कुछ घरेलू नुस्खे को अपनाकर कृषि में हजारों रुपये बचा सकते हैं |

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कुछ घरेलु नुस्खे को अपनाकर कृषि में हजारों रूपये बचा सकते हैं |

कुछ नाशी जीव प्रबंधन सूत्र

बहुत से जैविक कृषि कर रहे किसान तथा गैर सरकारी संगठनों ने बड़ी संख्या में अग्रणी सूत्र विकसित किए है जो विभिन्न नाशी जीवों के प्रबंधन हेतु प्रयोग किए जाते हैं | यधपि इन सूत्रों की वैज्ञानिक रूप में वैधता नहीं है, फिर भी उनका किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाना उनकी उपयोगिता का घोतक है | किसान इन सूत्रों को प्रयोग करने का प्रयास कर सकते हैं क्योंकि ये बिना क्रय के उनके खेत पर ही तैयार किये जा सकते हैं | कुछ लोकप्रिय सूत्र निम्न प्रकार सूचीबध्द किए गए है :-

गौ – मूत्र :-

एक लीटर गौ– मूत्र 20 ली. पानी में मिलाकर पर्णीय छिड़काव करने से अनेक रोगाणुओं तथा कीटों के प्रबंधन के साथ – साथ फसल वृद्धि उत्प्रेरक का कार्य भी कर सकता है |

सडा हुआ छाछ पानी :-

मध्य भारत के कुछ भागों में सडा हुआ छाछ पानी, सफ़ेद मक्खी एफिड आदि के प्रबंधन हेतु भी प्रयोग किया जाता है |

दश पर्णी सत:-

20 कि. नीम पत्ती + 2 कि. निर्गुन्डी पत्ते + 2 कि. सर्पगंध पत्ते + 2 कि. गुडुची पत्ते + 2 कि. कस्टड एपिल (शरीफा) पत्ते + 2 कि. करंज पत्ते + 2 कि. एरंड पत्ते + 2 कि. कनेर पत्ते + 2 कि. आक पत्ते + 2 कि. हरी मिर्च लुगदी + 250 ग्राम लहसुन लुगदी + 5 ली. गौमूत्र + 3 कि. गाय गोबर को 200 लीटर पानी में कुचलें और एक माह तक सड़ने दें | दिन में दो बार हिलाते रहें | सत को कुचलने के बाद छ्नें | सत छ: माह हेतु भंडारित किया जा सकता है तथा एक एकड़ क्षेत्र में स्प्रे हेतु पर्याप्त है |

नीम गौमूत्र सत :-

5 कि. नीम पत्ती में कुचलें | इसमें 5 लिटर गौमूत्र तथा 2 कि. गाय का गोबर मिलायें | 24 घंटे तक सड़ने दें | थोड़े – थोड़े अंतराल से हिलायें | सत को निचोड़कर छाने  तथा 100 ली. पानी में पतला करें | एक एकड़ क्षेत्र में पर्णीय छिड़काव हेतु प्रयोग करें | इससे चूसने वाले कीटों तथा मिली बग का नियंत्रण किया जा सकता है |

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मिश्रित पत्तों का सत :-

(1) तीन किलो नीम पत्ती 10 ली. गौमूत्र में कुचलें | (2) दो किलो कस्टर्ड एपिल पत्ते + 2 कि. पपीता पत्ती + 2 कि. आनर पत्ती + 2 कि. अरंडी पत्ती + 2 कि. अमरुद पत्ती को पानी में कुचलें | दोनों मिश्रण को मिलायें | थोड़ी – थोड़ी देर के अन्तराल में (5 बार) तब तक उबालें जब तक की यह घटकर आधा नहीं रह जाये | 24 घंटे रखने के बाद निचोड़कर छाने | यह बोतल में छ: माह तक भंडारित किया जा सकता है | 2 – 2 – 5 ली. सत में 100 ली. पानी मिलाकर यह घोल एक एकड़ हेतु पर्याप्त है | यह रस चूसने वाले तथा व फल छेदक कीटों के नियंत्रण में लाभकारी है |

मिर्च अदरक का सत :-

1 कि. बेशक पत्ती + 500 ग्राम हरी तीखी मिर्च + 500 ग्राम लहसुन + 500 ग्राम नीम पत्ती | सबको 10 ली. गौमूत्र में कुचलें | इसे तब तक उबालें जब तक की यह घटकर आधा न रह जाये | सभी को निचोड़कर छाने | यह एक एकड़ छिडकाव हेतु पर्याप्त है | यह अर्क पत्ती लपेट कीट, तना, फल तथा फली छेदक के नियंत्रण में लाभकारी है |

प्रभावी कीटनाशी सूत्र (1) :-

एक तांबे के पात्र में 3 किलो कुचली हुई ताजी नीम की पत्तियां एवं 1 किलो नीम की निबौली का चूर्ण (पाउडर) 10 लीटर गौ मूत्र में मिलायें | पात्र को अच्छी तरह से बंद करके 10 दिनों तक सड़ने के लिए रख दें | 10 दिनों बाद इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक की यह आधा न रह जाये | 500 ग्राम हरी मिर्च कुचलकर एक लीटर पानी में डालकर रात भर के लिए छोड़ दें | एक दुसरे पात्र में 250 ग्राम लहसुन को पानी में डालकर रात भर के लिए छोड़ दें |अगले दिन उबला हुआ मिश्रण, हरी मिर्च का सत और लहसुन का सत एक साथ मिला दें | अच्छी तरह मिलाकर इसे छन दें | यह व्यापक प्रभावी कीटनाशक बन गया है, इसका उपयोग सभी फसलों में विभिन्न प्रकार के कीटों की रोकथाम के लिए कर सकते हैं | इस कीटनाशक की 250 मि.ली. मात्रा को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

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प्रभावी कीटनाशी सूत्र (2) :-

5 किलो नीम की निंबौली का चूर्ण (पाउडर) 1 किलो करंज के बीजों का चूर्ण,5 किलो बारीक़ कटी बेशरम/ बेहया की पत्तियां एवं 5 किलो नीम की बारीक़ कटी पत्तियां एक 200 लीटर क्षमता वाले ड्रम में डालें |इसमें 10 से 12 लीटर गौमूत्र डालकर ड्रम को 150 लीटर पानी से भर दें | ड्रम को ऊपर से अच्छी तरह बंद करके 8 से 10 दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ दें | 8 दिनों बाद मिश्रण को अच्छी तरह मिला कर आसवित करें | यह आसवित अर्क अच्छी कीटनाशक होने के साथ – साथ एक अच्छी वृद्धि कारक भी है | 150 लीटर मिश्रण से प्राप्त अर्क एक एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त है | इसे समुचित घोल बनाकर छिड़काव करें | कुछ महीनों तक इसे रखे रहने पर भी इसकी उपयोगिता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता |

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