सरसों रबी सीजन की मुख्य तिलहन फसल है, ऐसे में किसान अधिकतम पैदावार प्राप्त कर सकें इसके लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को लगातार सलाह दी जा रही है। मौसम की अनुकूलता के साथ कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग, अजमेर के संयुक्त निदेशक संजय तनेजा ने अधिकारियों को फसलों पर निगरानी रखने और ग्राउंड लेवल पर फील्ड सर्वेक्षण कराने के भी निर्देश दिए हैं।
कृषि अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह ने किसानों को माहू (चेपा) से बचाव के उपाय करने के लिए कहा है। इसके रोकथाम और नियंत्रण के सुझाव दिए हैं। उनके मुताबिक वर्तमान मौसम परिस्थिति में सरसों की फसल में माहू (एफिड) कीट होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसका यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो इस रोग की रोकथाम का कार्य काफी दुष्कर एवं खर्चीला या असंभव हो जाता है। इससे फसल के उत्पाद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है तथा किसानों को कृषि उत्पाद का बाजार भाव भी कम मिलता है।
माहू या चेपा कीट की पहचान
यह कीट छोटे से मध्यम गोल आकार का होता है। इसका रंग पीले हरे या जैतून रंग का होता है और इसमें कर्निकल्स की एक जोड़ी होती है। शरीर हल्के सफेद पाउडर से ढका होता है। इसकी लम्बाई लगभग 1.4 से 2.4 मिलीमीटर होती है। अधिक प्रकोप के कारण पत्तियों का मुड़ना, पीला पड़ना एवं सूखना जैसे लक्षण दिखाई देते है। ये चीनी युक्त चिपचिपा तरल (हनीड्यू) पदार्थ स्त्रावित करता है जो कालिख सांचे के विकास के लिए जिम्मेदार होता है जो पौधे में प्रकाश संश्लेषण दर को कम करता है।
इस तरह करें सरसों में माहू या चेपा कीट का नियंत्रण
किसान सरसों की फसल में माहू (चेपा) अथवा एफिड की रोकथाम के लिए क्रिसोपरला का 50000 प्रति हेक्टर के हिसाब से 10 दिवस के अन्तराल पर दो बार भुरकाव करें। मित्र फफूंद वर्टिसीलीयम लेकानी 5 मिलीलीटर का प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करायें। कीट का प्रकोप होने पर नीम आधारित कीटनाशक एजाडीरेक्टिन 0.03 ईसी का 2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करायें।
कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर विभागीय सिफारिश अनुसार कीटनाशक दवाओं का सुबह या शाम के समय कॉन्टेक्ट एवं सिस्टमिक श्रेणी के रासायनिक कीटनाशी का प्रयोग कृषि विभाग की पैकेज ऑफ प्रैक्टिस के अनुसार कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारियों द्वारा तकनीकी सिफारिशानुसार करें। अधिक जानकारी के लिए किसान स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी या नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क कर परामर्श उपरांत प्रभावी उपाय अपनाकर कीट-व्याधियों की रोकथाम संबंधित कार्य करायें।