लिखित अनुबंध पर ही खेती कर सकेंगे बटाईदार

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लिखित अनुबंध पर ही खेती कर सकेंगे बटाईदार

मध्यप्रदेश में भू स्वामी से लिखित अनुबंध पर ही खेती कर सकेंगे बटाईदार किसान इसके लिए मध्य प्रदेश की विधानसभा में पारित किए गए इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब पूरे प्रदेश में कानून के रूप में यह प्रभावशाली हो चुका है। अब तक भूमि स्वामी मौखिक रूप से ही बटाई पर भूमि देते थे और लिखित में देने से हिचकते थे। भूमि हर साल बटाईदारों को बदल भी देते थे ताकि कोई भी बटाईदार भूमि का अधिकार प्राप्त न कर पाए। ऐसे में भूमि स्वामी और बटाईदार दोनों के हितों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ भूमि संसाधन का अधिकतम और लाभप्रद उपयोग हो, इसके लिए भूमि को बटाई पर दिए जाने की व्यवस्था को कानून के तहत कर दिया गया है।

अनुबंध की तीन प्रतियाँ बनबानी होगी

एक सादे कागज पर निर्धारित प्रारूप के अनुसार भूमि स्वामी और बटाईदार के बीच यह अनुबंध लिखित रूप से होगा। इसकी तीन प्रतियां होंगी, इनमें एक-एक भूमि स्वामी और बटाईदार के पास, जबकि तीसरी प्रति तहसीलदार के पास दी जाएगी।

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यह अनुबंध अधिकतक पांच साल के लिए किया जा सकेगा। नहीं कर सकेगा बटाईदार भूमि पर कब्जा कानून में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि अनुबंध के तहत बटाईदार का भूमि स्वामी की भूमि पर कोई अधिकार नहीं रहेगा और भूमि पर किसी भी अधिकार या लाभ के लिए न्यायालय में आवेदन या याचिका प्रस्तुत नहीं कर सकेगा। बटाईदार को उस भूमि पर कृषि कार्य करने का अधिकार होगा।

अनुबंध तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

अनुबंध का पालन न करने पर कानून में जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत तहसीलदार 10,000 रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से जुर्माना वसूल सकेगा। अनुबंध में लाभ प्रतिशत का होगा उल्लेख कानून के तहत अनुबंध में यह भी विवरण दिया जाएगा कि प्राकृतिक आपदा के समय सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि में कितने प्रतिशत दोनों को मिलेगा। अनुबंध की अवधि पूरी होने के बाद भूमि पर भूमि स्वामी का कब्जा हो जाएगा।

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