टमाटर की प्रमुख किस्में एवं उनकी खेती कैसे करें ? उससे होने वाली आय

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टमाटर की प्रमुख किस्में एवं उनकी खेती कैसे करें ? उससे होने वाली आय

नीचे टमाटर की कुछ प्रमुख किस्में दी गई हैं जिनकी खेती कर आप आधिक आय कर सकते हैं | इन किस्मों की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, जलवायु एवं खेती सम्बंधित सभी जानकारियां दी गई हैं |

पूसा सदाबहार

इसकी औसत उपज कम से कम 300 क्विंटल पर हैक्टेयर है एवं अधिक से अधिक 450 क्विंटल पर हैक्टेयर तक पा सकते हैं |

इसके गुण इस प्रकार हैं

  • पौधा-इन्डीटरमिनेट(फुल देने बाद पौधों में बढाव नही)
  • पौधा-बौना फल-गोल,छोटा चिकना आकर्षण लिये हुये,
  • ठंडा और गर्म, वातावरण के लिये उपयुक्त
  • बौना,ज्यादा ठंडा एंव गर्म तापक्रम सहन

इसमें 10 से 12 दिनों में सिंचाई की आवश्यकता होती है एवं इसकी फसल 55 दिनों में तैयार हो जाती है |

आय एवं व्यय

इस फसल की एक हेक्टेयर में खेती करने में लगभग 20,000 रुपये तक की लागत आती है एवं इससे 90,000 रुपये तक आमदनी की जा सकती है |

स्वर्ण लालिमा

  • फल गहरे लाल, गोल (120-125 ग्राम) एवं कुल घुलनशील ठोस पदार्थ 4-5%
  • जीवानुज मुरझा रोग प्रतिरोधी  तथा सिमित बढ़वार वाली किस्म
  • पौधशाला में बुआई का समय फरवरी-अप्रैल एवं जुलाई-सितम्बर
  • रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 50 सेंटीमीटर
  • बीज दर 150-200 ग्राम प्रति/हे.
  • रोपाई के 55-60 दिन बाद फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार
  • उपज 600 -700 क्वि./हे.
  • बिहार और झारखण्ड खेती के लिए हेतु अनुमोदित
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स्वर्ण नवीन

  • फल गहरे लाल रंग के अंडाकार (60-70 ग्राम) एवं कुल घुलनशील पदार्थ 5%
  • जीवानुज मुरझा रोग प्रतिरोधी  तथा असिमित बढ़वार वाली किस्म
  • पौधशाला में बुआई का समय अप्रैल-मई एवं जुलाई-सितम्बर
  • रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 50 सेंटीमीटर
  • बीज दर 150-200 ग्राम प्रति/हे.
  • रोपाई के 60-65 दिन बाद फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार
  • उपज 600 -650 क्वि./हे.

स्वर्ण वैभव (संकर)

  • फल गहरे लाल रंग के गोल (140-150 ग्राम) ठोस एवं कुल घुलनशील पदार्थ 5%
  • दूरवर्ती बाजार और प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त, एवं सिमित बढ़वार वाली किस्म
  • पौधशाला में बुआई का समय सितम्बर-अक्टूबर
  • रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 40 सेंटीमीटर
  • बीज दर 125-150 ग्राम प्रति/हे.
  • रोपाई के 55-60 दिन बाद फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार
  • उपज 900 -1000 क्वि./हे.
  • बिहार, झारखण्ड, पंजाब एंव उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित

स्वर्ण समृद्धि (संकर)

  • फल लाल, ठोस (70-80 ग्राम) एवं कुल घुलनशील पदार्थ 5-6%
  • जीवानुज मुरझा और अगेती अंगमारी रोगों के लिए प्रतिरोधी  एवं सिमित बढ़वार वाली किस्म
  • पौधशाला में बुआई का समय अप्रैल-मई एवं अगस्त-सितम्बर
  • रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 40 सेंटीमीटर
  • बीज दर 125-150 ग्राम प्रति/हे.
  • रोपाई के 55-60 दिन बाद फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार
  • उपज 1000 -1050 क्वि./हे.
  • बिहार, झारखण्ड एंव उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित
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स्वर्ण सम्पदा (संकर)

  • फल गोल, लाल, बड़े (120-13 0 ग्राम) एवं कुल घुलनशील पदार्थ 4-5-5.0%
  • जीवानुज मुरझा और अगेती अंगमारी रोगों के लिए प्रतिरोधी  एवं सीमित बढ़वार वाली किस्म
  • पौधशाला में बुआई का समय अगस्त-सितम्बर एवं फरवरी-मई
  • रोपाई की दूरी 60 सेंटीमीटर X 40 सेंटीमीटर
  • बीज दर 125-150 ग्राम प्रति/हे.
  • रोपाई के 55-60 दिन बाद फल प्रथम तुड़ाई के लिए तैयार
  • उपज 1000 -1050 क्वि./हे.
  • बिहार, झारखण्ड, पंजाब एंव उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अनुमोदित

अन्य विकसित किस्में जैसे अरका आभा, पूसा रूबी, पूसा – 120, पूसा शीतल, पूसा गौरव, पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड -2, पूसा हाइब्रिड -4, अविनाश-2, रश्मि तथा निजी क्षेत्र से शक्तिमान, रेड गोल्ड, 501, 2535 उत्सव, अविनाश, चमत्कार, यू.एस. 440 आदि हैं |

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