इन शर्तों के साथ किसान आंदोलन हुआ समाप्त

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किसान आन्दोलन सरकार ने मानी यह बातें

26 नवम्बर 2020 से दिल्ली में कृषि से जुडी विभिन्न मांगों को लेकर किसान आन्दोलन चल रहा था, जो एक वर्ष बाद अब समाप्त हो गया है | देश के कई किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान आन्दोलन चलाया जा रहा था | शुरू में यह किसान आंदोलन केंद्र सरकार के द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों के वापस लेने तथा MSP की गारंटी को लेकर शुरू किया गया था |

बाद में इस आन्दोलन में पराली कानून, बिजली कानून तथा किसानों पर हुए मुकदमे को खत्म करने जैसी मांगों को भी शामिल किया गया था | इसके अलावा आन्दोलन के दौरान बहुत से किसानों कि मौत हो गई थी संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार यह संख्या करीब 702 है, किसान संगठनों के द्वारा उनके परिवार को मुआवजा देने की मांग की जा रही थी |

तीनों कृषि कानून लिए गए वापिस

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के द्वारा पारित तीनों विवादास्पद कानून को वापस लेने का आह्वान कर दिया गया था जिसे इस संसद सत्र में पारित कर दिया गया है | इसके साथ ही तीनों कृषि कानून खत्म हो गया है |

जबकि संयुक्त किसान मोर्चा अन्य मांगों को लेकर आन्दोलन जारी रखा हुआ था लेकिन अब केंद्र सरकार के द्वारा विभिन्न मुद्दों पर संयुक्त किसान मोर्चा को दिये हुए प्रस्ताव पर राजी हो गया है | संयुक्त किसान मोर्चा ने 9 दिसम्बर 2021 को हुई बैठक के बाद यह आह्वान कर दिया गया कि सरकार के द्वारा दिये हुए प्रस्ताव पर सभी किसान संगठन ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा 11 दिसम्बर 2021 को 378 दिनों से चले आ रहे आन्दोलन को समाप्त करने जा रहे है | 11 दिसम्बर 2021 से दिल्ली के अलग–अलग बार्डरों तथा देश के सभी राज्यों में चल रहे किसान आंदोलन को वापस ले लिया गया है |

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किसानों के लिए यह जानना जरुरी है कि संयुक्त किसान मोर्चा तथा केंद्र सरकार के बीच क्या सहमति बनी है | केंद्र सरकार के द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा को भेजे गये प्रस्ताव इस प्रकार है :-

सरकार ने मानी यह मांगे

  • MSP पर माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वयं और बाद में माननीय कृषि मंत्री जी ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है, जिस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक सम्मिलत होंगे | यह स्पष्ट किया जाता है कि किसान प्रतिनिधि में SKM के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे | कमेटी का एक मैनडेट यह होगा कि देश के किसानों को एम.एस.पी. मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए | सरकार वार्ता के दौरान पहले ही आश्वासन दे चुकी है कि देश में MSP पर खरीदी की अभी की स्थिति को जारी रखा जाएगा |
  • जहाँ तक किसानों को आन्दोलन के वक्त के केसों का सवाल है यू.पी., उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार ने इसके लिए पूर्णतया सहमति दी है कि तत्काल प्रभाव से आन्दोलन संबंधित सभी केसों को वापस लिया जाएगा |
  • किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और एजेंसियों तथा दिल्ली सहित सभी संघ शासित क्षेत्र में आंदोलनकारियों और समर्थकों पर बनाए गए आंदलोन संबंधित सभी केस भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने की सहमती है | भारत सरकार अन्य राज्यों से अपील करेगी कि इस किसान आन्दोलन से संबंधित केसों को अन्य राज्य भी वापस लेने की कार्रवाई करें |
  • मुआवजे का जहाँ तक सवाल है, इसके लिए हरियाणा और यू.पी. सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है | उपर्युक्त दोनों विषयों (क्रमांक 2 एवं 3) के संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा की है |
  • बिजली बिल में किसान पर असर डालने वाले प्रावधानों पर पहले सभी स्टेक होल्डर्स / संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा होगी | मोर्चा से चर्चा होने के बाद ही बिल संसद में पेश किया जाएगा |
  • जहाँ तक पराली के मुद्दे का सवाल है, भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा 14 एवं 15 में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसान को मुक्ति दी है |
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संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि 15 जनवरी को फिर से संगठन के सभी सदस्यों कि बैठक होगी जिसमें यह समीक्षा की जाएगी कि केंद्र सरकार के द्वारा दिये गये प्रस्ताव पर क्या काम हुआ है | संयुक्त किसान मोर्चा ने MSP तथा अन्य मुद्दों पर बात करने के लिए 5 सदस्यों कि एक कमिटी बनाई है जो सरकार के साथ वार्ता करेगी |

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