आखिर क्यों प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अलग हो रहे राज्य और बीमा कंपनियां,संसदीय समिति रिपोर्ट ने दिए सुझाव

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर संसदीय समिति की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को शुरू हुए 5 साल हो गये हैं | इस बीच योजना से कई बीमा कंपनियां तथा राज्य सरकारें बाहर होना शुरू हो चुके हैं | केंद्र सरकार के दावे के अनुसार देश भर में कुल कृषि भूमि का 30 प्रतिशत क्षेत्र का फसल बीमा किया गया है | इसके बावजूद भी इस योजना से राज्य और कंपनियों का मोह भंग हो रहा है | वर्ष 2018 से बिहार तथा पश्चिम बंगाल बहार हो गए तो वर्ष 2019 से झारखंड और गुजरात सरकार ने योजना से अलग होने का फैसला किया | वर्तमान समय में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब, गुजरात, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश राज्यों ने अपने आप को योजना से बहार कर लिया है | ज्यादातर राज्य सरकार ने इस योजना के समांतर राज्य प्रायोजित योजना की शुरुआत की है |

 क्या कहती है फसल बीमा योजना की समीक्षा रिपोर्ट 

कृषि विभाग की स्थाई समिति की रिपोर्ट 10 अगस्त 2021 को आई है जिसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का वर्ष 2015–16 से 2020–21 तक की समीक्षा की गई है | स्थाई समिति की रिपोर्ट के अनुसार देश में फसल बीमा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों को घाटा हो रहा है तो वहीँ निजी कंपनियां माला-माल हो रही है |

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पांच वर्षों में इन कंपनियों को प्रीमियम (किसान, राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार) के तौर पर 1,26,521 करोड़ रुपये जमा किया गया है | जबकि फसल नुकसानी होने पर बीमा राशि के रूप में 87,320 करोड़ रुपये का क्लेम दिया गया | यह बीमा राशि कुल प्रीमियम का 69 प्रतिशत है जो किसानों को फसल नुकसानी के रूप में दी गई है | योजना के तहत किसानों की तरफ से 92,954 करोड़ रूपये का दावा किया गया था | इसका मतलब फसल बीमा कंपनियों को 31 प्रतिशत का मुनाफा हुआ है | यहाँ पर यह ध्यान रखना होगा कि इस दौरान किसानों के द्वारा 19,913 करोड़ रूपये का प्रीमियम जमा किया गया है  |

पांच वर्षों में कुल 26.9980 करोड़ किसानों ने फसल बीमा कराया था | यह बीमा 23.5460 करोड़ हेक्टेयर भूमि का किया गया | इन पांच वर्षों में 7.253 करोड़ किसानों को बीमा राशि दी गई है |

सरकारी कंपनियों को फसल बीमा योजना में हो रहा है घाटा

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पांच सरकारी कंपनियां शामिल है जो फसल बीमा के क्षेत्र में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती थी | यह पांच कंपनियां इस प्रकार है :-

  • एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी आँफ इंडिया (एआईसी) लिमिटेड | यह फसल बीमा के क्षेत्र में सबसे बड़ी कंपनी है |
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
  • ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
  • यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
  • न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

इन कंपनियों को इन पांच वर्षों में मात्र 10.86 प्रतिशत का मुनाफा हुआ है, जबकि फसल बीमा के क्षेत्र में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखती है | फसल बीमा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी एआईसी ने चार साल में 32,429.24 करोड़ रूपये का प्रीमियम हासिल किया जबकि 26,874.6 करोड़ रूपये का क्लेम का भुगतान किया है | इसका मतलब एआईसी को लगभग 17.12 प्रतिशत का फायदा हुआ है |

न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को चार साल के दौरान 4660.31 करोड़ रूपये का प्रीमियम मिला जबकि उसने 5145.22 करोड़ रूपये का भुगतान किया | इसी प्रकार ओरियंटल इंश्योरेंस को 3893.16 करोड़ रूपये का प्रीमियम मिला जबकि कंपनी ने क्लेम के रूप में 4305.66 करोड़ रूपये का भुगतान किया | नेशनल इंश्योरेंस ने 2574.34 करोड़ रुपए के प्रीमियम के बदले 2514.77 करोड़ रूपये का भुगतान किया |

