उड़द की खेती में उर्वरकों का प्रयोग, निंदाई-गुड़ाई एवं कीट, रोग का नियंत्रण किस प्रकार करें ?

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उड़द की खेती में उर्वरकों का प्रयोग, निंदाई-गुड़ाई एवं कीट, रोग का नियंत्रण किस प्रकार करें ?

खाद एवं उर्वरक

उड़द एक दलहनी फसल हैं जिसके कारण नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता नही होती हैं। लेकिन पोधो की प्रारम्भिक अवस्था में जड़ो एवं जड़ ग्रंथियों की वृद्धि एवं विकास के लिए 15- 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40- 45 किलोग्राम फास्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हैक्टेयर देना चहिये।

निराई- गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण

उड़द की बुवाई के 15- 20 दिन की अवस्था में गुड़ाई हाथो द्वारा खुरपी की सहायता से करनी चाहिए। रासायनिक विधि से नियंत्रण हेतु फ्लुक्लोरीन 1 किलोग्राम सक्रीय तत्व प्रति हैक्टेयर की दर से 800- 1000 लीटर पानी में गोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए।

बीज की बुवाई के बाद परंतु बीज के अंकुरण के पूर्व पेन्थिमेथलीन 1.25 किलोग्राम संक्रिय तत्व की दर से 800- 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से खरपतवारो का नियंत्रण किया जा सकता हैं।

उड़द में लगने वाले रोग एवं उनका उपचार किस प्रकार करें ?

पिला मोजेक:-

इस रोग के लक्षण पतियो पर गोलाकार धब्बो के रूप में दिखाई देता हैं। यह दाग एक साथ मिलकर तेजी से फैलते हैं। जो बाद में बिलकुल पिले हो जाते हैं। यह रोग सफ़ेद मक्खी द्वारा फैलता हैं इस रोग के नियंत्रण हेतु डाइमेथोएट 30 ई. सी. की एक लीटर मात्रा 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

पर्ण दाग:-

इस रोग के लक्षण सबसे पहले पत्तियो पर गोलाई लिए भूरे रंग के कोणीय धब्बे के रूप में दिखाए देते हैं, जिसके बीच का भाग राख या हल्का भूरा तथा किनारा बैंगनी रंग का होता हैं। इस रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेडाजिम 500 ग्राम पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

उड़द में लगने वाले कीट एवं उनका नियंत्रण ?

थ्रिप्स:-

इस किट के शिशु एवं वयस्क दोनों पत्तितो से रस चूसकर नुकसान पहुचाते हैं। इस किट के नियंत्रण हेतु डायमेथोएट 30  ई. सी. 1 लीटर दवा 600- 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

हरे फुदके:-

यह कीट पत्ती की निचली सतह पर बड़ी संख्या में पाए जाते है। प्रौढ़  का रंग हरा,इसकी पीठ के निचले भाग में काले धब्बे पाए जाते है। इस किट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोरपिड का 0.3 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए।

फली बेधक:-

इस कीट की सुंडी उड़द की पत्तियों में छेद करके उसमे विकसित हो रहे बीज को खा जाती है। इस किट के नियंत्रण के लिए क्युनोल्फोस 25 ई. सी. की 1.25 लीटर दवा 600- 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

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