पशुपालन और मछली पालन

छत्तीसगढ़ में बढ़ा तिलापिया मछली का उत्पादन; अमेरिका निर्यात शुरू, ₹900 करोड़ के निवेश से बना नया हब

छत्तीसगढ़ में PMMSY के तहत मत्स्य क्षेत्र में करीब 900 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। तिलापिया उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रोसेसिंग और निर्यात बढ़ाने पर सरकार का फोकस है।

Tilapia Fish Farming Cluster Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में तिलापिया मछली पालन को बड़े स्तर पर विकसित करने और इसे निर्यात आधारित कारोबार से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत राज्य में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, चारा और आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों के लिए करीब 900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 20 अगस्त 2026 को रायपुर में अधिसूचित तिलापिया क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान मछली पालकों, उद्यमियों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों से तिलापिया उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई। संवाद में 1,300 से अधिक मछली पालकों और मत्स्य मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों ने भाग लिया।

छत्तीसगढ़ में मछली उत्पादन दोगुना होकर 10 लाख टन पहुंचा

संवाद के दौरान डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि वैश्विक व्यापार में चुनौतियों के बावजूद भारत ने 198 लाख टन का रिकॉर्ड मत्स्य उत्पादन और ₹73,890.46 करोड़ का समुद्री खाद्य (Seafood) निर्यात दर्ज किया है।

  • ₹900 करोड़ का निवेश: छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण बीज, चारा और आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीकों के लिए PMMSY के तहत लगभग ₹900 करोड़ का निवेश किया गया है।
  • उत्पादन में उछाल: इस भारी निवेश के चलते राज्य का कुल मछली उत्पादन लगभग दोगुना होकर 10 लाख टन के स्तर पर पहुँच गया है।
  • अमेरिका को निर्यात: छत्तीसगढ़ ने मीठे पानी की लोकप्रिय तिलापिया मछली का अंतर्राष्ट्रीय निर्यात शुरू कर दिया है, जिसके तहत 382 टन तिलापिया संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) भेजी जा चुकी है।

तिलापिया मछली पालन पर सरकार का खास फोकस

तिलापिया दुनिया में बड़े स्तर पर कारोबार की जाने वाली मीठे पानी की मछलियों में शामिल है। अफ्रीका, यूरोप और एशिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग है। भारत में भी तिलापिया को निर्यात-उन्मुख मत्स्य पालन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ के पास पर्याप्त मीठे जल संसाधन होने के कारण राज्य को बड़े स्तर पर तिलापिया उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

तिलापिया हैचरी को ₹5 करोड़ की वित्तीय सहायता

बैठक के बाद मत्स्य विभाग के सचिव ने रायपुर के माना स्थित एमएम हैचरी का निरीक्षण किया। यह एक समर्पित तिलापिया हैचरी है, जहां गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन के साथ आनुवंशिक रूप से उन्नत काली स्ट्रेन तिलापिया के विकास पर काम किया जा रहा है।

हैचरी में चल रहे Genetic Improvement Program के माध्यम से बीज की गुणवत्ता, उत्पादकता और मत्स्य पालन के प्रदर्शन में सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल के लिए PMMSY के उद्यमिता मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त रोजगार सृजन और लॉजिस्टिक्स सहायता के लिए PM-MKSSY के तहत 35 लाख रुपये का प्रदर्शन अनुदान भी दिया गया है।

एमएम हैचरी देश के विभिन्न हिस्सों में गुणवत्तापूर्ण तिलापिया बीज की आपूर्ति करती है। छत्तीसगढ़ में करीब 25,000 टन तिलापिया उत्पादन को समर्थन देने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता को तिलापिया उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ जैव सुरक्षा और रोगमुक्त मत्स्य पालन पर भी जोर दिया गया है।

भारत ने ₹189.73 करोड़ की तिलापिया मछली की निर्यात

तिलापिया के निर्यात आंकड़े भी इस क्षेत्र में मौजूद कारोबारी संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 22,601 मीट्रिक टन तिलापिया का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 189.73 करोड़ रुपये थी। मात्रा के आधार पर यह देश से निर्यात की गई चिन्हित मीठे पानी की मछलियों में सबसे बड़ा निर्यात बताया गया है।

