पशु संजीवनी कार्यक्रम के तहत यह काम अवश्य करवाएं पशुपालक

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पशु संजीवनी कार्यक्रम

देश के अधिकांश किसान अपने पास कुछ न कुछ संख्या में पशु अपने पास रखते ही है ताकि उन्हें दूध की उपलब्धता वर्ष भर बनी रहे | भारतीय नस्ल के पशु दूध कम देते हैं परन्तु उनकी लागत अधिक होती है | सरकार द्वारा पशुपालक किसानों के लिए दूध उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से बहुत सी योजनायें शुरू की गई है जिसके तहत पशुपालकों को बहुत सुविधाएँ दी जाती है | अभी हाल ही में सरकार द्वारा पशुओं का एक डेटाबेस तैयार किया जा रहा ही जो आधार कार्ड की तरह ही है | इस योजना के तहत पशुओं की नस्लों की पहचान कर उनका स्वास्थ कार्ड तैयार किया जायेगा | पशु संजीवनी कार्यक्रम उन्हीं में से एक है इसके तहत यूआईडी पहचान तैयार की जाएगी जिसमें पशुओं की पहचान कर उन्हें टैग लगाया जायेगा जिसके साथ ही पशु स्वास्थ कार्ड (नकुल स्वास्थ पत्र) बनाया जाएगा |

यह योजना कई राज्यों में लागू की जा चुकी है जिसके तहत पशुपालक किसानों को कई सुविधाएँ मिलना भी शुरू हो गई हैं जैसे घर पर ही पशु चिकित्सा का पहुंचना | अभी हाल ही में बिहार सरकार भी इस योजना का लागू की जा रही है | जिससे पशुपालक किसानों को निम्न लाभ होंगे |

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बिहार पशु संजीवनी कार्यक्रम 

राज्य सरकार ने राज्य के सभी पशुओं की पहचान के लिए पशुओं को टैग लगाने एवं निबंधन करवा कर पहचान करवाने का फैसला लिया है | सरकार द्वारा सभी पशुओं का ईयर टैगिंग किया जाना है, यह टैगिंग पूर्णत: नि:शुल्क होगा |

पशुओं के ईयर टैगिंग के फायदे

  • सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पंजीकृत पशुओं को ही प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा किये गये टीकाकरण एवं कृमिनाशक दवाओं से डिवर्मिंग के ब्योरे के साथ नस्ल एवं दुग्ध उत्पादन क्षमता की जानकारी लेना भी टैगिंग से संभव है
  • फसल-बीमा की तरह पशुओं के बीमा की योजना भी लागू होने वाली है, जिसके लिए टैगिंग अनिवार्य
  • पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान कार्य का चरणबद्ध प्रगति ऑनलाइन अपडेट करने एवं नस्ल सुधार को नियंत्रित करने में मददगार एवं पशुओं के वंशावली का रिकर्ड रखने में टैगिंग सहायक होता है
  • टैग लगने से खो गए अथवा चोरी हुए पशुओं का पता करना आसान हो जाएगा |
  • पशुओं का ऑनलाइन क्रय-विक्रय प्रक्रिया, हरियाणा, पंजाब, गुजरात में लागू है जो बिहार में भी संभावित है|
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