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राजस्थान में एग्रीस्टैक से जुड़ेंगे सभी किसान: 87.44 लाख फार्मर आईडी पूरी, खाद वितरण और MSP खरीद में होगा इस्तेमाल

राजस्थान में 87.44 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry) पूरी हो चुकी है। एग्रीस्टैक से खाद वितरण, MSP खरीद और किसान योजनाओं को जोड़ने की तैयारी तेज हुई।

Farmer Registry Rajasthan Progress

राजस्थान में किसानों को कृषि सेवाओं से जोड़ने के लिए एग्रीस्टैक (AgriStack) को तेजी से लागू किया जा रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित एग्रीस्टैक स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry), किसान आईडी (Farmer ID), डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey), खाद वितरण, MSP पर खरीद और किसान केंद्रित योजनाओं को एग्रीस्टैक से जोड़ने की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एग्रीस्टैक का उद्देश्य केवल डिजिटल डेटाबेस तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी भूमि, फसल और कृषि सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत और आसान तरीके से उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ एग्रीस्टैक के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

राजस्थान में 87.44 लाख किसानों की Farmer Registry पूरी

बैठक में बताया गया कि राजस्थान में अब तक 87 लाख 44 हजार 842 किसान Farmer Registry में पंजीकृत हो चुके हैं। यह निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। राज्य को एग्रीस्टैक से संबंधित कार्यों की प्रगति के आधार पर अब तक 737 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत हो चुकी है।

मुख्य सचिव ने शेष किसानों का पंजीकरण अभियान चलाकर पूरा करने के निर्देश दिए। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष फील्ड विजिट, संभागवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और प्रशिक्षण आयोजित करने के साथ कृषि पर्यवेक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि Farmer Registry को 100 प्रतिशत पूरा करने के साथ-साथ इसे लगातार अपडेट रखना भी जरूरी है। इसके लिए मोबाइल ऐप के व्यापक इस्तेमाल तथा SMS, समाचार पत्रों, ग्राम पंचायतों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य माध्यमों से किसानों को पंजीकरण के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए।

Farmer ID से भूमि रिकॉर्ड का होगा सीधा समन्वय

एग्रीस्टैक के तहत कृषक रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखों के बीच नियमित एवं स्वचालित समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। इससे नामांतरण के बाद किसान की भूमि से संबंधित नवीनतम जानकारी स्वतः अपडेट की जा सकेगी। मुख्य सचिव ने नामांतरण के समय आधार संख्या और Farmer ID दर्ज करने की व्यवस्था जल्द लागू करने तथा संबंधित विभागों के बीच आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही काश्तकारों, बटाईदारों और अन्य वास्तविक किसानों को फार्मर रजिस्ट्री में शामिल करने के लिए कार्यविधि जल्द अंतिम रूप देने को कहा गया। इसका उद्देश्य खेती और बटाईदारी व्यवस्था से जुड़े वास्तविक किसानों की सटीक जानकारी तैयार करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाया जा सके।

एग्रीस्टैक से खाद वितरण में आएगी पारदर्शिता

बैठक में एग्रीस्टैक आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि राजसमंद और सिरोही में Framework for Fertilizer Sale लागू किया जा चुका है।

इस व्यवस्था के तहत अब तक 65 हजार से अधिक किसानों ने 10 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक खरीदा है। इसकी सफलता को देखते हुए मुख्य सचिव ने एग्रीस्टैक आधारित खाद वितरण व्यवस्था को पूरे राजस्थान में लागू करने के निर्देश दिए। इससे किसानों को खाद खरीदने में सुगमता और पारदर्शिता मिलने के साथ उर्वरक वितरण की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

MSP खरीद और किसान योजनाओं से जुड़ेगी Farmer Registry

मुख्य सचिव ने Farmer Registry के आंकड़ों का इस्तेमाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कृषि उपज की खरीद, उर्वरक वितरण और अन्य किसान केंद्रित सेवाओं में करने पर जोर दिया। उन्होंने Farmer Registry को सभी किसान केंद्रित योजनाओं से चरणबद्ध तरीके से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) सहित अन्य योजनाओं के शेष लाभार्थियों को Farmer ID से जोड़ने और किसानों को इसके बारे में जागरूक करने को कहा।

इससे भविष्य में किसान की पहचान, भूमि और फसल से संबंधित जानकारी के आधार पर सरकारी सेवाओं और योजनाओं को अधिक लक्षित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल क्रॉप सर्वे में 1.89 करोड़ खसरों का सर्वे पूरा

बैठक में Digital Crop Survey की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि लक्षित 2.36 करोड़ खसरों में से 1.89 करोड़ खसरों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। यह कुल लक्ष्य का 80.21 प्रतिशत है।

मुख्य सचिव ने आगामी खरीफ 2083 में डिजिटल फसल सर्वेक्षण को अधिक सटीक और सहभागी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्थान की सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों और 50,478 ऑनलाइन गांवों में सर्वेक्षण सुनिश्चित करने को कहा।

सर्वेक्षण के दौरान 20 मीटर भू-सीमा निर्धारण और भू-चिह्नित फसल फोटो के माध्यम से प्रमाणिक आंकड़े जुटाने पर भी जोर दिया गया।

किसानों की स्वयं गिरदावरी पर भी जोर

आगामी खरीफ 2083 में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाने के लिए कम से कम 25 प्रतिशत, यानी लगभग 71 लाख खसरों की स्वयं गिरदावरी का लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया गया। इससे खेत और फसल से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के साथ डिजिटल रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाने में मदद मिल सकती है।

एग्रीस्टैक से किसानों को क्या फायदा होगा?

राजस्थान सरकार एग्रीस्टैक को केवल एक डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम के रूप में नहीं, बल्कि किसानों को विभिन्न कृषि सेवाओं से जोड़ने वाले एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों को भविष्य में उनकी भूमि, फसल और किसान पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर विभिन्न सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सकती है। इसके अलावा खाद वितरण, MSP खरीद, कृषि योजनाओं और फसल संबंधी सेवाओं को अधिक लक्षित और पारदर्शी बनाने में भी डिजिटल डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक एक बहु-विभागीय पहल है। इसके लिए कृषि विभाग, राजस्व मंडल, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, NIC, सहकारिता विभाग, राजफेड और जिला प्रशासन के बीच लगातार समन्वय जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एग्रीस्टैक से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किसानों को समय पर और लक्षित सेवाएं देने, फसल एवं उर्वरक की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने तथा कृषि योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए किया जाए।

एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की तैयारी

बैठक में बजट घोषणा के अनुरूप कृषि विभाग के आयुक्तालय में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना और स्वतंत्र पद सृजन से संबंधित प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए।

बैठक में वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया, राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल, सहकारिता विभाग के सचिव समित शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सेवानिवृत्त आईएएस एवं एग्रीस्टैक, नई दिल्ली के चीफ नॉलेज ऑफिसर राजीव चावला ने ऑनलाइन भाग लिया।

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