राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। सुरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में एक ही जमीन के खसरा नंबर पर कई लोगों के नाम से फसल बीमा पॉलिसियां बनाकर लाखों रुपये का बीमा क्लेम लेने का मामला विभागीय जांच में सही पाया गया है।
जांच के अनुसार, एक ही खसरे के वास्तविक क्षेत्रफल से करीब 7 गुना अधिक क्षेत्र में मूंगफली की फसल का बीमा कराया गया। इस मामले में करीब 31.15 लाख रुपये के क्लेम का विवरण सामने आया है। कृषि विभाग ने मामले में शामिल किसानों, सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और संबंधित बीमा कंपनी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
एक ही जमीन पर सात लोगों ने कराया फसल बीमा कृषि
आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने जांच रिपोर्ट का खुलासा करते हुए बताया कि कालूसर गांव के खसरा नंबर 281/91 पर संगठित तरीके से लगभग ₹30 लाख का घोटाला किया गया:
- एक ही खसरे पर 3-3 बीमा पॉलिसियां: किसान बनवारी लाल ने अपनी 10.37 हेक्टेयर ज़मीन पर ऋणी किसान के रूप में मूंगफली की फसल का बीमा कराया। इसी खसरे पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार और बिजेश से भी अलग-अलग पॉलिसियां जारी करवाईं और कुल ₹23,35,319 का क्लेम उठाया।
- बटाईदार बनाकर दूसरा क्लेम: बनवारी लाल ने यही ज़मीन रिछपाल नाम के व्यक्ति को बटाई (लीज) पर दी, जिसने भी 10.37 हेक्टेयर में बटाईदार के रूप में बीमा कराकर ₹7,80,195 का क्लेम प्राप्त किया।
- 3 अन्य पॉलिसियां रिजेक्ट: इसी खसरा नंबर पर 3 अन्य लोगों (इमीचंद, प्रमीला और ओमप्रकाश) ने भी बीमा कराया था, जिसे बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया।
- बीमा कंपनी और ई-मित्र की मिलीभगत: वास्तविक क्षेत्रफल से 7 गुना अधिक ज़मीन पर पॉलिसियां जारी की गईं, जिसमें बीमा कंपनी और ई-मित्र संचालकों की सीधी संलिप्तता पाई गई है।
विभाग को बीमा कंपनी की संलिप्तता का भी संदेह
कृषि विभाग के अनुसार, एक ही खसरे पर कई बीमा पॉलिसियां जारी होना और वास्तविक क्षेत्रफल से कई गुना अधिक क्षेत्र में बीमा कराया जाना गंभीर अनियमितता है। विभाग का कहना है कि इस तरह का संगठित फर्जीवाड़ा सीएससी (ई-मित्र), बीमा कंपनी और संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं माना जा सकता। मामले में बीमा कंपनी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कृषि मंत्री ने दिए एफआईआर और कठोर कार्रवाई के निर्देश
मामला सामने आने के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद श्रीगंगानगर को संबंधित सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार बनवारी लाल, रिछपाल तथा अन्य संबंधित किसानों के साथ सीएससी संचालक विकास कुमार, बिजेश और संबंधित बीमा कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’
कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए ‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ शुरू किया है। विभाग का कहना है कि योजना का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक पहुंचाना प्राथमिकता है।
इस अभियान के तहत संदिग्ध बीमा पॉलिसियों की जांच की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है, जिनमें किसानों ने कृषि ऋण नहीं लिया है लेकिन फसल बीमा कराया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी पॉलिसी बनाने या फर्जी तरीके से क्लेम प्राप्त करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब फसल बीमा में Farmer ID होगी जरूरी
फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने इस बार कृषि बीमा पॉलिसी के साथ Farmer ID को अनिवार्य किया है। इससे बीमा प्रक्रिया में किसान की पहचान और भूमि संबंधी जानकारी का मिलान आसान होगा तथा संदिग्ध पॉलिसियों की पहचान तेजी से की जा सकेगी। विभाग का मानना है कि डिजिटल किसान पहचान व्यवस्था से एक ही जमीन पर कई पॉलिसी बनाने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
टोंक और जयपुर में भी फर्जी फसल बीमा पर एफआईआर
श्रीगंगानगर के मामले से पहले कृषि विभाग ने टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में भी खरीफ 2026 के लिए फर्जी फसल बीमा कराने वाले ई-मित्र संचालकों और अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इससे संकेत मिलता है कि कृषि विभाग राज्यभर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े संदिग्ध मामलों की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है।
फर्जी पॉलिसी वालों को अंतिम मौका
कृषि आयुक्त ने सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, ब्रोकर, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने फर्जी तरीके से बनाई गई फसल बीमा पॉलिसियों को तत्काल निरस्त कराने का अवसर भी दिया है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों के लिए क्या है संदेश?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। ऐसे में फर्जी पॉलिसी और गलत क्लेम से वास्तविक किसानों को नुकसान पहुंच सकता है।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा और योजना की पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई में नरमी नहीं बरती जाएगी।