सोमवार, फ़रवरी 26, 2024
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पशुपालक किसानों को दूध पर मिलेगा प्रति लीटर 3 रुपए का अनुदान

दूध बेचने पर अनुदान

पशुपालन को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए सरकार द्वारा किसान हित में कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। यहाँ तक कि किसानों को दूध का उचित दाम मिल सके इसके लिए कई राज्य सरकारों के द्वारा प्रति लीटर दूध बेचने पर अनुदान भी दिया जाता है। इस कड़ी में बिहार सरकार ने राज्य में दूध उत्पादन कर रहे पशु पालकों को 3 रुपए प्रति लीटर की दर से अनुदान देने का निर्णय लिया है।

बिहार सरकार ने पशुपालकों को प्रति लीटर दूध पर अनुदान देने के लिए 10 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी है। इससे गर्मी के दिनों में दूध का उत्पादन घटने के बावजूद पशुपालकों को घाटा नहीं होगा। दूध उत्पादन घटने पर होने वाले घाटे की भरपाई सरकार करेगी।

क्या है दूध पर अनुदान देने के लिए योजना

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार ने पशुपालकों को प्रति लीटर 3 रुपए अनुदान देने का निर्णय लिया है। यह अनुदान उन पशुपालकों को दिया जाएगा जिन्होंने दुग्ध सहकारी समिति के जरिये दूध बेचा है। वर्ष 2023 में अप्रैल से जून के बीच दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए विभाग ने लगभग 10 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति दी है। इससे गर्मी के महीनों में दुग्ध समितियों में दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों को अनुदान दिया जाएगा।

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बता दें कि कम्फ़ेड के अधीन विभिन्न दुग्ध संघों, डेयरी इकाइयों द्वारा दुग्ध सहकारी समितियों के ज़रिए दूध संग्रह किया जाता है। योजना के अंतर्गत पशुपालकों को यह अनुदान तीन माह अप्रैल से जून के बीच 91 दिनों के लिए दिया जाएगा। लाभार्थी को यह अनुदान का भुगतान DBT के माध्यम से किया जाएगा।

माह अप्रैल से जून 2023 के दौरान कुल 91 दिनों समितियों में 3.663 लाख किलो दूध की आपूर्ति की गई। लाभार्थी किसानों को इन 91 दिनों में समितियों को दिए गए प्रति लीटर दूध पर 3 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कुल 9 करोड़ 99 लाख 99 हजार रुपए का प्रावधान किया है। राज्य में अभी 8 दुग्ध संघ हैं जिनमें क़रीब 27 हजार दुग्ध समितियाँ जुड़ी हुई हैं।

पशुपालकों को होगा यह फायदा

पशुपालन विभाग के अनुसार गर्मी के महीनों में तापमान बढ़ने तथा हरे चारे की कमी से दुधारू पशुओं को खिलाने में राशन पर आने वाले खर्च में वृद्धि हो जाती है तथा उत्पादन में भी कमी हो जाती है। फलस्वरूप दुग्ध उत्पादकों पर इन दोनों के प्रभाव के कारण उनकी आय में काफी कमी हो जाती है। राज्य के पशुपालकों को गर्मी के महीनों में अनुदान से पशुओं को राशन पर होने वाले खर्च की पूर्ति की जा सकेगी। जिससे पशुपालकों को नुक़सान नहीं होगा और वे पशुपालन के साथ जुड़े रहेंगे एवं पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे जिससे राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ेगा।

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