भेड एवं बकरी पालन पर सरकार द्वारा दी जानें वाली सहायता 

2
8524

भेड एवं बकरी पालन पर सरकार द्वारा दी जानें वाली सहायता 

भेड़ एवं बकरियों का पालन अत्यधिक गरीब ग्रामीणों द्वारा किया जाता है और ये पशु हमारे समाज को मांस, न और खाद प्रदान करते है, ये पशु विभिन्न प्रकार की कृषि जलवायु स्थितियों के अनुकूल होते है, तथापि उस क्षेत्र के पिछड़े होने के मुख्य कारणों में अत्यन्त निर्धन लोगों को इस क्षेत्र की भूमिका की कम जानकारी, योजनाकारों/ वित्तीय एजेन्सियों के द्वारा ध्यान के अभाव और पशुओं की उत्पादकता सुधारने की दिशा में कम ध्यान दिया जाना शामिल है।

इस पृष्ठभूमि में, भारत सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि 11-वीं पंचवर्षीय योजना की शेष अवधि के दौरान छोटे रोमन्थक भेड एवं बकरी के समन्वित विकास हेतु ष्जोखिम पूॅजी निधिष् के साथ एक योजना शुरु की जाए। इस योजना के दिशा-निर्देशों के पैरा 5-1 में यथा उल्लिखित विभिन्न घटकों के लिए कुल वित्तीय परिव्यय टीएफओ पर आधारित ब्याज मुक्त ऋण आईएफएल प्रदान किया जाएगा।

पात्रता :

व्यक्तिगत कृषक जिन्हें भेड एवं बकरी पालन का समुचित अनुभव हों। महिला, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के पालकों को प्राथमिकता दी जायेगी।

योजना लागत एवं ब्याज मुक्त ऋण :

क्र-सं- उद्येश्य कुल वित्तीय परिव्यय
राशि लाखों में
ब्याज मुक्त ऋण राशि
1. भेड-बकरी पालन (40+2) 1.00 योजना लागत की 50 प्रतिशत राशि – अधिकतम रुपये 50,000/

वित्तीय व्यवस्था:-

योजनान्तर्गत कुल लागत का निम्नानुसार निवेश किया जायेगा :-

1- कृषक अंशदान 10 प्रतिशत
2- ब्याज मुक्त ऋण राशि 50 प्रतिशत
3- बैंक ऋण राशि 40 प्रतिशत

ऋण स्वीकृति : 

बैंक, क्षेत्र के इच्छुक लाभार्थियों के प्रार्थना पत्र योजना प्रति सहित प्राप्त करेगी। योजनान्तर्गत ऋण केवल उन्हीं लाभार्थियों को दिया जाये जो कि पारम्परिक गड़रिया परिवार से हों, उन्हें भेड-बकरी पालन का समुचित अनुभव हों।
बैंक द्वारा चयनित लाभार्थियों की योजना, बैंक स्तर पर स्वीकृत कर योजनान्तर्गत देय ब्याज मुक्त राशि की स्वीकृति हेतु लाभार्थीवार राज्य बैंकको भिजवायी जायेगी। ब्याज मुक्त राशि की नाबार्ड से स्वीकृति प्राप्तहोने के उपरान्त ही ऋण व ब्याजमुक्त राशि का प्रार्थी को वितरण किया जायेगा। बैंक द्वारा ब्याज मुक्त राशि की प्राप्ति के एक माह की अवधि में ऋण वितरण किया जाना आवश्यक है। यदि किन्हीं कारणोंवश बैंक निर्धाराित अवधि में ऋण वितरण नहीं करती है तो ब्याज मुक्त राशि नाबार्ड को वापस करनी होगी। राशि केसाथ-साथ राशि की प्राप्ति दिनांक से राशि भिजवाने की दिनांक तक की अवधि का 10 प्रतिशत की दर सेब्याज भी देना होगा।

यह भी पढ़ें   बकरियों को होने वाले मुख्य रोग, उनकी पहचान एवं उपचार कैसे करें

ऋण पुर्नभुगतान एवं ऋण वसूली :

