गेहूं में सिंचाई तथा उर्वरक (खाद) का प्रयोग कब एवं कैसे करें ?

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गेहूं में सिंचाई तथा उर्वरक (खाद)

गेंहू की खेती में दो सबसे महत्वपूर्ण है सिंचाई तथा रोग नियंत्रण | अक्सर किसान को सही जानकारी नहीं रहने के कारण गेंहू की सिंचाई सही समय पर नहीं हो पाता है | गेंहू में उचित समय पर सिंचाई नहीं रहने के कारण उत्पादन पर असर पड़ता है | इसी तरह गेंहू की फसल में उर्वरक का काफी महत्व है | उर्वरक देना ही मत्वपूर्ण नहीं है बल्कि सही समय पर और सही मात्र में उर्वरक देने से पौधों का च्छ विकास होता है तथा उत्पादन अधिक होता है | इन सभी बातों का ध्यान रखते हुये किसान समाधान आप सभी के लिए गेहूं की सिंचाई तथा उर्वरक की मात्र का सही जानकारी लेकर आया है |

सिंचाई :-

किसान भाई आप के क्षेत्र में पानी की समस्या है तो सिंचाए के लिए स्प्रिंकल का प्रयोग करें | इससे समय तथा पानी दोनों की बचत होती है | गेंहू की फसल के लिए 3 से 4 सिंचाई देने की जरुरत है

  1. पहली सिंचाई 30 से 35 दिनों बाद दें |
  2. दूसरी सिंचाई फुल निकालने के बाद दें | यानि 40 से 45 दिनों बाद दें |दूसरी सिंचाई फूल से दना बनने के जरुरी है |
  3. तीसरी सिंचाई गेंहू में पूरी तरह से बाली (कल्ले) निकलने के बाद जिस समय दाना बन रहा है | इस समय पानी देने से दाने बड़े तथा वजनी होते हैं | दूसरी तथा तीसरा पानी बहुत ही जरुरी है |
  4. चौथी सिंचाई तीसरी सिंचाई के 15 दिन बाद करें | अगर पानी की समस्या है तो नहीं भी करेगे तो भी हो जायेगा | लेकिन चौथी सिंचाई करने से उत्पादन बढ़ जाता है |
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एक बात और ध्यान रखना चाहिए की विश्वविध्यालय से विकसित नयी किस्मों में 5 से 6 सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है |

उर्वरक का प्रयोग :-

किसान भाई उर्वरक का प्रयोग मिट्टी पर निर्भर है | इस लिए मिट्टी का परीक्षण जरुर करा ले | यह बिलकुल फ्री है | परिक्षण के आधार पर नत्रजन (नाइट्रोजन), फास्फोरस एवं पोटाश की मात्र का निर्धारण करना चाहिए | गेंहू की खेती के लिए 3 साल के अंतराल पर 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग बुवाई से पहले करना चाहिए |

असिंचित गेंहू में 40 किलोग्राम / हेक्टयर नत्रजन, 20 किलोग्राम / हेक्टयर फास्फोरस का प्रयोग करना चाहिए | वहीँ सिंचित गेंहू में 120 किलोग्राम / हेक्टयर नत्रजन , 60 किलोग्राम / हेक्टयर फास्फोरस. 30 किलोग्राम / हेक्टयर पोटास का प्रयोग करना चाहिए |

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