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पशुओं को चारा उपलब्ध कराने के लिए बनाई जाएँगी चारा बैंक, सरकार ने शुरू की योजना

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को खिलाने हेतु पर्याप्त चारा मिल सके इसके लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद भी कई बार पशुपालकों को समय पर चारा नहीं मिल पाता है या महँगा मिलता है। इस समस्या को दूर करने के लिए पशुओं के चारे पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। एक्सपर्ट की मानें तो देश में चारे की कमी है। चारे की कमी के चलते ही देश में दूध और दूध से बने प्रोडक्ट के दाम बढ़ रहे हैं। चारे के चलते ही देश का कुल उत्पादन नहीं बढ़ पा रहा है।

देश में चारे की कमी की समस्या को दूर करने के लिए 28 फरवरी के दिन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में चारा विकास पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला के साथ ही मंत्रालय की सचिव, श्रीमती अलका उपाध्याय और विभाग (डीएएचडी) के अधिकारी भी उपस्थित हुए।

चारा बैंक किए जाएँगे स्थापित

कार्यक्रम में केंद्रीय पशुपालन मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पशुओं के चारा को अब तक प्राथमिकता प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि देश के पशुधन की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने देश के सभी चारा क्षेत्रों में चारा बैंक स्थापित करने की सरकार की योजना है। इसके लिए सरकार देश में चारा बैंक बनाने की योजना पर काम कर रही है। इतना ही नहीं जरूरत के मुताबिक चारे को स्टोर करने और उसे ट्रांसपोर्ट करने के लिए भी योजना बनाई जा रही है। चारे का बफर स्टॉक भी बनाया जाएगा। चारे से जुड़ी सभी योजनाओं में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण को शामिल किया जाएगा।

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केंद्रीय मंत्री ने पशु प्रजनन से संबंधित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत ज्यादा पशुधन प्रजातियों (जैसे खच्चर, गधा, ऊंट और घोड़े) को शामिल करने पर मंत्रिमंडल के निर्णय पर जानकारी दी। उन्होंने चारा उत्पादन के क्षेत्र और इससे संबंधित योजनाओं को बढ़ावा देने और जानवरों के प्रकार (दुधारू पशुओं, बछिया, सूखा जानवरों आदि) के आधार पर पोषण संबंधी आवश्यकता के अनुरूप चारे की आवश्यकता की पहचान करने के महत्व पर बल दिया और उन्होंने जानवरों की उम्र, चारा प्रथाओं में वैश्विक प्रवृत्ति को बेंचमार्क बनाना, निजी क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाओं का पता लगाना और प्रमुख क्षेत्र के लिए केंद्र बिंदु के रूप में पशुधन बीमा एवं जोखिम प्रबंधन को आसान बनाने पर प्रकाश डाला।

चारे के उत्पादन में की जाएगी वृद्धि

इस अवसर पर मंत्रालय की सचिव अलका उपाध्याय ने पशुओं के लिए चारा और आहार पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय की मांग है कि चारे की खेती में वृद्धि करके चारे की उपलब्धता और उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जाए और नई किस्मों के अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से चारा की खेती और चारा बीज के उत्पादन के लिए सामान्य चारागाह भूमि, निम्नीकृत वन भूमि को शामिल करके जमीनी काम को पहले से ही मौजूदा योजना के दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है।

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चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू की योजना

सचिव ने बताया कि चारे की कमी की समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ‘राष्ट्रीय पशुधन मिशन’ नामक एक योजना की शुरुआत कर रही है जिसका एक उप-मिशन है जिसका नाम ‘चारा और चारा विकास’ है। उप-मिशन के अंतर्गत, दो घटक अर्थात गुणवत्तापूर्ण चारा बीज उत्पादन (गुणवत्ता प्रमाणित चारा बीजों के उत्पादन के लिए) और उद्यमशीलता विकास कार्यक्रम (चारा ब्लॉकों/घास/टीएमआर/साइलेज बनाने वाली इकाइयों के लिए) कार्यान्वित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा सरकार ने नए घटकों अर्थात ‘बीज प्रसंस्करण और ग्रेडिंग उद्यमियों की स्थापना’ और ‘गैर-वन बंजर भूमि/रेंजलैंड/गैर-कृषि योग्य भूमि और अवक्रमित वन भूमि से चारा उत्पादन’ शुरू किया है। सरकार केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ)’ का भी कार्यान्वयन कर रही है जो व्यक्तिगत उद्यमियों, निजी कंपनियों, एमएसएमई, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और इस क्षेत्र की धारा 8 कंपनियों द्वारा निवेश को (3 प्रतिशत ब्याज सहायता के साथ) प्रोत्साहित करती है।

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