इसके बावजूद वैश्विक तिलापिया बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी सीमित है। ऐसे में सरकार इसे भविष्य में निर्यात विविधीकरण और आय बढ़ाने के बड़े अवसर के रूप में देख रही है।

देश में विकसित किए जा रहे 34 मत्स्य क्लस्टर

मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. सुरभि राय के अनुसार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए देश में 34 मत्स्य पालन क्लस्टरों को विकास के प्रमुख केंद्रों के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन क्लस्टरों में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • Biofloc Technology
  • RAS (Recirculatory Aquaculture System)
  • IoT आधारित तकनीक
  • आधुनिक उत्पादन प्रणाली
  • प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन
  • बेहतर मार्केट लिंकेज

इसके साथ FIDF, KCC और संस्थागत ऋण तक मछली पालकों की पहुंच बेहतर करने की आवश्यकता भी बताई गई।

तिलापिया क्लस्टर में 9 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश

तिलापिया क्लस्टर में अब तक 9 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसमें ऋण देने वाली संस्थाओं के माध्यम से 4 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सहायता और NFDB उद्यमिता मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन निवेशों का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना, वित्त तक पहुंच आसान करना और तिलापिया की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।

मछली पालकों ने सब्सिडी की मांग उठाई

संवाद के दौरान तिलापिया मछली पालकों ने अपनी कई व्यावहारिक समस्याएं सरकार के सामने रखीं। किसानों ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता, पानी का किराया, बिजली की बढ़ती लागत और उत्पादन से जुड़ी अन्य लागतें मुनाफे को प्रभावित करती हैं। इनपुट लागत कम करने के लिए मछली पालकों ने लक्षित सब्सिडी की मांग की।

इसके अलावा छोटे और जनजातीय मछली पालकों के लिए आधुनिक मत्स्य पालन, निर्यात प्रमाणन, अंतरराष्ट्रीय बाजार मानकों और इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग से संबंधित प्रशिक्षण बढ़ाने की मांग भी सामने आई।

मछली पालकों के लिए बैंक ऋण आसान करने पर जोर

संस्थागत ऋण और Working Capital तक पहुंच भी मछली पालकों की प्रमुख समस्याओं में शामिल रही। किसानों ने बैंक ऋण की जटिल आवेदन प्रक्रिया का मुद्दा उठाया और वित्तपोषण की व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की। हितधारकों ने मछली पालकों को आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जानकारी देने के लिए Exposure Visits, Exchange Programs और International Collaboration बढ़ाने का भी सुझाव दिया।

प्रोसेसिंग के लिए बन सकता है कॉमन फैसिलिटी सेंटर

छोटे मछली पालकों के सामने एक बड़ी चुनौती मछली की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की है। इसी को देखते हुए बैठक में Common Facility Centre (CFC) की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस तरह की सुविधा से छोटे उत्पादक अपनी मछली की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन कर बेहतर बाजार तक पहुंच बना सकते हैं। हितधारकों के अनुसार केवल फार्म-गेट पर मछली बेचने की तुलना में वैल्यू एडेड उत्पाद और निर्यात किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाने में मदद कर सकते हैं।

इन राज्यों में भी तिलापिया पालन की बड़ी संभावना

छत्तीसगढ़ के अलावा केंद्र सरकार ने कई अन्य राज्यों को भी तिलापिया विकास की संभावनाओं वाले राज्यों के रूप में चिह्नित किया है। इनमें झारखंड, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और केरल शामिल हैं। इन राज्यों में मीठे पानी के उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर तिलापिया उत्पादन को बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

मछली पालकों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

सरकार की योजना तिलापिया उत्पादन को केवल मछली पालन तक सीमित न रखकर बीज उत्पादन पालन प्रोसेसिंग वैल्यू एडिशन कोल्ड चेन घरेलू बाजार निर्यात की पूरी श्रृंखला से जोड़ने की है। छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, आधुनिक तकनीक और तिलापिया क्लस्टर के विकास से राज्य के मछली पालकों और मत्स्य उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

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