back to top
शनिवार, अप्रैल 13, 2024
होमविशेषज्ञ सलाहलॉकडाउन 2.0: कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए खेती-किसानी के कार्यों के...

लॉकडाउन 2.0: कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए खेती-किसानी के कार्यों के लिए जारी की सलाह

खेती-किसानी के कार्यों के लिए सलाह

देश में लॉकडाउन 2.0 शुरू हो चूका है ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किये गए हैं | कृषि सेक्टर पर कोविड–19 के प्रभावों को न्यूनतम करने तथा किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा सरकारी पहल में अनेक तरह से सहयोग किया जा रहा है | केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लॉकडाउन  अवधि के दौरान ICAR के कार्यों की समीक्षा कर दिशा–निर्देश दिए | ICAR के तीन अनुसंधान संस्थानों में कोविड–19 जांच हो रही है, सभी कृषि वि.वि. को कक्षाएं आँनलाइन लेने को कहा गया, कृषि विज्ञान केन्द्रों से करोड़ों किसानों को सलाह दी गई हैं |

श्री नरेंद्र तोमर के निर्देश पर एम–किसान पोर्टल से कृषि विज्ञान केन्द्रों ने राज्यों में 1126 परामर्श जारी कर सीधे पांच करोड़ किसानों तक पहुंच बनाई | किसानों के लिए भाषा के आधार पर 15 क्षेत्रीय भाषाओँ में अनुवाद करके डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार–प्रसार किया जा रहा है | किसान समाधान ICAR के तरफ से जारी सलाह तथा केंद्र सरकार के तरफ से जारी छुट की जानकारी लेकर आया है |

खेती किसानी के कर्यों के लिए जारी की गई सलाह

फसलों की कटाई और मड़ाई

  • कोविड–19 के फैसले के खतरे के बीच, रबी फसलों के पकाव का समय आ रहा है | फसल कटाई और उत्पादन को संभालना जिसमें शामिल है इसको विपणन के लिए ले जाना इन्हें टला नहीं जा सकता क्योंकि कृषि कार्य समयबद्ध होते हैं | परंतु किसानों को बिमारी के फैलाव को रोकने के लिए सावधानियों और सुरक्षा उपायों को अपनाना पड़ेगा |
  • साधारण उपायों में सम्मिलित है सामाजिक दुरी, हाथों को साबुन से धकर अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, चेहरे पर मास्क पहनना, सुरक्षा परिधान और औजारों और मशीनों की सफाई | श्रमिकों को कृषि कार्यों की पूरी प्रक्रियाओं के दौरान प्रत्येक कदम पर समाजिक दुरी और सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए |
  • उत्तर राज्यों में गेहूं की कटाई नजदीक आ रही है और कम्बाइन हार्वेस्टर के राज्यों के अंदर और एक से दुसरे राज में आवागमन की अनुमति दी गई है | मरम्मत, रख – रखाव और कटाई संबंधी कार्यों में लगे सभी श्रमिकों के सावधानियों और सुरक्षा उपायों की सुनिश्चित किया जाना चाहिए |
  • सरसों रबी दूसरी महत्वपूर्ण फसल है, हाथ से कटाई चल रही है और जहां भी फसल कट गई है वहाँ मड़ाई बाकी है |
  • मसूर, मक्का और मिर्च की कटाई चल रही है और चना की जल्दी शुरू होने वाली है |
  • गन्ने की कटाई अपने चरम पर है और उत्तर भारत में हाथ से बुवाई का भी समय है |
  • जो भी फसलों , फलों, सब्जियों, अण्डों और मछली की कटाई में लगे है उनके द्वारा , कृषि कार्यों के दौरान और बाद में , व्यक्तिगत स्वच्छता उपाय और समाजिक दुरी को अपना जाना चाहिए |
  • जहाँ कटाई / चुनाई कर कार्य हाथों से हो रहा हो, वहन कार्य को 4 – 5 फीट चौडाई की पत्तियों में किया जाना चाहिए और एक पट्टी में एक व्यक्ति को कार्य करना चाहिए | इससे कार्यरत श्रमिकों में समुचित दुरी सुनिश्चित होगी |
  • कार्यरत सभी व्यक्तियों को मास्क का उपयोग करना चाहिए और समुचित अंतराल पर साबुन से हाथ धोना सुनिश्चित किया जाना चाहिए |
  • आराम के दौरान, खाना खाते समय, उत्पादन का संग्रहण केंद्र पर परिवहन के समय, उतारते / चढ़ते समय 3–4 फीट की सुरक्षित दुरी बनाए रखे |
  • जहां तक संभव हो कृषि कार्य समय अन्तराल से करे और एक ही दिन में भुत सारे लोगों को काम में लगाने से बचे |
  • जहां तक संभव हों परिचित व्यक्तियों को ही कार्य में लगाए और आवश्यक पूछताछ के बाद ही लगाए ताकि कृषि कारों के दौरान किसी भी संदिग्ध या विषाणु वाहक के प्रवेश से बचा जा सके |
  • जहां भी व्यवहार्य हो वहां मशीनों से कटाई को प्राथमिकता देवें | मशीन के साथ केवल जरूरी संख्या में आवश्यक व्यक्तियों को ही अनुमति दें |
  • सभी मशीनों को प्रवेश द्वार और नियमित अंतराल पर सेनीटाइज (अच्छी तरह से साफ़ सफाई) करते रहे | सभी परिवहन वाहनों , जूट बोरोन या अन्य पैकेजिंग सामान को भी सेनीटाइज किया जाना चाहिए |
  • उत्पादन का संग्रहण 3 – 4 फीट की दुरी पर छोटी ढेरियों में किया जा सकता है और खेत स्तर के प्रसंस्करण को प्रति धेरी 1 -2 व्यक्तियों को दिया जाना चाहिए जिससे भीड़ से बचा जा सके |
  • मक्का और मूंगफली के लिए उपयोग में लाये जाने वाले थ्रेसर की उचित स्वच्छता और सफाई राखी जानी चाहिए , विशेषकर यदि मशीने कृषिक समूह द्वारा सहभागिता / साझेदारी में उपयोग लाई जा रही हो | मशीनों के उन भागों की प्रचुरता से साबुन के पानी से धुलाई करने की सलाह दी जाती है जिन्हें उपयोग के समय बार – बार छुआ जाता है |
यह भी पढ़ें   जुलाई महीने में मक्का की खेती करने वाले किसान करें यह काम, मिलेगी भरपूर पैदावार

