फसल बीमा दावा कैसे बनता है

0
1599
views

 बीमा दावा कैसे बनता है

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत देश में सर्वाधिक 42 लाख किसानों को मध्यप्रदेश में बीमित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत खरीफ 2016 के बीमित दावों का भुगतान किया गया है। खरीफ 2016 में सीहोर जिले के 43 हजार 850 कृषकों को 55 करोड़ 50 लाख की दावा राशि स्वीकृत हुई है। देखा जाय तो जिले के एक किसान के मान से 12 हजार 657 रुपये बीमा दावे का औसत आता है। लेकिन पटवारी हल्का अनुसार क्षतिस्तर भिन्न-भिन्न होने से कहीं अधिक और कहीं कम बीमा राशि का भुगतान हुआ।

पाँच वर्ष की औसत उत्पादकता और वास्तविक फसल उत्पादकता के अंतर पर बनता है बीमा दावा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पिछले 5 वर्षों की औसत उत्पादकता (जो फसल कटाई प्रयोग से निकाली जाती है) में वास्तविक फसल उत्पादकता के अंतर पर बीमा दावा बनाया जाता है।

उदाहरण के लिये सीहोर जिले की रेहटी तहसील के पटवारी हल्का 44 में वास्तविक उपज तथा थ्रेश होल्ड उपज में फसल कटाई प्रयोगों में कमी मात्र 2 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर रही। इस वजह से बीमा दावा राशि अत्यन्त कम रही। दूसरी ओर जिन पटवारी हल्के में फसल कटाई प्रयोगों में थ्रेश होल्ड तथा वास्तविक फसल कटाई में अधिक अंतर रहा, वहाँ ज्यादा फसल बीमा राशि बनी।

यह भी पढ़ें   आज इन किसानों के बैंक खातों में दी जाएगी कर्ज माफी की राशि

उदाहरण के लिये इसी तहसील के पटवारी हल्का 42 में थ्रेश होल्ड उपज से वास्तविक उपज में अंतर फसल कटाई प्रयोगों में 319 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर रहा। इस कारण से इस पटवारी हल्के के ग्रामों में किसानों को फसल बीमा राशि अधिक मिली।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों के अनुसार पिछले 5 सालों में फसल कटाई प्रयोगों के मान से वास्तविक उपज के अंतर के अनुसार बीमा राशि का भुगतान होता है। कटाई अंतर कम होने पर बीमा राशि कम प्राप्त होती है और वास्तविक उपज का अंतर ज्यादा होता है तो दावा राशि ज्यादा प्राप्त होती है। यह भी कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्षेत्र आधारित है। किसानवार योजना नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here