं और अब तक इस बीमारी से 16 पशुओं की मौत होने की जानकारी दी गई है। प्रभावित जिलों में अधिकांश जिले पूर्वी राजस्थान के बताए गए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर लम्पी रोग की मौजूदा स्थिति और इसके प्रभावी नियंत्रण को लेकर पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले की अध्यक्षता में पशुधन भवन स्थित राजस्थान राज्य पशुधन विकास बोर्ड के सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभावित क्षेत्रों के सर्वेक्षण, पशुओं के टीकाकरण, उपचार और रोग को दूसरे जिलों में फैलने से रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई।

राजस्थान के 10 जिलों में लम्पी रोग का असर

पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बैठक में बताया कि वर्तमान में राजस्थान के 10 जिले लम्पी रोग से प्रभावित हैं। इनमें अधिकतर पूर्वी राजस्थान के जिले हैं। विभाग के अनुसार सक्रिय रूप से प्रभावित गोवंश की संख्या में कमी आ रही है। हालांकि, अभी तक बीमारी के कारण 16 पशुओं की मौत दर्ज की गई है।

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लम्पी रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जरूरी कदम समयबद्ध तरीके से उठाए जाएं और प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों तक आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जाएं।

पशु मेले और पशु हाट पर लगाया गया प्रतिबंध

लम्पी रोग के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश में पशुओं की आवाजाही पर भी नियंत्रण किया जा रहा है। इसी के तहत पशु मेले और पशु हाट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। बीमारी की स्थिति में तेजी से कार्रवाई के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (Rapid Response Teams) का भी गठन किया गया है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल नियंत्रणात्मक कदम उठाने पर जोर दिया गया है।

घर-घर जाकर होगा बीमार पशुओं का सर्वे

लम्पी रोग के मामलों की जल्द पहचान के लिए प्रमुख शासन सचिव ने पशु चिकित्साधिकारियों को घर-घर जाकर बीमार पशुओं का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के दौरान बीमारी के संदिग्ध और प्रभावित पशुओं की पहचान कर उनके लिए आवश्यक चिकित्सा और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।जिला स्तर पर विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और दूसरे संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिन जिलों में लम्पी नहीं पहुंचा, वहां रोकथाम पर विशेष फोकस

सरकार ने केवल प्रभावित जिलों में बीमारी को नियंत्रित करने ही नहीं, बल्कि अभी तक इससे बचे जिलों में संक्रमण को पहुंचने से रोकने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है। प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में अभी तक लम्पी रोग के केस सामने नहीं आए हैं, उन जिलों पर विशेष फोकस किया जाए। ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जिससे इन क्षेत्रों में रोग का प्रकोप न फैल सके। इसके लिए पशुओं की आवाजाही की निगरानी और जिला स्तर पर सतत सतर्कता महत्वपूर्ण होगी।

पशुपालकों को बताए जाएंगे लक्षण और बचाव के तरीके

पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को लम्पी रोग के लक्षण, बचाव और उपचार से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। पशु चिकित्सा संस्थाओं के माध्यम से जरूरी चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। विभाग विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए पशुपालकों तक रोग से बचाव की जानकारी पहुंचा रहा है। अधिकारियों को अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्वे, टीकाकरण और उपचार की लगातार होगी निगरानी

समीक्षा बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे सर्वेक्षण, टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को जिला स्तर पर बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। राज्य सरकार का फोकस प्रभावित पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ बीमारी को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकने पर है। इसके लिए पशु चिकित्सा विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

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