फसल कटाई उपरांत, भंडारण और कृषि में किसान क्या करें

  • जब सुखाने , मड़ाई, ओसाई, सफाई, श्रेणीकरण, छंटाई और पैकेजिंग आदि कार्य खेत पर करे तब, मुहं पर सुरक्षा मास्क जरुर पहने इससे धुल मिट्टी के कणों और एरोसोल के खिलाफ सुरक्षा मिल सकता है जिससे साँस संबंधी परेशानियों से बचा जा सके |
  • भंडारण से पूर्व अनाजों, दलहनों और मोटे अनाजों को खेत / घर पर पूरी तरह से सुखाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए और गत वर्ष उपयोग में लाये जूट बोरोन का फिर से उपयोग करने से बचन चाहिए ताकि कीड़ों के प्रकोप से बचाव हों | जूट के बोरो का 5% नीम के घोल में डुबाने और सुखाने के बाद प्रयोग करें |
  • उत्पादन को खेत पर या नजदीकी शीत भंडारण गृह, गोदाम आदि में भंडारण करें, यदि बेहतर भाव एक लिए जरुरी हो तो, भंडारण के लिए जूट बोरोन का उपयोग पर्याप्त सावधानी के साथ करना चाहिए जो कि किसानों को पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाए गये हैं |
  • कृषि उत्पाद को लिए चढ़ने और परिवहन करने तथा मण्डी में बेचना के लिए नीलामी में भाग लेते समय व्यक्तिगत सुरक्षा के पर्याप्त उ[पाय करने चाहिए |
  • बीज उत्पादक किसानों को आवश्यक जरुरी कागजात के साथ बीज कंपनियों को बीज परिवहन करने की अनुमति होगी और भुगतान प्राप्ति के समय सावधानी अपनानी होगी |
  • बीज प्रसंस्करण / पैकेजिंग संयंत्र और बीज उत्पादक राज्यों से बीजों का फसल उगाने वाले राज्यों (दक्षिण से उत्तर) तक परिवहन अत्यंत आवश्यक है ताकि खरीफ फसलों के लिए बीज उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके |
  • सब्जयों जैसे टमाटर, फूलगोभी, हरी पत्तेदार सब्जियों, क्द्दुवर्गीय और अन्य सब्जियों के खेत से सीधा बेचान (विपणन) आपूर्ति करने में सावधानी बरती जानी चाहिए |
यह भी पढ़ें   धान की खेती करने वाले किसान जुलाई महीने में करें यह काम, मिलेगी भरपूर पैदावार

खेत में खड़ी फसलों के लिए किसान क्या करें 

  • ज्यादातर गेहूं उगाने वाले क्षेत्रों में तापमान अभी भी दीर्घ अवधि औसत तापमान से निचे चल रहा है जिससे गेहूं की कटाई में कम से कम 10 – 15 दिनों की देरी होगी यानि 10 अप्रैल से आगे तक , इसलिए किसान गेहूं की कटाई 20 अप्रैल तक कर सकते हैं उपज में बिना किसी महत्वपूर्ण नुकसान के , इससे उनकों पर्याप्त समय मिल जाएगा, खिद के लिए सहायक उपायों का प्रबंध करने और तिथि घोषित करने में |
  • दक्षिण राज्यों में धान की फसल दाना भरने की अवस्था में है और ए ग्रीवा झुलसा के प्रकोप से बड़े स्तर पर प्रभावित होती है, जब अनुमोदित फफुन्द्नाशक का संविदा पर छिडकने वाले / किसान छिडकाव करे तब पर्याप्त सावधानी बरती जानी चाहिए |
  • धान की कटाई की अवस्था में यदि खिन पर बेमौसम बारिस हो जाए तो दानों को अंकुरित होने से बचाने के लिए 5% नमक के घोल का छिडकाव करें |
  • बागवानी फसलों में फलं अवस्था है, जैसे कि आम, पौषक तत्व छिडकाव व पौध संरक्षण जैसी कृषि क्रियाएं करते समय आदानों को संभालने, मिलाने , पहुँचाने और उपकरणों को धोने आदि में सावधानी बरती जानी चाहिए |
  • धान के बाद में ग्रीष्मकालीन दलहनों में सफेद मक्खी के प्रबंधन पुरे सुरक्षा उपायों के साथ किया जाना चाहिए जिससे पिला मौजेक विषाणु के प्रकोप से बचा जा सके |

किसान समाधान के YouTube चेनल की सदस्यता लें (Subscribe)करें

4 टिप्पणी

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
यहाँ आपका नाम लिखें

ताजा खबरें

डाउनलोड एप