खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती से अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए सही और उन्नत किस्म का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा भारत के अलग-अलग राज्यों और कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Zones) के लिए विशेष किस्में विकसित की गई हैं। ये नई किस्में न सिर्फ कम समय में पककर तैयार होती हैं, बल्कि क्षेत्र विशेष में लगने वाले कीटों और रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी भी हैं। इससे किसानों की लागत कम होती है और पैदावार रिकॉर्ड तोड़ मिलती है।
अपने क्षेत्र और राज्य के अनुसार चुनें सोयाबीन की सर्वश्रेष्ठ किस्में:
मध्य क्षेत्र (Central Zone)
अनुशंसित राज्य: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड भाग, राजस्थान, गुजरात और उत्तरी-पश्चिमी महाराष्ट्र के लिए
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सोयाबीन की उन्नत किस्म |
औसत परिपक्वता अवधि (दिन) |
औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
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JS 24-33 |
90 |
22-23 |
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NRC 150 |
91 |
18 |
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JS 21-72 |
97 |
21 |
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NRC 147 |
96 |
23 |
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JS 23-03 |
93 |
23 |
|
JS 23-09 |
92 |
21 |
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MAUS 731 (मराठवाड़ा) |
105 |
28 |
|
JS 22-12 |
90 |
21 |
|
JS 22-16 |
91 |
21 |
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NRC 165 |
90 |
19 |
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NRC 157 |
93 |
16 |
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MAUS 725 (Maharashtra*) |
92-96 |
24 |
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Phule Durva (KDS 992 Maharashtra*) |
101 |
27 |
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RVSM 2011-35 |
98 |
22 |
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AMS 100-39 (PDKV Amba) |
97 |
21 |
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MACS 1520 |
98-120 |
22 |
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RSC 10-46 |
102 |
19 |
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RSC 10-52 |
101 |
21 |
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AMS–MB-5-18 (सुवर्ण सोया) |
100 |
20 |
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NRC 181 |
93 |
16-17 |
उत्तरी मैदानी क्षेत्र (Northern Plain Zone)
अनुशंसित राज्य: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के पूर्वी मैदान, मैदानी उत्तराखंड और पूर्वी बिहार के लिए
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सोयाबीन की उन्नत किस्म |
औसत परिपक्वता अवधि (दिन) |
औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
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Pusa Soybean 21 |
– | – |
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NRC 149 |
125 |
26 |
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Pant Soybean 27 (PS 1670) |
122 |
23 |
|
SL 1074 |
124 |
19 |
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SL 1028 |
124 |
21 |
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NRC 128 |
110 |
22 |
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Uttarakhand Black Soybean (Bhat 202)* |
100-115 |
16 |
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SL 979 |
127 |
24 |
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SL 955 |
126 |
22 |
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Pant Soybean 26 (PS 1572) |
120 |
20 |
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PS 1368 |
117-125 |
21 |
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PS 24 (PS 1477) |
113 |
26 |
पूर्वी एवं उत्तर पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र (Eastern & North–Eastern Zone)
अनुशंसित राज्य: छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम के लिए
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सोयाबीन की उन्नत किस्म |
औसत परिपक्वता अवधि (दिन) |
औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
|
RSC 11-35 |
107 |
24 |
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RSC 10-71 |
107 |
19 |
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RSC 10-52 |
101 |
20 |
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Birsa Soya-4 (झारखंड) |
115-120 |
20 |
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MACS 1407 |
104 |
21 |
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MACS 1460 |
97 |
23 |
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NRC 128 |
110 |
23 |
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RSC 11-07 |
107 |
17 |
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RSC 10-46 |
98-103 |
19 |
उत्तर पहाड़ी क्षेत्र (Northern Hill Zone)
अनुशंसित राज्य: हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए
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सोयाबीन की उन्नत किस्म |
औसत परिपक्वता अवधि (दिन) |
औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
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शालीमार सोयाबीन-3 (SKAU–S-3) |
– |
– |
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NRC 197 |
113 |
16 |
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VLS 99 |
118 |
24 |
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Him Palam Soya-1 (हिमाचल प्रदेश) |
– |
23 |
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Pant Soybean 25 (PS 1556) |
120 |
23 |
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Shalimar Soybean-1 (J&K) |
140-145 |
22 |
दक्षिणी क्षेत्र (Southern Zone)
अनुशंसित राज्य: कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र का दक्षिणी भाग
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सोयाबीन की उन्नत किस्म |
औसत परिपक्वता अवधि (दिन) |
औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
|
ALSB 50 (तेलंगाना) |
99 |
24 |
|
MAUS 725 (महाराष्ट्र) |
92-96 |
24 |
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Phule Durva (KDS 992 Maharashtra*) |
101 |
27 |
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NRCMACS 1667 |
96 |
21 |
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NRC 142 |
96 |
22 |
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MACS 1460 |
89 |
21 |
|
NRC 132 |
99 |
17 |
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DSb 34 |
95 |
27 |
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KDS 753 (फूले किमया) |
96-97 |
25 |
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KBS 23 (कर्नाटक) |
92 |
25 |
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KDS 726 (फुले संगम) |
96-97 |
24 |
सोयाबीन की टॉप उन्नत किस्में: चयन कैसे करें?
खरीफ सीजन में सोयाबीन की बोनी करने से पहले सही किस्म चुनना बेहद जरूरी है। किसान भाई वैरायटी का चुनाव करते समय नीचे दी गई बातों का ध्यान जरूर रखें:
- जलवायु और क्षेत्र के अनुसार चयन: किसान हमेशा अपने संबंधित जलवायु क्षेत्र (Zone) के लिए अनुशंसित और सरकार द्वारा नोटिफाइड न्यूनतम 2 से 3 अलग-अलग समयावधि में पकने वाली किस्मों का ही चयन करें।
- फसल चक्र (Crop Rotation) का ध्यान रखें:
- शीघ्र पकने वाली किस्में: ऐसे किसान जो सोयाबीन कटाई के तुरंत बाद आलू, प्याज, लहसुन जैसी नगदी फसलें लेते हैं और उसके बाद गेहूं या चना लगाते हैं, उन्हें कम समय (शीघ्र अवधि) में पकने वाली सोयाबीन किस्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- मध्यम/अधिक समय वाली किस्में: जो किसान वर्ष में केवल दो ही फसलें (खरीफ में सोयाबीन और रबी में गेहूं/चना) लेते हैं, उन्हें मध्यम से लेकर अधिक समय में परिपक्व होने वाली भारी पैदावार देने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए।
- वैज्ञानिक सलाह: किसान अपने जिले के अनुसार किस्मों का चयन करने के लिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) अथवा अपने ब्लॉक अथवा विकासखंड के कृषि अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।