निजी कंपनियों को हो रहा है मुनाफा

10 अगस्त 2021 को संसदिय समिति के द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार फसल बीमा क्षेत्र के निजी कंपनियों को काफी मुनाफा हो रहा है | चार सालों में औसतन 30 प्रतिशत का मुनाफा हुआ है तो वहीँ कुछ कंपनियों को 60 से 70 प्रतिशत तक का मुनाफा हुआ है |

रिलायंस जीआईसी लिमिटेड ने चार साल में 6150.22 करोड़ रूपये का प्रीमियम प्राप्त किया | जबकि फसल नुकसानी होने पर किसानों को 2580.56 करोड़ रूपये का भुगतान किया | इस तरह रिलायंस जीआईसी को 59 प्रतिशत का मुनाफा हुआ है | इसी तरह फ्यूचर जनरल इंडिया इंश्योरेंस को 60.91 प्रतिशत, इफ्को को 52 प्रतिशत, एचडीएफसी एर्गो को 31 प्रतिशत का मुनाफा हुआ |

ये कंपनिया फसल बीमा में हुए घाटे के बाद योजना से हुई अलग

ऐसा नहीं है कि सभी कंपनियों को फसल बीमा क्षेत्र से मुनाफा हुआ है | श्रीराम जीआईसी लिमिटेड ने वर्ष 2016–19 के बीच 170.95 करोड़ रूपये का प्रीमियम वसूला जबकि फसल नुकसानी होने पर क्लेम के रूप में 256.95 करोड़ रूपये का भुगतान करना पड़ा | इसके बाद कंपनी फसल बीमा क्षेत्र से बाहर कर लिया |

इसी प्रकार आईसीआईसीआई लुम्बार्ड ने पहले वर्ष में कंपनी को कम मुनाफा होने पर योजना से बाहर हो गई | वर्ष 2016–17 में कंपनी को प्रीमियम के रूप में 2177.93 करोड़ रूपये का प्रीमियम लिया जबकि फसल नुकसानी होने पर क्लेम के रूप में 1927.65 करोड़ रूपये का भुगतान किया | इसी प्रकार टाटा टीआईजी और चोला मंडलम ने भी कम मुनाफा होने पर योजना से वर्ष 2018 –19 में बाहर हो गई |

राज्य में नहीं है कंपनियों के कार्यालय

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल कंपनियों का कार्यायल तक राज्यों में नहीं है | कुछ का दिल्ली तो कुछ का मुम्बई और पुणे में हैं | इस स्थति में किसानों के बीच फसल बीमा को लेकर भ्रम बना रहता है | संसदीय स्थाई समिति ने कहा है की सभी बीमा कंपनियों को राज्य में कार्यालय खोलने को बोला जाये तथा इसकी जानकारी पोर्टल पर भी देना होगा |

कुछ कंपनियों पर लगाया गया है जुर्माना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2018–19 से कंपनी, राज्य तथा केंद्र सरकार पर जुर्माने का प्रावधान किया गया था | दावों के भुगतान के संबंध में निर्धारित अंतिम तारीख से 10 दिन गुजर जाने अर्थात दावों के भुगतान में विलंब होने की स्थिति में बीमा कंपनी द्वारा किसानों को अदा किए जाने के प्रयोजनार्थ, राज्यों बीमा कंपनियों और बैंकों पर प्रति वर्ष 12 प्रतिशत ब्याज दिये जाने का दण्ड / प्रोत्साहन का प्रवधान किया गया है |

इसी प्रकार राज्य सरकारों द्वारा बीमा कंपनियों की ओर से निर्धारित अंतिम तारीख / मांग प्रस्तुत करने की तारीख से 3 माह के बाद जमा नहीं होने पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का, संसदीय स्थाई समिति के रिपोर्ट में बताया गया है कि रबी सीजन 2017–18 के लिए चोला एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी, आईसीआईसीआई लुम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, न्यू इंडियन एंश्योरेंस कंपनी और स्टेट बैंक आँफ इंडिया जनरल इंश्योरेंस पर 12 प्रतिशत की ब्याज दर से लगभग 22 करोड़ 17 लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है  |

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