देश में मवेशियों को प्रभावित करने वाले लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease-LSD) की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर टीकाकरण, संक्रमित पशुओं को अलग रखने, पशुओं की आवाजाही नियंत्रित करने और बीमारी के मामलों की समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
सरकार के मुताबिक देश में अब तक 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों को लम्पी रोग से बचाव के लिए टीका या दोबारा टीका लगाया जा चुका है। फिलहाल देश में एलएसडी की स्थिति नियंत्रण में बताई गई है और संक्रमण की गंभीरता तथा मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है। हालांकि वर्तमान में 3,461 एक्टिव मामले हैं, इसलिए पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
जुलाई से इन राज्यों में सामने आए लम्पी रोग के मामले
पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार जुलाई 2026 से देश के कुछ राज्यों में एलएसडी के छिटपुट मामले सामने आए हैं। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड सहित कुछ अन्य राज्य शामिल हैं।
ये मामले खासतौर पर छोटे पशुओं और बछड़ों में देखने को मिले हैं। राहत की बात यह है कि बीमारी की गंभीरता काफी कम देखी गई है और प्रभावित पशु सामान्य तौर पर लगभग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो रहे हैं। वर्तमान में देश में 3,461 सक्रिय मामले हैं। ये मामले मुख्य रूप से छोटे और बिना टीकाकरण वाले पशुओं तथा दूसरी बीमारियों से ग्रस्त पशुओं में बताए गए हैं।
36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों का हुआ टीकाकरण
लम्पी रोग को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। अब तक देशभर में 36.18 करोड़ से ज्यादा मवेशियों का एलएसडी से बचाव के लिए टीकाकरण या पुनः टीकाकरण किया जा चुका है। प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टीकाकरण के साथ दूसरे रोग नियंत्रण उपाय भी जारी हैं। वहीं जिन राज्यों में फिलहाल बीमारी का प्रभाव नहीं है, वहां भी एहतियात के तौर पर रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं।
बछियों और युवा पशुओं के टीकाकरण पर विशेष जोर
हाल में हुई समीक्षा के दौरान केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष रूप से बछियों और युवा मवेशियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
इसके साथ ही बीमारी को फैलने से रोकने के लिए कई उपाय अपनाने को कहा गया है, जिनमें रिंग वैक्सीनेशन, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण, बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना, वेक्टर कंट्रोल, साफ-सफाई और कीटाणुशोधन, आवारा पशुओं का प्रबंधन तथा नए लाए गए पशुओं को क्वारंटीन करना शामिल है।
उत्तर प्रदेश भेजी गई थी केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम
जमीनी स्तर पर लम्पी रोग की स्थिति का आकलन करने के लिए अगस्त 2026 में केंद्रीय विशेषज्ञों की एक टीम उत्तर प्रदेश भेजी गई थी। टीम को राज्य में किए जा रहे नियंत्रण उपायों की निगरानी करने और बीमारी से निपटने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी दी गई।
इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 27 अगस्त और 7 सितंबर 2026 को समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गईं। इन बैठकों में बीमारी की मौजूदा स्थिति के साथ टीकाकरण और अन्य रोकथाम उपायों की समीक्षा की गई।
लम्पी स्किन डिजीज क्या है?
लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करती है। यह बीमारी कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है और मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टरों के जरिए फैलती है।
इस बीमारी से प्रभावित पशुओं में बुखार और त्वचा पर गांठें दिखाई दे सकती हैं। सरकार के अनुसार सामान्य तौर पर इस बीमारी में मृत्यु दर कम होती है। भारत में एलएसडी के मामले पहली बार सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे।
लम्पी रोग की जांच व्यवस्था भी की गई मजबूत
देश में एलएसडी की जांच और परीक्षण क्षमता को भी मजबूत किया गया है। इसमें ICAR-NIHSAD भोपाल, क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं (RDDL) और केंद्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (CDDL) के नेटवर्क से तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है। इसके साथ पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे और पशु चिकित्सा कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है।
पशुपालकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
पशुपालकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण कराया जाए। किसी पशु में लम्पी रोग जैसे लक्षण दिखाई देने पर उसे दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाए और उपचार के लिए पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क किया जाए।
नए खरीदे या बाहर से लाए गए पशुओं को सीधे दूसरे पशुओं के साथ रखने के बजाय क्वारंटीन करने और पशुशाला में साफ-सफाई व कीटाणुशोधन पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। बीमारी फैलाने वाले वैक्टरों के नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
फिलहाल नियंत्रण में है देश में लम्पी रोग की स्थिति
पशुपालन और डेयरी विभाग के मुताबिक देश में एलएसडी की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और बीमारी की गंभीरता तथा मृत्यु दर में काफी कमी आई है। इसके बावजूद सक्रिय मामलों को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण और रोग नियंत्रण के दूसरे उपाय जारी रखे गए हैं।
विभाग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार तकनीकी मार्गदर्शन, टीकाकरण सहायता, जांच एवं प्रयोगशाला सहयोग और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है।