कम वर्षा की स्थिति में धान की खेती करने वाले किसान अभी करें यह काम

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Save paddy Nursery from Drought

धान की खेती के लिए आवश्यक सुझाव

इस वर्ष देश में अभी तक मानसून अनियमित रहा है, जिसके चलते कई ज़िलों में बहुत अधिक तो कई ज़िलों में बहुत कम वर्षा हुई है। दोनों ही स्थिति में किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कई किसान पहले ही धान की नर्सरी लगा चुके हैं परंतु पर्याप्त वर्षा न होने के कारण किसान उसकी रोपाई अभी तक नहीं कर पाएँ है। जिससे धान की नर्सरी खराब हो रही है। धान की फसल को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग ने विशेष सलाह जारी की है। इन सुझावों को अपनाकर किसान अपनी धान की फसल को नुकसान से बचा सकते हैं। 

धान के बिचड़ा को बचाने के लिए क्या करें किसान ?

  • जिन किसानों के द्वारा बीज स्थली में बीज गिराया जा चुका है, वे जीवन–रक्षक सिंचाई देकर बिचड़ा को बचायें। धान के बीज स्थली की नियमित रूप से सिंचाई करते रहें, उसमें दरार न पड़ने दें।
  • किसान धान के ऐसे बिचड़े जिनकी उम्र अधिक हो गई है उन्हें कम दूरी पर लगाएँ। 45 से 50 दिनों का बिचड़ा का रोपण दुरी को कम करते हुए (10 से.मी. से 10 से.मी. दूरी पर) प्रति हिल 4 से 5 बिचड़े का प्रयोग करते हुए रोपनी करें। बिचड़ा 8 से 9 इंच का रखे तथा शेष शीर्ष भाग को काटकर हल्की गहराई तक रोपनी करे।
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धान की खड़ी फसल वाले खेत की निकौनी करें

खुरपी अथवा छोटे यंत्र का उपयोग कर निकौनी करें। विकल्प के रूप में खरपतवार नियंत्रण हेतु बीसपाईरीबेक सोडियम 250 मी.ली. और पाईरीजोसलफ्यूरान 200 ग्राम का घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। इसके अलावा साइहेलोफाँपब्युटाईल 10 प्रतिशत ई.सी. (750–800 मि.ली. मात्रा) प्रति हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में घोलकर बोआई के 15 से 20 दिनों बाद छिड़काव करें।

वर्षा होने पर कम अवधि के धान की बुआई करें

जिन किसानों के द्वारा अभी तक धान का बिचड़ा नहीं गिराया गया है। उन्हें 115–120 दिनों वाले धान के प्रभेदों यथा सहभागी, सबौर हर्षित, सबौर डीप एवं कम अवधि वाली किस्मों (85–100 दिन) का बिचड़ा वैसे स्थान पर गिराने या डालने की सलाह दी जाती है, जहाँ सिंचाई की व्यवस्था सुलभ हो।

  • धान की सीधी बुआई करें कम एवं मध्यम अवधि के उपलब्ध धान के उन्नतशील किस्मों को सीधी बुआई अथवा ड्रम सीडर के माध्यम से लगाएं।
  • बुआई से पूर्व बीज की प्राइमिंग करें बुआई से पूर्व धान के बीजों की प्राइमिंग (24 घंटे तक पानी में भिगोयें) निश्चित रूप से करें। ऐसा करने से बीज का जमाव शीघ्र होगा।
  • डैपोंग विधि से बिचड़ा लगाएं कम समय में (11-14 दिनों में) धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए डैपोग विधि को अपनाये।

नमी की कमी होने पर खेतों में वैकल्पिक फसलों की खेती करें

नमी की कमी को देखते हुये धान की वैकल्पिक फसलों तिल (कृष्णा), मक्का (सुवान), उरद (पंत यू 31) मेंडूवा, साँवा, कोदो, चीना, बाजरा को लगाये। पोषक अनाज की खेती जुलाई माह के अंत तक कर सकते हैं। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के अभाव में गेहूं की बुआई नहीं की जाती है, उसमें खरीफ, अरहर की किस्मों जैसे – बहार, राजेन्द्र अरहर-1, नरेंद्र अरहर-1, मालवीय-13 किसान लगा सकते हैं |

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पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए डालें यह खाद एवं उर्वरक

  • जिन क्षेत्रों में नाइट्रोजन का अभाव दिख रहा हो वहाँ 2 प्रतिशत (20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी) यूरिया का पर्णीय छिड़काव करें |
  • खैरा रोग यानि जिंक की कमी के लक्ष्ण दिखाई पड़ें तो 5.0 किलोग्राम जिंक सल्फेट, 2.5 किलोग्राम बुझा हुआ चुना के साथ मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से 1300 से 1500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। अथवा चिलेटेड़ जिंक (EDTA zinc) 100 ग्राम प्रति एकड़ 120 से 150 लीटर पानी में रोपनी के 40 से 45 दिनों के बाद छिड़काव करें।
  • फसल में लोहा तत्व की कमी के लक्षण दिखाई दे तो 1 प्रतिशत फेरस सल्फेट और 0.2 प्रतिशत साईट्रिक अम्ल अर्थात 10 ग्राम फेरस सल्फेट और 2 ग्राम साईट्रिक अम्ल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। साईट्रिक अम्ल की जगह नींबू रस का भी उपयोग किया जा सकता है।
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