पशुओं में तेजी से फैल रही है यह बीमारी, किसान इस तरह करें अपने पशुओं का बचाव

पशुओं में फैल रही है लम्पी स्किन डिजीज LSD

बरसात के मौसम में पशुओं में कई तरह के संक्रामक रोग फैलते हैं, समय रहते इन रोगों का ईलाज करना आवश्यक है अन्यथा पशुओं की मौत भी हो सकती है। अभी देश के कई हिस्सों में पशुओं में एक जानलेवा बीमारी फैलने की जानकारी मिल रही है, जिसका इलाज समय पर किया जाना आवश्यक है। अभी देश के कई राज्यों के मवेशियों में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई दिए हैं, जिसमें राजस्थान सहित तमिलनाडु, ओड़िशा, कर्नाटक, केरल, असम, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्य शामिल है। 

तेज़ी से फैल रही इस बीमारी से बचाव के लिए राजस्थान के पशुपालन मंत्री श्री लालचन्द कटारिया ने सोमवार को पंत कृषि भवन में विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ पश्चिमी राजस्थान में मवेशियों में फैल रही लम्पी स्किन डिजीज की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को बीमारी की रोकथाम एवं उपचार के लिए आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन परिस्थितियों में दवाइयां खरीदने के लिए बजट आंवटित करने के निर्देश दिए हैं।

राजस्थान के इन ज़िलों में फैली है लम्पी स्किन डिजीज

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राजस्थान के पशुपालन मंत्री ने बताया कि कुछ दिनों से जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, पाली, जोधपुर एवं बीकानेर जिलों में यह संक्रामक रोग तेजी से गायों एवं भैंसों में फैल रहा है। उन्होंने बताया कि पशु भी एक राज्य से दूसरे राज्य में आते-जाते रहते हैं, जिससे ये बीमारी एक से दूसरे राज्य में भी फैल रही है। साथ ही इस रोग से संक्रमित पशुओं के अन्य स्वस्थ पशुओं के सम्पर्क में आने पर यह बीमारी फैल रही है।

क्या है लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण

लम्पी स्किन डिजीज LSD या ढेलेदार त्वचा रोग एक वायरल रोग है, जो गाय भैंसों को संक्रमित करती है। इस रोग में शरीर पर गाठें बनने लगती है, ख़ासकर सिर, गर्दन और जाननागों के आसपास। धीरे धीरे ये गाँठें बड़ी होने लगती है एवं घाव बन जाते हैं, पशुओं को तेज बुख़ार आ जाता है और दुधारू पशु दूध देना कम कर देते हैं। इस रोग से मादा पशुओं में गर्भपात भी देखने को मिलता है एवं कई बार तो पशुओं की मौत भी हो जाती है।

किसान इस तरह अपने पशुओं को बचाएँ लम्पी स्किन बीमारी से 

पशुपालन मंत्री ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका नहीं बना है, ऐसे में पशु चिकित्सकों द्वारा लक्षण आधारित उपचार किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों से आग्रह करते हुए कहा कि अन्य स्वस्थ पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए संक्रमित पशु को एकदम अलग बांधें और बुखार एवं गांठ आदि लक्षण दिखायी देने पर तुरन्त पशु चिकित्सक से सम्पर्क कर ईलाज कराएं।

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