छत पर खेती करने के लिए 4500 रूपए की किट को मात्र 500 रूपए में : राष्ट्रीय कृषि मेला

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रंग-बिरंगे फल-फूलों और सब्जियों की जीवंत प्रदर्शनी विशेष आकर्षण 

स्टाल में फल-फूलों, सब्जियों के साथ-साथ मसाला फसलों तथा संरक्षित खेती और जैविक खेती की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई है। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर छत्तीसगढ़ में पैदा हो रहे फल-फूलों, छत पर बागवानी तथा फल परिरक्षण केंद्र के विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया है। कृषक उत्पादक संगठन जशपुर के अंतर्गत दुलदुला की एक संस्था ’ग्रीन प्लस आदिवासी सहकारी समिति’ द्वारा काजू का भी विक्रय किया जा रहा है जिसकी मेले में अधिक मांग रही। इसके अलावा प्रसंस्कृत उत्पाद जैम, जेली, सॉस, आचार आदि की भी खूब बिक्री हो रही है। बागवानी करने में रुचि रखने वाले लोगों ने छत पर खेती करने के लिए विभाग के स्टॉल पर उपलब्ध किट के संबंध में खास रुचि दिखाई। स्टाल में 4500 रूपए की किट को मात्र 500 रूपए में उपलब्ध कराया जा रहा है।

 किसानों का पांच दिवसीय महाकुंभ राष्ट्रीय कृषि मेलाशुरू

हजारों किसानों और देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों तथा विशेषज्ञों की उपस्थिति में आज राजधानी रायपुर के पास ग्राम जोरा में ‘राष्ट्रीय कृषि मेला छत्तीसगढ़ 2018’ शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने मेला स्थल के मुख्य मंच पर दीप प्रज्जवलित कर मेले का शुभारंभ किया। कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने समारोह की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि की आसंदी से श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। छत्तीसगढ़ के लाखों परिवार खेती-किसानी और उससे जुड़े काम-धंधों में लगे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के विकास के लिए खेती-किसानी को सुविधाजनक बनाना जरूरी है। श्री अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में अनेक योजनाएं शुरू की है, जिनके उत्साहजनक नतीजे सामने आ रहे हैं। श्री अग्रवाल ने विशेष रूप से किसानों को ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण देने की सरकार की योजना की चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ देश का शायद ऐसा पहला राज्य है जिसने किसानों के लिए इतना बड़ा फैसला लिया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रीय कृषि मेले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से किसानों को खेती-किसानी के क्षेत्र में हो रहे नये अनुसंधानों और प्रयोगों के साथ-साथ नई कृषि तकनीक की जानकारी मिलती है। किसान ऐसे आयोजनों में पहुंचकर खेती-किसानी में नई सोच के साथ नये प्रयोग करने की प्रेरणा लेते हैं। श्री अग्रवाल ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया था। छत्तीसगढ़ के निर्माता और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे एक नई प्रगतिशील सोच के साथ आगे बढ़ाते हुए ‘जय जवान-जय किसान और जय विज्ञान’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हम एक-एक बूंद पानी का सदुपयोग कर अधिक फसल लेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में किसानों के हित में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ को खेती-किसानी के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने किसानों को खेती-किसानी के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाना होगा।
खेती-किसानी का काम जोखिम भरा होता है। नई सोच के साथ नवाचार करने से किसानों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को अब एकीकृत खेती का तरीका अपनाना होगा, जिसमें फल-फूलों की खेती के साथ-पशुपालन, मछलीपालन भी शामिल रहेगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि जैविक खेती आज की जरूरत बन गई है। पानी के एक-एक बूंद का उपयोग कर अधिक से अधिक खेती-करने की नीति अपनानी होगी। इस दिशा में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की तकनीक को आशा के अनुरूप सफलता मिल रही है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि खाद्य मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने बहुत ही रोचक ढंग से फलों के नामों जैसे केला, पपीता, बीही की कविता बनाकर किसानों को आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी कविता में पशुपालन-मछलीपालन का महत्व भी बताया। मुख्य सचिव श्री अजय सिंह ने कहा कि किसानों की मेहनत और लगन से छत्तीसगढ़ अब कृषि के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाने लगा है। राष्ट्रीय कृषि मेले में हर साल किसानों की भागीदारी उत्साह के साथ बढ़ती जा रही है। यह मेले की सफलता की पहचान है। कृषि मेले के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसान भी दूसरे प्रदेशों और दूसरे देशों में हो रहे नये कार्यों की जानकारी प्राप्त कर खेती-किसानी में उपयोग कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में खाद्यान्न उत्पादन, बीज उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन और मछलीपालन के क्षेत्र में सराहनीय प्रगति हुई है। छत्तीसगढ़ के किसान मेहनती हैं और नवाचार को समझते हैं।

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