खेती-किसानी के लिए लोन और बैंकों की धोखाधड़ी

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खेती-किसानी के लिए लोन और बैंकों की धोखाधड़ी

खेती किसानी के लिए लोन किसानों को सूदखोरों से बचाने के लिए सबसे अच्छी योजना है | इस योजना से किसानों को वार्षिक 7% के ब्याज पर कृषि लोन मिल जाता है जबकि गाँव में साहूकार किसानों को 5 से 10 % के मासिक ब्याज पर लोन देते है | केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष किसानों के लिए खेती किसानी ऋण  के लिए पैसे जारी किया जाता है और उस कृषि लोन का 18% सिर्फ कृषि कार्यों के लिए किसानों को दिया जाता है |

बैंक, सरकार तथा निजी कम्पनी मिलकर उसी कृषि योजना में नियम बनाकर तथा नियम को नहीं मानते हुये आपसे वसूली करने लगेंगे तो आप क्या कहेंगे | किसान समाधान आज आप को एक इसी तरह का बैंक द्वारा की जा रही धोखाधड़ी के बारे में बताने जा रहा है | जिससे आप प्रतिदिन उस धोखाधड़ी से जूझते हैं लेकिन आपको इस विषय में मालूम नहीं चलता है |

किसान भाई आप सभी लोग कृषि कर्ज राष्ट्रीय बैंक तथा सहकारी बैंक से लेते है | राष्ट्रीय बैंक से कर्ज नगद रहता है जो 3 लाख तक 7% की ब्याज पर रहता है | जबकि सहकारी बैंक से नगद पैसा तथा उर्वरक (खाद) के रूप में मिलता है | आप सभी कृषि कर्ज लेते हैं , उस समय आपसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर खरीफ के समय 2%, रबी फसल के समय 1.5% तथा बागवानी के लिए 5% का अतरिक्त पैसा जोड़ दिया जाता है | इसी तरह जब किसान सहकारी बैंक या सोसायटी से नगद या उर्वरक (खाद) के रूप में कृषि लोन लेता है तो उस पर इसी दर से उस लोन पर जोड़ दिया जाता है |

धोखाधड़ी कैसे होती है ?

  1. किसान जब सहकारी बैंक से उर्वरक (खाद) लेते हैं तो वह कुल कृषि पंजीयन के अनुसार ही देता है | किसानों को सहकारी भूमि को पंजीयन कराना जरुरी है | इसी पंजीयन के आधार पर किसान सोसायटी में फसल बेच सकता है | अब इसे इस तरह समझते हैं | मान लेते हैं की एक किसान अ है जिसके पास 10 एकड़ कृषि भूमि है | वह सभी भूमि (जमीन) को सोसायटी में पंजीयन किया है |
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मान लेते हैं की किसान रबी फसल के समय 3 एकड़ में गेंहू , 3 एकड़ में चना तथा 2 एकड़ में मसूर तथा 2 एकड़ में खेती नहीं कर पाता है | किसान गेंहू के फसल में ही उर्वरक देता है | उस उर्वरक के लिए सोसायटी में जाता है तथा 6 पैकेट यूरिया तथा 2 पैकेट डी.ए.पी. लोन पर लेता है | अब इस जगह पर किसानों से धोखा किया जाता है | यहाँ पर किसान का बीमा किया जायेगा  लेकिन बीमा कितना का होगा ही जानना जरुरी है |

अब इससे क्या होगा 

यहाँ पर किसान का बीमा केवल किसान के द्वारा लोन पर लिए गए खाद के ऊपर ही होगा | यानि 6 पैकेट यूरिया तथा 2 पैकेट डी.ए.पी. के मूल्य के ऊपर 1.5% का बीमा होगा लेकिन बैंक किसान के पुरे भूमि का बीमा कर देता है | किसान इस बात का ध्यान रखें की पूरी भूमि का बीमा करने के लिए नियम में कहीं नहीं लिखा हुआ है | इसके बाबजूद भू बैंक बीमा कर देता है | किसान उस समय तो खाद लेकर घर आजता है लेकिन जब लोन चुकाने जाता है तो उसके खाद की कीमत बाजार में मिल रहे खाद से कहीं ज्यादा हो जाता है |  हम आप किसानों को ही कहना चाहता है की आप बैंक को इस गलती की याद दिलायें क्योंकि प्रीमियम देने से भी कोई फायदा नहीं है | फसल के नुकसानी पर किसी भी तरह का प्रीमियम नहीं दिया जायेगा |

  1. भारत के किसी भी प्रदेश के किसान जब फसल बोते हैं तो अपनी सुविधा के अनुसार फसल का चयन करते है | जबकि उनके भूमि में क्या बोना है रबी तथा खरीफ सीजन में यह कृषि विभाग के पास तय किया हुआ है | इसकी जानकारी या तो बैंक या फिर तहसील में कृषि वरिष्ठ अधिकारी से प्राप्त कर सकते हैं |
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गलती कहाँ होती है 

समझते हैं कि किसान के साथ धोखा कहाँ होता है | जब किसान किसी भी बैंक से कृषि लोन लेता है तो उससे खरीफ , रबी के अनुसार प्रीमियम जोड़ देता है | लेकिन अगर किसान अपने भूमि में फसल सरकार के नियम अनुसार नहीं बोया है यानि जिस भूमि में जो फसल बोना है (कुछ फसल पटवारी हल्का तथा कुछ फसल तहसील स्तर पर तथा कुछ फसल जिला स्तर पर ) उस फसल को नहीं बोकर किसी दुसरे फसल की बुआई करता है तो उस किसान के फसल का बीमा नहीं होता है | इसके बाबजूद भी सभी बैंक (राष्ट्रीय तथा सहकारी) बैंक बीमा कर देता है तथा लोन के ऊपर बैंक बिमा का प्रीमियम जोड़ देता है |

किसान समाधान देश के सभी किसानों को यह बात बताना चाहता है की कृषि लोन लेने से पहले आप बैंक से पटवारी हल्का तथा तहसील और जिला स्तर पर जो फसल पंजीकृत है उसे मांगे | अगर उसके अनुसार आप फसल नहीं बोयें हैं तो आप प्रीमियम देने से मना कर दें | क्योकि फसल नुकसानी होने पर किसान को किसी भी तरह का क्षति पूर्ति नहीं किया जायेगा |

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