हरियाणा के पशुपालकों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश में वर्ष 2026 में अब तक लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। हालांकि विभिन्न जिलों में चिकित्सकीय रूप से संदिग्ध मामले रिपोर्ट होने के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग सतर्क है और गोवंश को बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण किया गया है।
हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि इस वर्ष अब तक 14,61,922 गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इनमें गौशालाओं के 1,14,655 पशु भी शामिल हैं।
हरियाणा में लम्पी रोग का अभी तक कोई पुष्ट मामला नहीं
पशुपालन मंत्री के अनुसार प्रदेश में इस वर्ष अभी तक लम्पी रोग का कोई पुष्ट मामला नहीं मिला है। राज्य के कुरुक्षेत्र, पंचकूला, रेवाड़ी और यमुनानगर जिलों में चिकित्सकीय आधार पर कुल 1,356 संदिग्ध मामले रिपोर्ट किए गए हैं। हालांकि संदिग्ध मामला सामने आना और बीमारी की लैब से पुष्टि होना अलग-अलग स्थिति है। रोग की जांच और पुष्टि के लिए पशुओं के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
99 नमूने जांच के लिए भेजे गए
लम्पी रोग की पुष्टि के लिए भिवानी, हिसार, झज्जर, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, रेवाड़ी, रोहतक और सिरसा जिलों से पशुओं के कुल 99 नैदानिक नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार (LUVAS) भेजा गया है।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक लम्पी रोग के लिए जांच किए गए दो नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस आधार पर राज्य में अभी तक लम्पी रोग का कोई पुष्ट मामला नहीं है।
14.61 लाख से अधिक गोवंश का हुआ टीकाकरण
लम्पी रोग से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने इस वर्ष व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया। अभियान 25 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक निर्धारित किया गया था। इसके तहत राज्य की पात्र गोवंशीय आबादी को गोट पॉक्स वैक्सीन (GPV, उत्तरकाशी स्ट्रेन) से टीका लगाया गया। सरकार के अनुसार अभी तक:
- 14,61,922 गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण किया गया।
- इनमें 1,14,655 पशु गौशालाओं में टीकाकृत किए गए।
- अभियान में 4 माह से अधिक आयु के स्वस्थ गोवंशीय पशुओं को शामिल किया गया।
संदिग्ध पशुओं का किया जा रहा उपचार
पशुपालन विभाग केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है। संदिग्ध लक्षण वाले पशुओं को विभाग की ओर से लक्षणात्मक उपचार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ पशुपालकों और किसानों को बीमारी से बचाव तथा रोकथाम के जरूरी उपायों के बारे में परामर्श दिया जा रहा है।
लम्पी रोग से संबंधित संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों के लिए पशु की स्थिति पर नजर रखना और पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क कर जांच एवं उचित उपचार कराना महत्वपूर्ण है।