देश के कुल उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि सिंचाई में उपयोग किया जाता है। हालांकि, शुद्ध बोए गए क्षेत्र के केवल 50 प्रतिशत हिस्से तक ही सिंचाई की स्थायी सुविधा पहुंच पाई है। इसी असंतुलन को दूर करने और भूजल स्तर की गिरावट से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा देशभर में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop – PDMC) योजना चलाई जा रही है।
जुलाई 2026 तक प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से देश की 115 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली) के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो भारत के कुल शुद्ध बुवाई क्षेत्र का लगभग 8.11 प्रतिशत है।
प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत किसानों को मिलने वाली सब्सिडी
PDMC योजना (वर्तमान में PM-RKVY के अंतर्गत संचालित) के तहत खेत स्तर पर वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है:
- छोटे एवं सीमांत किसान (Small & Marginal Farmers): ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर लागत का 55 प्रतिशत तक वित्तीय अनुदान।
- अन्य किसान (General Farmers): कुल लागत पर 45 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।
- भूमि सीमा: एक लाभार्थी किसान को अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि तक के लिए सब्सिडी देय है।
- पुनः सहायता की अवधि: एक ही भूमि पर 7 वर्षों के अंतराल के बाद किसान दोबारा सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।
- जारी बजट: पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा ₹8,123.24 करोड़ की भारी वित्तीय सहायता जारी की गई है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली क्या है?
ड्रिप सिंचाई एक ऐसी तकनीक है जिसमें पतली पाइप या ट्यूब में लगे छोटे-छोटे आउटलेट (उत्सर्जक) के माध्यम से पानी धीरे-धीरे और सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है। इससे पौधों के आसपास केवल आवश्यकता क्षेत्र में ही पानी पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है और जल उपयोग दक्षता बढ़ती है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली दो प्रकार की होती है:-
- ऑन-लाइन ड्रिप (On-line Drip): असमान दूरी पर लगाई जाने वाली फसलों (जैसे फलदार बागवानी) के लिए उपयुक्त।
- इन-लाइन ड्रिप (In-line Drip): निश्चित दूरी वाली फसलों के लिए उपयुक्त, जहां सभी पौधों को समान पानी मिलता है।
स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली क्या है?
- तकनीकी कार्यप्रणाली: इसमें पाइप नेटवर्क से जुड़े नोजल के माध्यम से दबावयुक्त पानी हवा में छिड़का जाता है, जिससे यह प्राकृतिक वर्षा की तरह फसलों को समान रूप से सिंचाई प्रदान करता है।
- उपयुक्तता: यह प्रणाली उच्च पौधे घनत्व (Plant Density) वाली फसलों जैसे अनाज, दालें, बीज, मसाले और अन्य खेत की फसलों के लिए सबसे प्रभावी है।
पोर्टेबल स्प्रिंकलर:
- लचीलापन: मुख्य और सब-मेन पाइपों को आवश्यकतानुसार खेत के विभिन्न हिस्सों में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।
- अनुकूलनशीलता: यह मैदानी और लहरदार (उबड़-खाबड़) दोनों प्रकार के भूभागों के लिए उपयुक्त है।
माइक्रो स्प्रिंकलर (Micro Sprinkler)
- कम त्रिज्या (Radius) और विशेष उपयोग: यह कम दूरी तक पानी छिड़कता है और मुख्य रूप से पत्तेदार सब्जियों, नर्सरी तथा रोपाई (Seedling hardening) के लिए उपयोग होता है।
- सूक्ष्म जलवायु नियंत्रण: सिंचाई के साथ-साथ यह पौधों के आसपास के सूक्ष्म जलवायु (Micro-climate) को अनुकूल बनाने में मदद करता है।
मिनी स्प्रिंकलर (Mini Sprinkler)
- मध्यम कवरेज: माइक्रो स्प्रिंकलर की तुलना में इसकी छिड़काव त्रिज्या बड़ी होती है।
- लक्षित फसलें: मूंगफली, आलू, प्याज, अदरक और छोटी चारे वाली फसलों के लिए अत्यधिक उपयुक्त।
अर्ध-स्थायी स्प्रिंकलर (Semi-Permanent Sprinkler)
- हाइब्रिड मॉडल: इसमें मुख्य और पार्श्व पाइप जमीन के नीचे स्थायी रूप से बिछाए जाते हैं, जबकि राइज़र पाइप से जुड़े नोजल को स्थानांतरित किया जा सकता है।
- प्रभावी प्रबंधन: पानी की आवश्यकता के अनुसार खेत के अलग-अलग हिस्सों में पानी का सही वितरण संभव बनाता है।
रेन-गन / बड़ी मात्रा के स्प्रिंकलर (Rain-Gun / High Volume Sprinkler)
- विशाल कवरेज: केवल 1 या 2 स्प्रिंकलर नोजल से बहुत बड़े क्षेत्र की सिंचाई की जा सकती है।
- उच्च क्षमता: इसका डिस्चार्ज 10,000 से 32,000 लीटर प्रति घंटा तथा छिड़काव त्रिज्या 24 से 36 मीटर तक होती है।
