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सोमवार, अप्रैल 22, 2024
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गर्मियों में किसान इस तरह करें मिर्च की खेती, मिलेगा भरपूर उत्पादन

भारत में सब्जियों से लेकर खाने-पीने के अनेकों पकवानों में तीखापन लाने के लिए मिर्च का उपयोग किया जाता है। खास बात यह है कि भारत पूरे वैश्विक खपत का अकेले 36 फीसदी मिर्ची का उत्पादन करता है। भारत की मिर्च की माँग दुनिया भर में रहती है जिसके चलते किसानों को मिर्च के अच्छे भाव मिल जाते हैं यानि की किसानों के लिए मिर्च की खेती एक मुनाफे का सौदा है। खासकर गर्मियों में अपने ख़ाली खेतों में किसान इसे लगाकर अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं।

भारत में हरी और लाल मिर्च दोनों के लिए की जाती है। इसकी खेती के लिए 15 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है। 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर इसके फूल एवं फल गिरने लगते हैं। मिर्च की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। अच्छे जल निकास वाली एवं कार्बनिक युक्त बलुई-लाल दोमट मृदा जिसका पी.एच. मान 6.0 से 7.5 हो इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है।

मिर्च की खेती के लिए उन्नत किस्में

देश में कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा अधिक उपज देने वाली एवं कीट रोगों के लिए प्रति रोधी किस्में तैयार की गई हैं। किसान अपने क्षेत्र के अनुसार इन किस्मों में से किसी का चयन कर उसकी खेती कर सकते हैं। इन किस्मों में मिर्च की उन्नत प्रजातियाँ जैसे पूसा सदाबहार, पूसा ज्वाला, अर्का लोहित, अर्का सुफल, अर्का श्वेता, अर्का हरिता, मथानिया लौंग, पंत सी-1, पंत सी-2, जी-3, जी-5, हंगरेरियन वैक्स (पीले रंग वाली), जवाहर 218, आर.सी.एच.-1, एल.सी.ए.-206 आदि प्रमुख किस्में शामिल हैं।

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ग्रीष्मकालीन मिर्च की नर्सरी कब एवं कैसे डालें?

गर्मी में मिर्च की खेती के लिए फरवरी-मार्च में पौधशाला में बीजों की बुआई करनी चाहिए। एक हेक्टेयर पौध तैयार करने के लिए संकर प्रजातिओं के लिए 250 ग्राम और अन्य किस्मों के लिये एक से डेढ़ किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। नर्सरी के लिए 1 मीटर चौड़ी, 3 मीटर लंबी और 10 से 15 से.मी. ज़मीन से उठी हुई क्यारियाँ तैयार करनी चाहिए।

किसान बीजों की बुआई से पहले बविस्टीन या कैप्टान की 2 ग्राम/ किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। पौधशाला में कीटों की रोकथाम हेतु 2 ग्राम फोरेट 10 वर्गमीटर की दर से जमीन में मिलाएँ या मिथाइल डिमेटोन 1 मि.ली./लीटर पानी या एसीफ़ेट 1 मि.ली./ लीटर पानी का पौधों पर छिड़काव करें।

मिर्च में कितना खाद डालें

नर्सरी में बुआई के 4-5 सप्ताह बाद पौध रोपण के लिए तैयार हो जाती है। गर्मी की फसल में पंक्ति से पंक्ति व पौधों से पौधों की दूरी 60X 30-45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए । जायद मिर्च रोपाई हेतु प्रति हेक्टेयर 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 से 60 किलोग्राम फास्फोरस एवं 50 से 60 किलोग्राम पोटाश खेत में अंतिम जुताई के समय मिला दें। शेष बची हुई आधी मात्रा 30 व 45 दिनों के बाद टॉप ड्रेसिंग के द्वारा खेत में डालें एवं तुरंत सिंचाई कर दें।

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मिर्च की फसल को संक्रमण रोग व कीटों से बचाने के लिए 400 मि.ली. मैलाथियान 50 ई.सी. को 250 लीटर पानी में मिलाकर 10 से 15 दिनों के अंतराल पर एक एकड़ में खड़ी फसल पर छिड़काव करना चाहिए।

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