योजनान्तर्गत देय ऋण की पुर्नभुगतान अवधि 9 वर्ष है जिसमें अनुग्रह अवधि के 2 वर्ष भी सम्मिलित है। प्रार्थी को देय ऋण एवं ब्याज मुक्त राशि की एक साथ वसूली करनी आवश्यक है तथा अर्द्धवार्षिक किश्तों के रुप में ब्याज मुक्त राशि वर्ष में दो बार आनुपातिक आधार पर नाबार्ड को वापस करनी होगी। सुविधा के लिये आप योजनान्तर्गत मासिक वसूली निर्धारित करें तथा जनवरी से जून तक की गई वसूली माह जुलाई में तथा जुलाई से दिसम्बर तक की गई वसूली जनवरी में नाबार्ड को वापस भिजवाने हेतु राज्य बैंक को भिजवायें। बैंक को समुचित ऋण ़ऋण एवं ब्याज मुक्त राशि की वसूली हेतु सुनिश्चित व्यवस्था व प्रयास करने चाहिये।
बैंक को वार्षिक आधार पर योजनान्तर्गत वित्त पोषित इकाईयों का विवरण एनेक्सर- III में आवश्यक रुप से भिजवाना होगा।

ब्याज दर : 

वर्तमान प्रचलित ब्याज दर। समय – समय पर परिवर्तित ब्याज दर देय होगी।

प्रतिभूति : 

कृषक स्वयं के स्वामित्व की कृषि भूमि।

यह भी पढ़ें   पशुओं के प्रमुख संक्रमक रोग एवं उनके लक्षण और उनसे बचाव कैसे करें

ऋण क्षमता, ऋण चुकौती क्षमता का निर्धारण :

प्रार्थी की ऋण क्षमता का निर्धारण, रहन हेतु प्रस्तुत कृषि भूमि के गत तीन वर्षो के सम्बन्धित तहसीलदारन/ सब-रजिस्टार द्वारा प्रदत्त बिक्री दरों के औसत आधार पर संगणित मूल्य की 60 प्रतिशत राशि के आधार पर किया जायेगा।
ऋण चुकौती क्षमता का निर्धारण इकाई से प्राप्त होने वाली शुद्ध आय की 75 प्रतिशत राशि के आधार पर संगणित की जायेगी।

योजना का मूल्यॉकन :

नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा समय≤ पर योजनान्तर्गत वित्त पोषित इकाईयों का निरीक्षण भी किया जायेगा। यहॉ यह भी उल्लेखनीय है किआप अपने स्तर से भी त्रैमासिक आधार पर योजनान्तर्गत वित्त पोषित इकाईयों का निरीक्षण करें एवं निरीक्षण रिपोर्ट राज्य बैंक को भिजवायें ताकि रिपोर्ट नाबार्ड को भिजवायी जा सकेंं।
योजना की प्रगति रिपोर्ट एनेक्सर-प् में प्रत्येक माह की 7 तारीख तक इस बैंक को भिजवाना सुनिश्चित करें।
प्रत्येक योजना प्रस्ताव भिजवाते समय योजना एवं सम्बन्धित लाभार्थी के सम्बन्ध में सूचना एनेक्सर- II में आवश्यक रुप से भिजवायें।

अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु :

बैंक यह सुनिश्चित करें कि :
1- प्रार्थी द्वारा इकाई का आवश्यक रुप से बीमा एवं उसका प्रति वर्ष नवीनीकरण आवश्यक रुप से करवाया जायें।
2- इकाई स्थल पर “Assistted by Department of Animal Husbandry Dairying and Fisheries, Ministry of Agriculture, Government of India through NABARD” लिखा हुआ बोर्ड लगााया जाना आवश्यक होगा।
3- ऋण वितरण से पूर्व एवं पश्चात्‌ इकाई स्थल का निरीक्षण किया जाये ताकि योजना की वास्तविक प्रगति का मूल्यॉकन किया जा सकें।

kisan samadhan android app

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here