- तकनीकी आवश्यकता: इसे संचालित करने के लिए उच्च दबाव और अधिक डिस्चार्ज वाले पाइप व पंप की आवश्यकता होती है। यह कम समय में बड़े क्षेत्रों को सींचने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
किसानों को पानी के साथ खाद बचाने में भी मदद
सूक्ष्म सिंचाई का फायदा केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं है। PDMC में फर्टिगेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें सिंचाई के पानी के साथ उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाए जाते हैं, जिससे पानी और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। पानी की कमी और गिरते भूजल स्तर वाले क्षेत्रों को योजना में प्राथमिकता दी जाती है। योजना के तहत माइक्रो इरिगेशन को ट्यूबवेल, नदी से पानी उठाने वाली सिंचाई और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के साथ जोड़ने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डिग्गी और जल संचयन को भी बढ़ावा
PDMC योजना में अब स्थानीय स्तर पर जल भंडारण और जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत डिग्गी यानी बड़े जल भंडारण टैंक या खेत तालाब तथा जल संचयन प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनका निर्माण स्थानीय आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत या सामुदायिक उपयोग के लिए किया जा सकता है। इसका उद्देश्य किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के लिए अधिक स्थायी और भरोसेमंद जल उपलब्धता प्रदान करना है।
वर्तमान में PM-RKVY के तहत लागू है योजना
प्रति बूंद अधिक फसल पहल की शुरुआत जनवरी 2006 में केंद्र प्रायोजित सूक्ष्म सिंचाई योजना के रूप में हुई थी। बाद में इसे अलग-अलग कार्यक्रमों के तहत आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2015-16 से 2021-22 तक इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रमुख घटक के रूप में ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ नाम से लागू किया गया। वर्ष 2022-23 से PDMC को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।
PDMC योजना का प्रभाव: नीति आयोग और IIM अहमदाबाद की रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
नीति आयोग और आर्थिक समीक्षा के स्वतंत्र मूल्यांकन अध्ययनों ने PDMC योजना के अभूतपूर्व दूरगामी परिणाम दर्ज किए हैं:
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प्रमुख मानक (Key Metrics) |
दर्ज सुधार / बचत प्रतिशत |
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सिंचाई जल की बचत (Water Savings) |
20% से 48% |
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उर्वरक की बचत (Fertilizer Savings via Fertigation) |
11% से 19% |
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खेती की श्रम लागत में कमी (Labor Cost Reduction) |
30% से 40% |
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फसल उत्पादकता / उपज में वृद्धि (Crop Yield Increase) |
20% से 38% |
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किसान की शुद्ध आय में बढ़ोतरी (Farmer Income Gain) |
10% से 69% |
वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में PDMC के तहत सर्वाधिक क्षेत्रफल कवर किया गया है। इस अवधि में 12.30 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत महिला किसान शामिल हैं।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है PDMC योजना?
देश में उपलब्ध जल संसाधनों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कृषि सिंचाई में इस्तेमाल होता है, जबकि शुद्ध बोए गए क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा ही सिंचाई सुविधा का लाभ ले रहा है। ऐसे में पानी का अधिक कुशल इस्तेमाल कृषि क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकता है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकें पानी को अधिक कुशलता से फसल तक पहुंचाने के साथ किसानों की सिंचाई लागत और अन्य इनपुट खर्च कम करने में मदद कर सकती हैं। योजना का उद्देश्य इसी तकनीक को वित्तीय सहायता के जरिए अधिक किसानों की पहुंच में लाना है।
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सर अपने ब्लॉक या जिले के कृषि विभाग में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जब भी विभाग द्वारा आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे तब जानकारी दी जाएगी.