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शनिवार, अप्रैल 20, 2024
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किसानों के लिए बकरी पालन है एटीएम एवं चलता फिरता फ्रीज: वरिष्ठ वैज्ञानिक यादव

बकरी पालन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

देश में किसानों को खेती-किसानी, पशुपालन एवं मछली पालन आदि में नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए कृषि विद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों पर प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है। जिसमें वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे ही एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भीलवाड़ा जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर किया गया। प्रशिक्षण शिविर में वैज्ञानिकों द्वारा बकरी पालन के विषय में जानकारी प्रदान की गई। 

कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा पर बकरी पालन द्वारा आत्मनिर्भरता विषय पर चार दिवसीय संस्थागत कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में 30 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण में लाभार्थियों को बकरी पालन में लागत, मुनाफ़ा, रोग, आहार, बकरियों की नस्ल आदि के विषय में जानकारी दी गई।

बकरी पालन है किसानों के लिए एटीएम

केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ.सी.एम. यादव ने बताया कि बकरी पालन भूमिहीन, लघु एवं सीमांत किसानों के जीवन निर्वाह का प्रमुख स्त्रोत है। डॉ. यादव ने बकरियों की प्रमुख नस्लें सिरोही, सोजत, गूजरी, करौली, मारवाड़ी, झकराना, परबतसरी एवं झालावाड़ी में आवास एवं आहार प्रबन्धन, प्रमुख रोग एवं निदान, कृमिनाशक, बाह्य परजीवी नियन्त्रण की जानकारी दी और बकरी पालन को किसान के लिए एटीएम एवं चलता फिरता फ्रीज बताया।

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बकरी पालन के इन विषयों पर दी गई जानकारी

प्रोफेसर शस्य विज्ञान डॉ. के. सी. नागर ने बकरी पालन हेतु स्थान का चयन, शेड का निर्माण, बकरियों की संख्या का नियन्त्रण, वर्ष भर हरा चारा उत्पादन, बकरी के दूध की उपयोगिता एवं विपणन के बारे में किसानों को जानकारी दी। वहीं कृषि महाविद्यालय के सहायक आचार्य पशुपालन डॉ. एच. एल. बुगालिया ने बकरियों में होने वाले संक्रामक रोग उनके फैलने के कारण और निदान की जानकारी दी साथ ही कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर बकरी पालन अपनाने के बारे में जानकारी दी।

वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता प्रकाश कुमावत ने बकरी पालन को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बताया जिसको किसान छोटे स्तर से बड़े स्तर तक आसानी से किया जा सकता है, साथ ही बकरियों में होने वाले प्रमुख रोग एवं टीकाकरण के बारे में बताया। इस अवसर पर बकरीपालकों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि कलैण्डर वितरित किए गए।  

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