भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सहायक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला “नीली क्रांति” (Blue Revolution) के जरिए ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया व सशक्त केंद्र बनकर उभरा है।
कम लागत, कम समय में बेहतर मुनाफे और बाजार में बढ़ती मांग के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य और मीठे पानी में झींगा पालन (Shrimp Farming) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के खेती को सिर्फ धान तक सीमित न रखकर उद्यानिकी, दुग्ध और मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक क्षेत्रों से जुड़ने के आह्वान का असर अब सुकमा की जमीन पर साफ दिखने लगा है।
सरकारी योजना के तहत तालाब निर्माण हेतु मिला ऋण और अनुदान
शासन की कल्याणकारी योजनाएं आज ग्रामीण युवाओं और पारंपरिक किसानों के लिए संबल साबित हो रही हैं। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण सुकमा जिले के दुब्बाटोटा निवासी किसान श्री मड़कम देवा हैं, जिन्होंने शासकीय योजनाओं का सही लाभ उठाकर झींगा और मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा मड़कम देवा को तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपये का लोन स्वीकृत किया गया, जिसमें 4.20 लाख रूपये का भारी अनुदान (Subsidy) शामिल था। इसके साथ ही, तालाब में 24 घंटे पानी की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए क्रेड़ा (CREDA) विभाग द्वारा उन्हें सब्सिडी पर सोलर पंप की अनमोल सुविधा भी दी गई, जिसने उनकी राह को बेहद आसान कर दिया।
मछली और झींगा पालन से एक महीने में मिला 5 लाख का बंपर मुनाफा
मड़कम देवा ने न सिर्फ वित्तीय सहायता का लाभ लिया, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विभाग से समय-समय पर आधुनिक मत्स्य पालन का तकनीकी प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इसी वैज्ञानिक पद्धति और कड़ी मेहनत का नतीजा है कि इस वर्ष अकेले जून माह में ही उन्होंने लगभग:
- 2.50 क्विंटल झींगा
- 15 क्विंटल मछली
की बंपर बिक्री की है। इस शानदार उत्पादन से उन्हें करीब 5 लाख रूपये की शुद्ध आय अर्जित हुई है।
उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला सम्मान
झींगा पालन के क्षेत्र में सुकमा का नाम रोशन करने के लिए ‘विश्व पशु चिकित्सा दिवस’ के अवसर पर रायपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के हाथों मड़कम देवा को सम्मानित भी किया जा चुका है। आज आलम यह है कि दूर-दूर से लोग दुब्बाटोटा सिर्फ मछली और झींगा खरीदने के लिए आते हैं।
सुकमा में झींगा पालन की अपार संभावनाएं: कलेक्टर
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि सुकमा जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहाँ मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएँ हैं। मड़कम देवा जैसे प्रगतिशील किसान आज हमारे ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल बन रहे हैं। कलेक्टर ने आगे कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शासन की मंशानुसार अंतिम छोर के व्यक्ति तक इन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। हम सुकमा के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे उन्नत सहायक व्यवसायों से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, ताकि जिला आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छू सके।
कम जमीन में बेहतर आय का विकल्प
सीमित भूमि और कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय आज मत्स्य बीज उत्पादन, चारा निर्माण, परिवहन और मार्केटिंग जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोल रहा है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बाजार में मछली और झींगे की मांग 12 महीने बनी रहती है, जिससे किसानों को निरंतर आय होती है।
इच्छुक किसान कैसे लें मछली पालन योजनाओं का लाभ?
मत्स्य विभाग ने बताया कि जो किसान या ग्रामीण युवा झींगा एवं मछली पालन शुरू करना चाहते हैं, वे अपने निकटतम मत्स्य पालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सरकारी योजनाओं, अनुदान, प्रशिक्षण और ऋण संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है