किसान आन्दोलन में सभी विपक्षी पार्टियों के एक साथ आने से किसानों को क्या लाभ

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किसानों की सभा में राजनीती पार्टियों को क्यों बुलाया गया ?

कई रंग के झंडों के साथ जब किसान दिल्ली में जमा हुये तो उनकी मांग एक ही थी कर्ज माफ़ी और पूरा दाम | 29 नवम्बर को देश के किसान दिल्ली के रामलीला मैदान में रात गुजारने के बाद 30 नवम्बर की सुबह संसद भवन के लिए चल दिए | किसानों की जो मांग है उसके लिए देश के सभी छोटी बड़ी किसान संगठन एक हुये है | वह सभी संगठन आलग – अलग बिचार के होते हुये भी एक एक मंच बनाकर किसानों की आवाज बुलद किया है लेकिन दोपहर बाद देश के राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय पार्टियाँ का आना शुरू हो गई | सभी पार्टियों के प्रमुख नेता ने किसानों को संबोधित किया | अब बात यह आती है की राजनैतिक नेता किसान के एक मंच पर एक क्यों हुये एकत्रित तथा सभी को किसान के मंच पर जगह क्यों दी गई  | अब हम इसके मूल बातों पर गौर करते है |

क्या लाभ मिल सकता है किसानों को ?

  1. किसानों की मांग है उसका हल संवैधानिक स्तर पर ही हल किया जा सकता है | इसका मतलब यह की किसानों की लड़ाई जमीनी स्तर पर कितनी भी लड़ ली जाए लेकिन उसका समाधान संसद से ही होना है | कर्ज माफ़ देश की केंद्र सरकार ही करेगी | हम यह भी जानते हैं की 23 फसलों का लागत मूल्य केंद्र सरकार ही तय करती है | अगर किसानों को अपनी लागत मूल्य बढ़ाना होगा तो उसे केंद्र सरकार ही पूरा करेगी | किसान संगठनों की मांग है की उसे कानून का रूप दिया जाय तथा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा हो सके | यह सभी काम संसद में ही हो सकता है | पिछले 4 वर्षों में नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किसानों से किये हुये वादे से पलट गई है तथा किसानों के लिए नई निति नहीं लेकर आई है | तो अब संसद में दूसरी ताकत विपक्ष की ही रहती है | लेकिन विपक्ष में किसी भी राजनितिक पार्टी की संख्या नहीं है | इसलिए सभी राजनितिक दल को साथ लाना जरुरी था |
  2. आंदोलन किसान मुक्ति मार्च के नाम से शुरू किया गया था | इस संगठन में देश के 200 किसान संगठन शामिल है |लेकिन इस बात को भी ध्यान रखनी होगी की इसमें बहुत से दल राजनितिक पार्टी से थे | राजनितिक पार्टी रहने के कारण सभी दलों को एक साथ आने के बाबजूद भी एक मत (विचार) एक नहीं है | अगर इसमे किसी भी संगठन के द्वारा अपने नेता को बुलाया जाता तो और दुसरे दल नाराज हो जाते | इसलिए सभी विपक्षी दल को एक मंच पर बुलाना मज़बूरी भी था |
  3. वर्ष 2019 के चुनाव से पहले सिर्फ एक शीतकालीन सत्र बचा हुआ है | इसके बाद चुनाव होगा | यह सत्र कुछ दिनों के बाद शुरू होने वाली है | यह बात सभी किसान जानते हैं की चुनावी वर्ष में अपनी मुद्दे को मन लिया तो अच्छा रहेगा | नहीं तो चुनाव के बाद फिर से नई सरकार किसानों के मुद्दे पर कदा रुख अपना सकती है | किसान नेता चाहते हैं की किसानों के लिए एक अलग से सत्र बुलाया जाए | अब इस बात पर टीका हुआ है की जो विपक्षी दल एक मंच पर आयें है क्या वे संसद में भी यही रुख अपनाएंगे |
  4. अभी कुछ राज्यों में चुनाव चल रहें है | जहां चुनाव चल रहा है वे सभी राज्य किसान पर निर्भर है | राजनितिक पार्टी यह चाहते हैं की सत्ता धारी पार्टी को किसान विरोधी बताया जाए जिससे किसानों के बीच किसानों के मुद्दे को साफ तथा सहज ढंग से रखा जा सके | जिससे चुनाव में फायदा भी मिल सकता है |
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