किसान आन्दोलन: कटीले तारों, पानी की बौछारें एवं बैरिकेड्स के जरिये किसानों को दिल्ली जाने से रोका जा रहा है

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किसानों का दिल्ली चलो आन्दोलन

देश में कोरोनाकाल के समय केंद्र सरकार के द्वारा तीन कृषि कानून बनाये गए हैं, इन कानूनों को लेकर देश भर में कई स्थानों पर किसानों के द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है | पंजाब एवं हरियाणा राज्य के किसान लगातार इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं | किसान संगठनों द्वारा 26 एवं 27 नवम्बर को इन कानूनों के खिलाफ “दिल्ली चलो” आन्दोलन का आह्वान किया गया था | इसको लेकर किसान विरोध प्रदर्शन के लिए ट्रैक्टरों और पैदल चलकर आ रहे हजारों किसानों को दिल्ली की सीमा पर रोका गया |

दिल्ली चलो आन्दोलन में पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान शामिल हैं | उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और केरल के किसान भी आज और कल (गुरुवार और शुक्रवार) दिल्ली पहुंचकर किसान कानूनों के खिलाफ विरोध मार्च करने वाले हैं | किसानों के 500 संगठन इस विरोध मार्च में शामिल हैं | पंजाब के किसानों ने ट्रैक्टर ट्राली में राशन, आग जलाने के लक़डियां, रजाई-गद्दे, जेनरेटर और डॉक्टरों को साथ लेकर दिल्ली कूच कर दिया है। इन किसानों के साथ डॉक्टर भी है। किसानों का कहना है की वह कई दिनों तक आन्दोलन करने की तैयारी से आये हैं |

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किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने के लिए सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थर, बॉर्डर पर कंटीले तार, किसानों को रोकने के लिए मजबूत बैरिकेटिंग की गई है | किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने के लिए भारी पुलिसबलों की तैनाती की गई है | दिल्ली की तरफ बढ़ रहे किसानों को रोकने के लिए वाटर कैनन के माध्यम से पानी की बौछार के आलावा आंसूगैस के गोले भी छोड़े गए |

किसान नेताओं को किया गया गिरफ्तार

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार पंजाब से 20,000 ट्रैक्टर ट्रॉलियों का काफिला दिल्ली की तरफ निकल चुका है। किसानों को रोकने के लिए पुलिस अलग अलग राज्यों में किसानों को गिरफ्तार कर रही है। हरियाणा में 100 से अधिक किसान प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है एवं अन्य किसान नेताओं के घर छापेमारी की जा रही है। दक्षिण भारत के कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में 500 किसानों को गिरफ्तार किया गया है। किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए मध्य प्रदेश में प्रशासन में ट्रेन रद्द करवा दी है |

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क्या है किसानों की मांग

केंद्र सरकार संसद के पिछले सत्र में खेती से जुड़े तीन कानून लेकर आई थी। ये तीन कानून हैं: कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन-कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020। ये तीनों कानून संसद के दोनों सदनों से पारित हो भी चुके हैं और कानून बन चुके हैं। किसानों की मांग है की इन्हीं तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग पर किसान आंदोलन कर रहे हैं।

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