छत्तीसगढ़ में किसानों को निर्धारित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने और उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अनियमित बिक्री रोकने के लिए कृषि विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। खरीफ 2026 में अब तक प्रदेशभर में 516 प्रवर्तन कार्रवाई की गई हैं। इसकी तुलना में खरीफ 2025 में केवल 44 कार्रवाई हुई थीं। यानी इस साल 472 अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत प्रदेशभर में निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि किसानों को सही गुणवत्ता का उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।
खरीफ 2026 में खाद विक्रेताओं पर 516 कार्रवाई
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ 2026 के दौरान उर्वरक बिक्री और वितरण से जुड़ी अनियमितताओं पर कुल 516 मामलों में अलग-अलग प्रकार की कार्रवाई की गई है। इस दौरान:
- 13 मामलों में FIR दर्ज की गई।
- 72 मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई की गई।
- 16 उर्वरक विक्रय लाइसेंस निरस्त किए गए।
- 115 मामलों में जब्ती की कार्रवाई हुई।
- 107 लाइसेंस निलंबित किए गए।
- 193 मामलों में उर्वरक बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया।
ये आंकड़े पिछले खरीफ सीजन की तुलना में कार्रवाई में बड़ी बढ़ोतरी दिखाते हैं।
पिछले साल केवल 44 मामलों में हुई थी कार्रवाई
खरीफ 2025 में उर्वरक संबंधी अनियमितताओं पर कुल 44 कार्रवाई हुई थीं। उस दौरान एक भी FIR दर्ज नहीं हुई थी। वहीं 4 मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई, 2 लाइसेंस निरस्त, 2 मामलों में जब्ती, 3 लाइसेंस निलंबित और 33 मामलों में बिक्री प्रतिबंध की कार्रवाई हुई थी। इस प्रकार खरीफ 2025 के 44 मामलों के मुकाबले खरीफ 2026 में कार्रवाई बढ़कर 516 तक पहुंच गई है।
खाद की दुकानों और स्टॉक की हो रही जांच
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ परदेशी के प्रशासनिक नेतृत्व में विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रदेशभर में उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों के नियमित और आकस्मिक निरीक्षण किए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा मुख्य रूप से उर्वरक का स्टॉक, भंडारण व्यवस्था, बिक्री रिकॉर्ड, निर्धारित बिक्री मूल्य, लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अनियमितता मिलने पर संबंधित विक्रेता या प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों पर भी सख्ती
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने को सरकार की प्राथमिकता बताया है। वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों को खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और नियमों के विरुद्ध बिक्री करने वालों के खिलाफ बिना ढिलाई कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीफ सीजन में किसानों के लिए उपलब्ध सब्सिडी वाले उर्वरक का अवैध भंडारण या अनधिकृत बिक्री न हो और खाद वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
किसानों को खाद खरीदते समय इन बातों का रखना होगा ध्यान
कृषि विभाग ने किसानों से भी उर्वरक खरीदते समय सतर्क रहने की अपील की है। किसानों को खाद की निर्धारित कीमत और गुणवत्ता की जांच करने के साथ प्रत्येक खरीद का बिल या रसीद जरूर लेनी चाहिए।
यदि कोई विक्रेता निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगता है, खाद की कालाबाजारी करता है, अवैध रूप से स्टॉक रखता है या बिक्री में किसी अन्य प्रकार की अनियमितता करता है तो किसान इसकी सूचना निकटतम कृषि अधिकारी को दे सकते हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।