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गुरूवार, जून 13, 2024
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किसानों को उपज लागत का डेढ़ गुना दाम देनें के पीछे की पूरी सच्चाई

किसानों को उपज लागत का डेढ़ गुना दाम देनें के पीछे की पूरी सच्चाई

सरकार ने लागत का डेढ़ गुना देने की ऐलान तो कर दिया है लेकिन वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया की लागत कैसे जोड़ा जायेगा। इसमें भूमि की कीमत, किसान परिवार की खुद का मजदूरी वह भी कुशल मजदूरी के अनुसार मजदूरी। इसके बाद किसान के द्वारा जो खेत में लागत होता है तथा जोखिम मूल्य भी जोड़ा जाना था। यह सभी बात पर कोई चर्चा नहीं अभी नहीं हुई है।

वित्त मंत्री ने फसलों पर लागत का डेढ़ गुना दाम की घोषणा तो की परन्तु उन्होंने अपनी सहूलियत के हिसाब से कम लागत को चुन लिया है। जब फसलों पर लगने वाली लागत ही कम होगी तो सभी फसलों के दाम खुद ही डेढ़ गुना ज्यादा हो गए। जिनके नहीं हुए हैं, उनके अगले सीजन में हो जाएंगे। घोषणा भले ही दाम को लेकर हुई लेकिन पूरा मसला तो लागत का ही  है।

फसलों के दाम की सिफारिश करने वाली संस्था कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) दो-तीन तरह की लागत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की सिफारिश करती है। इसमें एक है कुल लागत, जिसे C2 कहते हैं। इसमें फसल उत्पादन पर हुए किसान के खर्च (बीज, खाद, पानी, जुताई, मजदूरी इत्यादि) के साथ-साथ कृषक परिवार के श्रम, जमीन की किराये और लागत पूंजी पर ब्याज को भी शामिल किया जाता है। किसान इसी कुल लागत यानी C2 पर ही डेढ़ गुना दाम की मांग करते रहे हैं।

अगर कुल लागत यानी C2 से जमीन का किराया और लागत पूंजी पर ब्याज को हटा दिया जाए तो उत्पादन पर हुआ खर्च और परिवार की मेहनत बचती है। इस लागत को A2+FL कहते हैं।

  • A2 = किसानों के फसल उत्पादन में किए गए सभी तरह के नकदी खर्च 
  • FL= परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत
  • A2+ FL=  फसल उत्पादन का वास्तविक खर्च + कृषक परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत
  • C2 =A2 + FL  लागत + जमीन पर लगने वाले लीज किराया +  कृषि पूंजियों पर लगने वाला ब्याज

वास्तव में अधिकांश फसलों के एमएसपी A2+FL से 50 क्या 100 फीसदी या इससे भी अधिक हैं। आज से नहीं कई बरसों से ऐसा है। इसलिए A2+FL से डेढ़ गुनी कीमत कोई मुद्दा ही नहीं है। असली मुद्दा है कुल लागत यानी C2 का डेढ़ गुना दाम। 

सीएसीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, रबी सीजन 2018-19 में गेहूं की कुल लागत यानी C2 कॉस्ट 1256 रुपये प्रति कुंतल मानी गई है, जबकि A2+FL कॉस्ट 817 रुपये  हैं। अगर सरकार कुल लागत यानी C2 पर डेढ़ गुना दाम तय करती तो गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 1879 रुपये प्रति कुंतल होना चाहिए था। जबकि गेहूं का एमएसपी तय किया है 1735 रुपये प्रति कुंतल। यह दाम A2+FL के मुकाबले तो 112 फीसदी अधिक है, लेकिन C2 से सिर्फ 38 फीसदी ही ज्यादा है।

इस प्रकार जौ की C2 लागत 1190 रुपये और A2+FL लागत 845 रुपये प्रति कुंतल मानी गई है। जबकि इसका एमएसपी 1410 रुपये तय हुआ है जो C2 से 18.48 फीसदी और A2+FL से 67 फीसदी अधिक है। सूरजमुखी का एमएसपी तो A2+FL से भी सिर्फ 28 फीसदी अधिक है और C2 से केवल 3 फीसदी ज्यादा है।

रबी सीजन में डेढ़ गुना दाम देने का दावा कुल लागत C2 पर कतई सही नहीं है और अभी तक इस पर किसी भी तरह का सरकार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है परन्तु वित्त मंत्री का यह कहना की किसानों को उपज का डेढ़ गुना दाम दिया जा रहा है से ऐसा लगता है अथवा इस बात की पुष्टि करता है की वह A2+FL के अनुसार ही डेढ़ गुना ज्यादा देंगे | लेकिन A2+FL पर डेढ़ गुना या इससे ज्यादा दाम तो किसानों को पहले से मिल रहा है परन्तु किसानों की मांग तो C2 लागत पर है |

नीचे दी गई तालिका में रबी फसलों 2018-19 A2+FL एवं  C2 की अनुमानित लागत दी गई है |

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