जल्द किसानों के बैंक खातों में सीधे दी जाएगी खाद (उर्वरक) सब्सिडी

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kisano ke bank khato me di jayegi khaad urvarak ki subsidy

खाद (उर्वरक) की कालाबाजारी को रोकने के लिए नई शुरुआत

सरकार ने 70 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खाते में अंतरित करने के लिए नए डीबीटी पोर्टल की शुरुआत की है | केन्‍द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री डी. वी. सदानंद गौड़ा ने नई दिल्‍ली में उर्वरक सब्सिडी के प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण के दूसरे चरण (डीबीटी 2.0) का शुभारंभ किया। पिछले 5 जुलाई को वर्ष 2019 – 20 का केंद्रीय बजट पेश किया गया है इसमें किसानों के लिए उर्वरक पर 10,000 करोड़ रुपया की सब्सिडी बढ़ा दिया गया है | पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने किसानों के लिए उर्वरक पर 70,09035 करोड़ रुपया की सब्सिडी दिया था तो इस वर्ष इसमें 10,000 करोड़ रुपया की वृद्धि कर 79,996 करोड़ रुपया की सब्सिडी दिया गया है |

बजट प्रोफाइल 2019 – 20 दस्तावेज के अनुसार इस आवंटन में से यूरिया सब्सिडी 53,629 करोड़ रूपये की तथा पोषाहार आधारित सब्सिडी 26,367 करोड़ रूपये है | बजट की वित्त निति वक्तव्य में बताया गया है कि मार्च 2018 से मई 2019 में डीबीटी योजना के तहत कुल 610.08 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई है | डीबीटी अर्थात Direct Benefit Transfer डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर जिससे सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में दी जा सके |

क्या है (उर्वरक) खाद डीबीटी डैशबोर्ड

राष्‍ट्रीय, राज्‍य एवं जिला स्‍तरों पर विभिन्‍न उर्वरकों की आवश्‍यकता/आपूर्ति/उपलब्‍धता की स्थिति के बारे में सटीक सूचनाएं प्राप्‍त करने और निर्णय लेने को सुविधाजनक बनाने के लिए उर्वरक विभाग ने अनेक डैशबोर्ड विकसित किए हैं। ये डैशबोर्ड बंदरगाहों, संयंत्रों, राज्‍यों एवं जिला स्‍तरों पर उर्वरकों के स्‍टॉक की अद्यतन स्थिति के बारे में विभिन्‍न रिपोर्ट उपलब्‍ध कराते हैं। इसके अलावा, ये डैशबोर्ड सीजन के लिए समानुपातिक आवश्‍यकता के साथ-साथ विभिन्‍न स्‍तरों पर स्‍टॉक की उपलब्‍धता, शीर्ष 20 खरीदारों, अक्‍सर खरीदारी करने वालों, उर्वरकों की बिक्री न करने वाले खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर), इत्‍यादि के बारे में भी रिपोर्ट उपलब्‍ध कराते हैं। इन रिपोर्टों से प्रत्‍येक राज्‍य/केन्‍द्र शासित प्रदेश में वास्‍तविक समय पर उर्वरकों की उपलब्‍धता और बिक्री की निगरानी करने में आसानी होगी। आम जनता उर्वरक विभाग की ई-उर्वरक वेबसाइट (www.urvarak.nic.in) को क्लिक करके डैशबोर्ड पर अपनी पहुंच सुनिश्चित कर सकती है। 

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पीओएस 3.0 सॉफ्टवेयर  

यह बहु-भाषी सुविधा पंजीकरण के साथ-साथ डीबीटी सॉफ्टवेयर में लॉग-इन और बिक्री से जुड़ी गतिविधि के लिए आधार वर्चुअल आईडी विकल्‍प उपलब्‍ध कराएगी। इसमें मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (एसएचसी) से जुड़े डेटा के आधार पर क्षेत्र विशिष्‍ट एवं फसल विशिष्‍ट सिफारिशें सुलभ कराने की भी सुविधा होगी। इसमें किसानों, मिश्रण तैयार करने वाले निर्माताओं और बुवाई करने वालों के संगठन को होने वाली बिक्री के आंकड़े भी दर्ज होंगे।

डेस्‍कटॉप पीओएस वर्जन :

परिचालन से जुड़ी विभिन्‍न चुनौतियों जैसे कि सीमित संख्‍या में पीओएस वेंडर, भारी मांग वाले (पीक) सीजन के कारण व्‍यापक बिक्री होने इत्‍यादि को ध्‍यान में रखते हुए उर्वरक विभाग ने पीओएस सॉफ्टवेयर का एक बहु-भाषी डेस्‍कटॉप वर्जन विकसित किया है, जो पीओएस उपकरणों (डिवाइस) का एक विकल्‍प अथवा अतिरिक्‍त सुविधा है। लैपटॉप और कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम की सुविधा वाले खुदरा विक्रेता (रिटेलर) उर्वरक बिक्री के लिए ज्‍यादा स्‍पीड वाली ब्रॉडबैंड सेवा का उपयोग कर सकते हैं। डेस्‍कटॉप सॉफ्टवेयर अपेक्षाकृत ज्‍यादा सुदृढ़ एवं सुरक्षित है क्‍योंकि संबंधित एप्‍लीकेशन का संचालन सीधे उर्वरक विभाग की केन्‍द्रीय मुख्‍यालय टीम द्वारा किया जाता है।

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विशेषकर प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण के कार्यान्‍वयन पर करीबी नजर रखने के लिए उर्वरक विभाग में एक परियोजना निगरानी प्रकोष्‍ठ बनाया गया। डीबीटी से जुड़ी मौजूदा गतिविधियों की निगरानी के लिए सभी राज्‍यों में 24 राज्‍य समन्‍वयक नियुक्‍त किए गए हैं।

डीबीटी योजना के कार्यान्‍वयन के लिए प्रत्‍येक रिटेलर की दुकान पर पीओएस डिवाइस लगाना आवश्‍यक है। इसके साथ ही पीओएस डिवाइस के परिचालन अथवा संचालन के लिए संबंधित खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित करना भी जरूरी है। देश भर में प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं (एलएफएस) ने अब तक 8943 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। सभी राज्‍यों में कुल मिलाकर 2.24 लाख पीओएस डिवाइस लगाई गई हैं। जून, 2019 तक पीओएस डिवाइस के जरिए 670.99 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की बिक्री की गई है।

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