धान की फसल में अभी क्या करें किसान

धान में अभी लगने वाले कीट-रोग

देश में अभी कई स्थानों पर बारिश का सिलसिला जारी है और कई जगहों पर तेज धूप भी पड़ रही है | बारिश के बाद मौसम में आर्द्रता बढ़ने के कारण खरीफ फसलों खासकर धान के पौधों में कीट-रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है | ऐसे में धान की खेती करने वाले किसानों को फसल की लगातार निगरानी करनी चाहिए | यदि धान में किसी तरह का कीट या रोग दिखाई दे तो उस पर समय पर नियंत्रण किया जा सके | धान की फसल में अभी पीला तना छेदक कीट, माहू, पेनिकल माईट, ब्लास्ट रोग, शीथ ब्लाईट जैसे कीट एवं रोग लग सकते हैं |

धान में यूरिया एवं पोटाश का छिडकाव

फसल के प्रारंभिक गभोट अवस्था में मध्यम एवं देर अवधि वाले धान फसल के 60-75 दिन के होने पर नत्रजन की तीसरी मात्रा का छिड़काव किसान कर सकते हैं | जहाँ किसानों ने जल्दी पकने वाली धान लगाई है वहां यदि 50 प्रतिशत पुष्पन हो चुका है, तो नत्रजन की तीसरी मात्रा का छिड़काव करें, पोटाश की सिफारिश मात्रा का 25 प्रतिशत भाग फूल निकलने की अवस्था पर टॉप ड्रेसिंग करने से धान के दानों की संख्या एवं वजन में वृद्धि होगी।

पीला तना छेदक कीट का नियंत्रण

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अभी के समय में धान की फसल पर पीला तना छेदक कीट के वयस्क दिखाई देने पर तना छेदक के अंडा समूह को एकत्र कर नष्ट कर दे। साथ ही सूखी पत्ती को खींचकर निकाल दे। तनाछेदक की तितली 1 मोथ प्रति वर्ग मीटर में होने पर फिपरोनिल 5 एससी 1 लीटर प्रति दर से छिड़काव करें।

माहू कीट का नियंत्रण

धान की फसल पर कहीं-कहीं माहूं कीट का प्रकोप शुरू हो गया है, धान फसल की सतत निगरानी करें एवं कीटों की संख्या 10-15 प्रति पौधा हो जाने पर शुरूआत में ब्युपरोफेजिन 800 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। 15 दिवस पश्चात् अगर कीट का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे तो डाइनेटोफ्युरान 200 ग्राम या ट्राईफ्लामिजोपारम 500 मिमी प्रति हेक्टेयर की दर से आधोरीय भागों पर छिड़काव करें। सिंथेटिक पाईराथ्राईन वर्ग के कीटनाशक जैसे साइपरमेथिन व डेल्टामेथिरिन दवाओं का उपयोग माहू के प्रकोप को बढ़ा सकता है। अत: इनका उपयोग माहू नियंत्रण में ना करें।

पेनिकल माईट का नियंत्रण

कहीं-कहीं पेनिकल माईट का प्रकोप भी देखने में आया है। जिसकी पहचान पोंचे व बदरंग दाने व तने पर भूरापन देखकर किया जा सकता है। इसके निदान हेतु एबेमेक्टिन 0.5 मिमी प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

ब्राउन प्लांट हॉपर

इस मौसम में धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि कीट का प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

झुलसा रोग

धान की फसल पर झुलसा (ब्लास्ट) रोग के प्रारंभिक अवस्था में निचली पत्ती पर हल्के बैगनी रंग के धब्बे पड़ते है, जो धीरे-धीरे बढ़कर आंख-नॉव के सामान बीच में चौड़े एवं किनारों में सकरे हो जाते है। इन धब्बों के बीच कर रंग हल्के भूरे रंग का होता है। इसके नियंत्रण के टेबूकानालोल 750 मिली प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी घोल बना कर छिड़काव करें।

जीवाणुजनित झुलसा पत्ती का किनारे वाला ऊपरी भाग हल्का पीला सा हो जाता है तथा पूरी पती मटमैले पीले रंग की होकर पत्रक (शीथ) तक सूख जाती है। रोग के लक्षण दिखने पर यदि पानी उपलब्ध हो तो खेत से पानी निकाल कर 3-4 दिन तक खुला रखें तथा 25 किलो पोटाश की प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करे। स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट टेट्रा साइक्लिन संयोजक 300 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड 1.25 किग्रा प्रति हेक्टेयर 500 पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

शीथ ब्लाईट रोग

धान के खेत में पानी की सतह पर ऊपर पौधों के तनों पर यदि मटमैले रंग के बड़े-बड़े धब्बे दिख रहे हो तथा यह धब्बे बैंगनी रंग के किनारे से घिरे हो, जिसे शीथ ब्लाईट नामक रोग कहते है। यह रोग आने पर हेक्साकोनालोल फफूंदनाशक दवा (1 मिली/ली पानी)का छिड़काव रोगग्रस्त भागों पर करें। आवश्यकता पडऩे पर यह छिड़काव 12-15 दिन बाद दोहराया जा सकता है।

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