देश में पशुओं में फैलने वाले कई खतरनाक रोगों पर नियंत्रण में बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के अनुसार खुरपका-मुंहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस और पेस्टे डि पेटिट्स रूमिनैंट्स (PPR) जैसे रोगों के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक टीकाकरण अभियान के कारण पशुओं में रोगों का प्रकोप काफी कम हुआ है।
FMD रोग के मामलों में बड़ी गिरावट
सरकार के आंकड़ों के अनुसार खुरपका-मुंहपका (FMD) रोग के मामलों में बड़ी कमी आई है। वर्ष 2019 में जहाँ 132 प्रकोप दर्ज किए गए थे वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 32 रह गई। सरकार के मुताबिक टीकाकरण के प्रभाव के आकलन में औसत सेरो-कन्वर्जन 70% पाया गया है। इसके अलावा नॉन-स्ट्रक्चरल प्रोटीन (NSP) एंटीबॉडी का प्रसार भी 2021-23 के दौरान 16% से घटकर 7.8% हो गया है।
टीकाकरण अभियान से अन्य पशु रोगों में भी कमी
सरकार के अनुसार अन्य रोगों में भी कमी देखी गई है:
- ब्रुसेलोसिस: 2019 में 22 मामले → 2025 में 6,
- PPR रोग: 2019 में 98 मामले → 2025 में 29
यह गिरावट देश में चल रहे टीकाकरण और निगरानी कार्यक्रमों के प्रभाव को दर्शाती है।
सरकार द्वारा उठाए गए 7 महत्वपूर्ण कदम
अंतिम व्यक्ति (पशुपालक) तक टीकाकरण और निगरानी पहुँचाने के लिए सरकार ने एक व्यापक रणनीति अपनाई है:
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): FMD, ब्रुसेलोसिस और PPR जैसे रोगों के टीकाकरण, सूक्ष्म नियोजन और प्रकोप प्रबंधन के लिए राज्यों को सख्त SOP जारी की गई है।
- डिजिटल ट्रैकिंग (NDLM): पशुओं के पंजीकरण, इयर टैगिंग और टीकाकरण के डेटा को ‘नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन’ (NDLM) पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
- केंद्रीय खरीद: टीकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र स्तर पर ही टीकों की खरीद कर राज्यों को आपूर्ति की जा रही है।
- मजबूत कोल्ड चेन: राज्यों को टीकाकरण के सहायक उपकरणों की खरीद और कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
- नियमित निगरानी: नियमित गुणवत्ता परीक्षण और सेरो-मॉनिटरिंग के माध्यम से टीकाकरण कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित किया गया है।
- वैज्ञानिक सैंपलिंग: ICAR-NIVEDI के परामर्श से तैयार वैज्ञानिक योजना के तहत नमूनों की जांच की जा रही है।
- बुनियादी ढांचे के मानक: पशु चिकित्सा बुनियादी ढांचे के लिए न्यूनतम मानकों के दिशा-निर्देश तैयार कर राज्यों को लागू करने हेतु भेजे गए हैं।
सरकार का लक्ष्य इन कदमों के माध्यम से पशुपालकों की आय को सुरक्षित करना और देश के डेयरी क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप रोग-मुक्त बनाना है।