ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों और महिलाओं को मुर्गी पालन के जरिए स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पशुधन विकास विभाग द्वारा बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना (Backyard Poultry Farming Scheme) चलाई जा रही है। योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को उन्नत नस्ल के चूजे और मुर्गी दाना कम कीमत पर अथवा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में इसी पहल के तहत चयनित ग्रामीण परिवारों को प्रति कुक्कुट इकाई 45 चूजे और 10 किलोग्राम दाना निःशुल्क वितरित किया गया है। इसका उद्देश्य परिवारों को घर से ही मुर्गी पालन शुरू करने का अवसर देकर अतिरिक्त आमदनी का साधन उपलब्ध कराना है।
बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना क्या है?
बैकयार्ड कुक्कुट पालन ग्रामीण परिवारों के लिए छोटे स्तर पर मुर्गी पालन का ऐसा मॉडल है, जिसे घर के आसपास उपलब्ध सीमित संसाधनों से शुरू किया जा सकता है। पशुधन विकास विभाग की योजना के तहत हितग्राहियों को उन्नत नस्ल के चूजे उपलब्ध कराकर उन्हें कुक्कुट पालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ चूजों के शुरुआती पालन के लिए दाना भी उपलब्ध कराया जाता है। इससे ग्रामीण परिवार मुर्गियों को पालकर आगे अंडे और मुर्गियों की बिक्री के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
सुकमा के कई गांवों में 45-45 चूजे और 10 किलो दाना वितरित
कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. संदीप इंदुरकर के मार्गदर्शन में गादीरास क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में निःशुल्क कुक्कुट इकाइयों का वितरण किया गया।
- लाभान्वित क्षेत्र: ग्राम मनकापाल, नागलगुंडा, सोनाकूकानार, डोडपाल, कोर्रा और गादीरास।
- मिली सहायता: प्रत्येक चयनित हितग्राही को 45-45 उन्नत नस्ल के चूजे और 10 किलोग्राम मुर्गी दाना पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया गया।
- महिला सशक्तिकरण: वितरण कार्यक्रम के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहीं, जिन्हें घर बैठे अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
चूजों के पालन-पोषण का दिया जा रहा है प्रशिक्षण
केवल चूजे वितरित करने तक ही योजना सीमित नहीं है, बल्कि विभाग द्वारा हितग्राहियों को तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाया जा रहा है:
- स्वास्थ्य और टीकाकरण: पशु चिकित्सालय सुकमा (डॉ. टेकेश्वर, भुवाल नेताम) और मोबाइल वेटरनरी यूनिट की टीम द्वारा ग्रामीणों को चूजों के रख-रखाव, उचित दाना-पानी और बीमारियों से बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- स्थायी आजीविका: घर के आंगन/बैकयार्ड में कुक्कुट पालन से ग्रामीण परिवारों को अंडे और मांस के विक्रय से नियमित और स्थायी आय प्राप्त होगी।
‘बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना’ के मुख्य बिंदु
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विशेषता |
विवरण |
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योजना का नाम |
बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना |
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संबंधित विभाग |
पशुधन विकास विभाग, छत्तीसगढ़ |
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मुख्य उद्देश्य |
ग्रामीण परिवारों एवं महिलाओं को स्वरोजगार व अतिरिक्त आय से जोड़ना |
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इकाई सामग्री (प्रति हितग्राही) |
45 उन्नत नस्ल के चूजे + 10 किग्रा दाना (निःशुल्क/अनुदानित) |
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सहायक सेवाएं |
पशु चिकित्सा विभाग द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन |