हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य के प्रसिद्ध सिरसा किन्नू को स्वतंत्र भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिल गया है। इसके साथ ही सिरसा किन्नू हरियाणा का पहला ऐसा कृषि उत्पाद बन गया है, जिसे स्वतंत्र GI Tag प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिरसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि अब सिरसा किन्नू की पहचान राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और मजबूत होगी।
क्या है GI Tag और क्यों है खास?
GI (Geographical Indication) Tag किसी विशेष क्षेत्र में उत्पादित ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता उस क्षेत्र से जुड़ी होती है। GI Tag मिलने से—
- उत्पाद की अलग पहचान बनती है।
- नकली या दूसरे क्षेत्रों के उत्पादों से सुरक्षा मिलती है।
- बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है।
- निर्यात और ब्रांड वैल्यू मजबूत होती है।
सिरसा किन्नू की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनेगी विशिष्ट पहचान
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हरियाणा का किन्नू ऐसा पहला फल है, जिसे जीआई टैग प्राप्त हुआ है। इस प्रतिष्ठित टैग के मिलने से सिरसा के किन्नू को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र ब्रांड पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने अन्नदाताओं से अपील की कि वे किन्नू के उत्पादन और उच्च गुणवत्ता के स्तर को लगातार बनाए रखें, ताकि वैश्विक बाजार में इसकी मांग और ब्रांड वैल्यू और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक कदम से किसानों की आय में भारी बढ़ोतरी होगी।
इन प्रगतिशील किसानों और विशेषज्ञों को मिला सम्मान
जीआई टैग दिलाने की इस लंबी प्रक्रिया और कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चुनिंदा किसानों एवं अधिकारियों को मुख्यमंत्री द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया:
- निखिल मेहता (बड़ागुढ़ा)
- मनोज कुमार (ऐलनाबाद)
- कृष्ण कुमार (डबवाली)
- एचडीओ सीमा कंबोज
सिरसा किन्नू को GI Tag मिलने से क्या लाभ होगा?
जिला उद्यान अधिकारी दीन मोहम्मद ने जानकारी दी कि इससे पहले बासमती और फुलकारी को संयुक्त रूप से जीआई टैग मिला था, लेकिन सिरसा का किन्नू हरियाणा राज्य का पहला स्वतंत्र जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पाद बन गया है।
- मिश्रित बिक्री से मुक्ति: अब तक स्वतंत्र जीआई टैग न होने के कारण सिरसा का बेहतरीन किन्नू अन्य राज्यों के उत्पादों के साथ मिलकर बिक जाता था, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी प्रीमियम उपज का सही और न्यायसंगत मूल्य नहीं मिल पाता था।
- बेहतर बाजार भाव: स्वतंत्र जीआई पहचान मिलने से अब बिचौलियों का प्रभाव कम होगा और किसानों को उनकी मेहनत का सीधा और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होगा।