रबी फसलों में खरपतवार रासायनिक विधि से नियंत्रण

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रबी फसलों में खरपतवार रासायनिक विधि से नियंत्रण

किसान भाई आप जानते हैं की फसलों के दुश्मन दो तरह के होते हैं एक तो कीट,रोग और दूसरा खरपतवार | खरपतवार फसलों के लिए काफी नुकसान दायक होते हैं, जिसके कारण फसलों की उपज दर कम प्राप्त होती है | एसे तो खरपतवार नियंत्रण परम्परिक विधि से होना चाहिए लेकिन समय पर मजदुर नहीं मिलने के कारण या मजदूरी ज्यादा होने के कारण रासायनिक विधि से भी खरपतवार नियंत्रण कर सकते हैं | इसलिए किसान समाधान आप के लिए खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवार नाशक दवाएं
weedicide रासायनिक दवा की जानकारी लेकर आया है | जो अलग – अलग फसल के लिए अलग – अलग हैं |

टमाटर के लिए खरपतवार का नियंत्रण

टमाटर में खरपतवार नियंत्रण के लिए स्टाम्प नामक दवा का उपयोग कर सकते हैं | इस दावा का उपयोग पौधों के बुवाई के 3 दिन बाद करें | इसे 1 लीटर / 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

फूलगोभी के लिए खरपतवार का नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान भाई कोशिश करें की पौधे की बुवाई से पहले करें |

  • फूलगोभी के लिए वैशालीन की 2 किलोग्राम मात्रा को प्रति एक हेक्टयर की दर से मिटटी में मिला दें |
  • क्लूकोरोलिन अथवा नाइट्रलिन की 600 – 1000 किलोग्राम प्रति हेक्टयर की दर से पौधे की बुवाई से पहले मिटटी में मिला दें |
  • पेंडिमेथालिन अथवा आक्सीडायाजोन एक किलोग्राम प्रति हेक्टयर रोपाई से पहले सतही पर छिड़काव करें |
  • ऊपर दिए सभी दवाओं का प्रयोग बुवाई से पहले तथा सभी फसल में करें |
  • रोपाई के बाद खरपतवार का नियंत्रण
  • फूलगोभी की फसल में बुवाई के बाद आलाकोर की एक किलोग्राम की मात्रा प्रति हेक्टयर का छिड़काव खरपतवार नियंत्रण में प्रभावी होता है |
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गेंहू की फसल के लिए खरपतवार नियंत्रण

गेंहू की फसल में भिन्न – भिन्न तरह के खरपतवार होते हैं | कुछ खरपतवार छोटे पत्ते वाले होते हैं तो कुछ खरपतवार बड़े पत्ते वाले होते हैं | इसलिए सभी के लिए दवा भी भिन्न – भिन्न होता है |

  1. चौड़ी तथा सकरी पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण के लिए गेंहूँ की बुवाई से 30 दिन बाद 2 – 4 ग्राम डी का 150 ग्राम सक्रिय तत्व अथवा मैटा सल्फ़यूरोन (एलग्रीप) 8 ग्राम/ एकड़ के हिसाब से 200 – 250 लीटर पानी में घोलकर जब हवा बन्द हो तब फ्लैट नोजल का इस्तेमाल का छिड़काव करें |
  2. पत्तले पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण के लिए पेंडिमेथालिन (स्टाम्प) 400 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति एकड़ की दर से बीजाई के बाद 2 – 3 दिन बाद और आइसोंप्रोटयूरान (टोकान / ग्रेमिसान / एरेलोना) का 300 ग्राम सक्रिय तत्व मेटाजुरोन (डोंजानेक्स / हेक्सागर / हिलनेक्सा) 600 ग्राम सक्रिय तत्व लीडर नामक खरपतवारनाशी की 3 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ बुवाई के 30 -35 दिन बाद 200 – 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |
  3. 30 से 35 दिन बाद आइसोप्रोटयुरान एवं 2- 4 डी दोनों का मिश्रण सस्तुती दर (2 – 4 डी का 150 ग्राम सक्रिय तत्व ) अथवा आइसोप्रोटयुरान का 400 ग्राम सक्रिय तत्व अथवा आइसोनाई – प्लस का 500 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति एकड़ की दर से 200 – 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |
  4. सरसों की फसल के लिए खरपतवार नियंत्रण 

सरसों की फसल में मुख्यत: कृष्णनील, बथुआ, सतगठीया, प्लाजी, आदि देखने को मिलते हैं | कभी – कभी परजीवी खरपतवार ओरबंकि भी सरसों की फसल में पाया जाता है

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उपाय

बुवाई के 20 से 40 दिन बाद निराई – गुडाई करें | जिससे खरपतवार नियंत्रित किया जा सकता है | इसके अलावा रासायनिक विधि से भी खरपतवार नियंत्रित कर सकते हैं इसके लिए पंडीमिथेलिन 300 ग्राम सक्रिय तत्व या वैसालिन 400 ग्रा, सक्रिय तत्व प्रति एकड़ बुआई से पहले 200 – 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें |

देखें बाइक की मदद से यह किसान किस तरह निंदाई-गुराई कर रहें हैं

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