आप के खेत में कुछ खाली जगह है तो यह करें

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आप के खेत में कुछ खाली जगह है तो यह करें

किसान भाई आप के पास रबी फसल बोने के बाद कुछ जमीन बच गइ है तो आप गाजर की खेती कर सकते है | यह फसल नगदी और कम समय में होने वाली फसल है | तथा इसमे ज्यादा रोग भी नहीं लगता है | अभी गाजर बोने की समय है | किसान समाधान इस फसल के बोने के लिए जानकारी लेकर आया है |

कब बोते हैं  :-

संतरी गाजर के विभिन्न किस्मों को सितम्बर से मार्च महीनों तक उगा सकते हैं |

बीज की मात्रा :-

एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 6 से 8 कि.ग्रा. बीज की आवश्यकता पड़ती है |

बीज तथा पैदावार

पूसा नयनज्योति :- यह सभी क्षेत्रों में उगाया जा सकता है तथा यह 75 से 85 दिनों में तैयार हो जाता है | इसमें बिटामिन भी भरपूर मात्र में होती है | इसकी उत्पादन क्षमता 39.6 टन प्रति हेक्टेयर है |

पूसा यम्दागीनी :- इसकी पैदावार 150 से 200 किवंटल प्रति हेक्टेयर होती हैं |

नैन्टिस :- इस किस्म की जड़ें बेलनाकार नारंगी रंग की होती हैं | जड़ के अन्दर का केन्द्रीय भाग मुलायम एवं मीठा होता है | यह 110 – 112 दिन में तैयार होती है | इसकी पैदावार 100 से 125 किवंटल प्रति हेक्टेयर होती है |

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मिटटी तथा जलवायु :- इसकी पैदावार दोमट मिटटी में अधिक अच्छी होती है | बुआई के समय खेत की मिटटी अच्छी तरह से भुरभुरी होनी चाहिए जिससे जड़ें अच्छी तरह से बन सकें | गाजर ठंडे मौसम की फसल है | गाजर में रंग विकास एवं जड़ों की वृद्धि के लिए 20 – 25 सेल्सियस तापमान अनुकूल होता है |

खेती की तैयारी व खरपतवार नियंत्रण :-

खेत की जुताई के पशचात खेत में आधी मात्र नाइट्रोजन तथा सारा फास्फोरस व पोटाश मिलाकर 45 से.मी. के अंतर पर मेड तैयार करें और 3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से स्टाम्प नामक खरपतवारनाशी का छिड़काव करें और हल्की सिंचाई करें या छिडकाव से पहले पर्याप्त नमी सुनिशिचत करें |

उर्वरक व खादें :-

एक हेक्टेयर खेत में लगभग 10 – 15 टन सही गोबर की खाद अन्तिम जुताई के समय तथा 30 किलोग्राम नाइटोजन तथा 40 किलोग्राम पोटाश और फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के समय डालें | बुआई के 5 – 6 सप्ताह बाद बाकी कि.ग्रा. नाइट्रोजन को टाप ड्रेसिंग के रूप में डालें |

बिजाई की विधि :-

बीजाई 45 से.मी. के अंतराल पर बनी मेड़ों पर 2 – 3 से.मी.गहराई पर करें और पतली मिटटी की परत से ढक दें | अंकुरण के पशचात पौधों की छंटाई कर 8 – 10 से.मी. अंतराल बनाएं |

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सिंचाई व निराई – गुडाई :-

बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए | पहली सिंचाई बीज उगने के बाद करें | शुरू में 8 – 10 दिन के अंतर पर तथा बाद में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें तथा यह स्मरण रखें की नालियों पर आधी मेड़ों तक ही पानी पहुंचें |

फसल सुरक्षा :-

गाजर में कोई विनाशकारी बीमारी व कीड़ों का प्रकोप नहीं होता है |

कीट नियंत्रण :-

चेंपा से बचने के लिए 2 मि.ली. मैलाथियान का 1 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना उचित है |

फसल सुरक्षा :-

गाजर में कोई विनाशकारी बीमारी व कीड़ों का प्रकोप नहीं होता | केवल यह ध्यान रखना है की गाजर की फसल में पानी का जमाव नहीं हो |

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