खरीफ फसल की खरीदी से पहले ही घोटाले की आशंका

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खरीफ फसल पंजीयन में गड़बड़ी

खरीफ फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए सभी राज्यों में पंजीयन चल रहा है | किसान अपनी फसल सुविधापूर्वक बेच सकें इसके लिए पंजीकरण सभी राज्यों में चल रहे हैं | इसके बाद किसानों से फसल खरीद शुरू कर दी जाएगी | किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन करना जरुरी है | यह पंजीयन आनलाईन किया जा रहा है लेकिन राजस्थान में पंजीयन में कुछ गड़बड़ सामने आई है | जिससे किसान को फसल का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पायेगा और दलाल अपना माल किसान के नाम पर बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं |

क्या है  फसल खरीदी पंजीयन में गड़बड़ी मामला ?

राजस्थान के सहकारिता सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने कहा कि 8 जिलों बारां, चुरू, जैसलमेर, नागौर, जोधपुर, उदयपुर, दौसा एवं श्रीगंगानगर के 118 ई-मित्र केन्द्रों द्वारा आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के स्थान पर ओ.टी.पी. के आधार पर 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत पंजीयन किये जाने की सत्यता पर संदेह उत्पन्न करते हैं |

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दरसल सहकारिता सचिव समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन की खरीदी के लिए किये गए पंजीकरण की समिक्षा कर रहे थे | जिसमें पाया कि ज्यादा तर किसानों का पंजीयन आधार कार्ड से न होकर ओ.टी.पी से किया गया है |  इस प्रकार से पंजीयन होना ई-मित्रों को दिये गये निर्देशों की अवहेलना की श्रेणी में आते है। इसके बाद श्री गंगवार ने तत्काल ही 8 जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर निर्देश दिये कि ओ.टी.पी. के आधार पर हुये पंजियनों की एस.डी.एम. व तहसीलदार स्तर के अधिकारी से खरीद शुरू होने से पूर्व जाँच करवाकर राजफैड मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए |

जाँच में यह सुनिश्चित करना है कि ओ.टी.पी. से हुये पंजीयन में किसान अपने अंगूठे के आधार पर पंजीयन करवाने में सक्षम थे अथवा नहीं | जाँच में सही पाये गए किसानों को ही तुलाई की दिनांक आवंटित की जायेगी एवं जो पंजीयन सही नहीं होंगे उन्हें निरस्त किया जाएगा | अगर ई – मित्र के द्वारा नियम विरुद्ध पंजीयन किया गया है तो उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कठोर कार्यवाई अमल में लाने के निर्देश दिया गया है |

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ई – मित्र ऐसा क्यों कर सकते हैं ?

किसानों के द्वारा पंजीयन में भूमि का रकबा देना जरुरी रहता है, इसी के आधार पर यह तय होता है कि किस किसान को कितना अनाज बेचने की अनुमति है | जिस किसान के पास कम भूमि रहता है उसे कम टारगेट मिलता है तथा जिस किसान के पास अधिक भूमि रहती है उसे अधिक टारगेट मिलता है |

इसी के कारण व्यापारी लोग अपने नाम पर या किसी दुसरे के नाम पर अधिक रकबा का पंजीयन कराकर अधिक टारगेट प्राप्त कर लेते हैं | उसके बाद किसान से कम भाव में अनाज खरीद कर न्यूतम समर्थन मूल्य पर बेचकर अधिक मुनाफा कमाते हैं | इसी को रोकने के लिए इस बार पंजीयन में आधार नंबर जरुरी कर दिया गया था |

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