अमरबेल (अमर लता ) से फसल एवं पेड़ पोधों से इस प्रकार नष्ट करें

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Amarbel se nuksan

अमरबेल (अमर लता ) से फसल एवं पेड़-पौधों को बचाने की विधि

खेती करते समय फसल के पौधों के साथ खरपतवार उग आते हैं | यह खरपतवार कई तरह की होती है | कुछ खरपतवार पतली पत्ती वाली होती है तो कुछ खरपतवार चौड़ीपत्ती वाली होती है | इसके अलावा एक और तरह की खरपतवार होती है जिसमें किसी भी तरह की पत्ती नहीं होती है तथा अपना भोजन दुसरे पौधों से बनाती है | यह खरपतवार दुसरे पौधों के द्वारा प्राप्त पोषक तत्व को प्राप्त करती है तथा अपने विकास के लिए उस पौधे के शाखाओं पर फैलती है | उनमें से एक  खरपतवार अमरबेल या अमरलता हैं यह  किसी भी फसल या पौधों पर हो जाती है यह इतनी तेजी से फैलती है की 1 माह में पूरी खेत में फैल सकती है |

इस खरपतवार की रोकथाम के लिए किसान के पास पर्याप्त जानकारी नहीं है | इसकी रासायनिक विधि से भी रोक सकते हैं  इसलिए किसान समाधान अमरबेल की रोकथाम की पूरी जानकारी लेकर आया है |

अमरबेल कैसे तथा कितने तरह की फसल में लगती है ?

अमरबेल तना परजीवी पौधा है जो फसलों या वृक्षों पर अवांछित रूप से उगकर हानि पहुँचाता है। इस खरपतवार को रामतिल, सोयाबीन, प्याज, अरहर, तिल, झाड़ियों, शोभाकार पौधों एवं वृक्षों पर भी देखा जा सकता है। अमरबेल परजीवी पौधे में उगने के 25-30 दिन बाद सफेद अथवा हल्के पीले रंग के पुष्प गुच्छे में निकलते हैं। प्रत्येक पुष्प गुच्छ में 15-20 फल तथा प्रत्येक फल में 2-3 बीज बनते है । अमरबेल के बीज अत्यंत छोटे होते है जिनके 1000 बीजों का वजन लगभग 0.70-0.80 ग्राम होता है।

बीजों का रंग भूरा अथवा हल्का पीला (बरसीम एवं लहसुन के बीजों की जैसा) होता है। अमर बेल के एक पौधे से लगभग 50,000 से 1,00,000 तक बीज पैदा होते है। पकने के बाद बीज मिट्टी में गिरकर काफी सालों तक (10-20 साल तक) सुरक्षित पड़े रहते है तथा उचित वातावरण एवं नमी मिलने पर पुनः अंकुरित होकर फसल को नुकसान पहुँचाते है।

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अमरबेल से कितना नुकसान पहुंचता है ?

रामतिल में अमरबेल का एक पौधा प्रति 4 वर्गमीटर में होने पर 60-65 प्रतिशत से अधिक नुकसान पहुँचाता है। अमरबेल के प्रकोप से अन्य फसलों जैसे उड़द, मूंग में 30-35 प्रतिशत तथा लूसर्न में 60-70 प्रतिशत औसत पैदावार में कमी दर्ज की गई है।

अमरबेल की रोकथाम कैसे करें 

निवारक विधि:-

इस विधि में वे सभी क्रियाये सम्मिलित है जिनके द्वारा अमरबेल का नये क्षेत्रों में फैलाव रोका जा सकता है। अमरबेल के बीज देखने में लूसर्न एवं बरसीम के बीज जैसे होते है इसीलिये इन फसलों की बुवाई से पहले ये सुनिश्चित करना चाहिए कि फसल के बीज में अमरबेल के बीज नहीं मिलें हों। बुवाई के लिये हमेशा प्रमाणित बीज का ही प्रयोग करना चाहिए । प्रयोग की जाने वाले  गोबर की खाद पूर्णतः सड़ी एवं खरपतवार के बीजों से मुक्त होनी चाहिए। जानवरों को खिलाये जाने वाले चारे (बरसीम/लूसर्न) में अमरबेल के बीज नहीं होना चाहिए।

यांत्रिक विधियाँ:-
  • अमरबेल से प्रभावित चारे की फसलों को जमीन की सतह से काटने पर अमरबेल का प्रकोप कम हो जाता है।
  • प्रभावित चारे की फसल को खरपतवार में फूल आने से पहले ही काट लेना चाहिए जिससे इसके बीज नहीं बन पाते है तथा अगली फसल में इसकी समस्या कम हो जाती है।
  • उगने के बाद परन्तु फसल में लपेटने से पहले (बुवाई के एक सप्ताह के अंदर) खेत में हैरो चलाकर इस खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है।
  • यदि अमरबेल का प्रकोप खेत में थोड़ी-थोड़ी जगह में हो तो उसे उखाड़कर इकट्ठा करके जला देना चाहिए।

फसल चक्र अपनायें 

घास कुल की फसलें जैसे गेहूँ, धान, मक्का, ज्चार, बाजरा आदि में अमरबेल का प्रकोप नहीं होता है। अतः प्रभावित क्षेत्रों में फसल चक्र में इन फसलों को लेने से अमरबेल का बीज अंकुरित तो होगा परन्तु एक सप्ताह के अंदर ही सुखकर मर जाता है फलस्वरूप जमीन में अमरबेल के बीजों की संख्या में काफी कमी आ जाती है।

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अमरबेल की रासायनिक विधि से रोकथाम

विभिन्न दलहनी (चना, मसूर, उड़द, मूंग) तिलहनी (रामतिल, अलसी) एंव चारे (बरसीम, लूसर्न) की फसलों में पेन्डीमेथालिन 30 प्रतिशत (ईसी) स्टाम्प नामक शाकनाशी रसायन को 1.0 किग्रा व्यापारिक मात्रा प्रति एकड़ की दर से बुवाई के बाद परन्तु अंकुरण से पूर्व छिड़काव करने से अमरबेल का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। नये रसायन पेन्डीमेथालिन (स्टाम्प एक्स्ट्रा) 38.7 प्रतिशत (सीएस) 700 ग्राम प्रति एकड़ की व्यापारिक मात्रा का प्रयोग अमरबेल नियंत्रण पर काफी प्रभावी पाया गया है।

इन रसायनों की उपरोक्त मात्रा को 150 लीटर पानी में घोल बनाकर ’’फ्लैटफैन’’ नोजल लगे हुये स्पे्रयर द्वारा समान रूप से प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। इस शाकनाशी के प्रयोग से अमरबेल के साथ-साथ दूसरे खरपतवार भी नष्ट हो जाते है। यदि अमरबेल का प्रकोप पूरे खेत में न होकर थोड़ी-थोड़ी जगह पर हो तो इसके लिए ’’पैराक्वाट’’ अथवा ’’ग्लायफोसेट’’ नामक शाकनाशी रसायन का 1 प्रतिशत घोल बनाकर प्रभावित स्थानों पर छिड़काव करने से अमरबेल पूरी तरह नष्ट हो जाता है |

रासायनिक विधि से अमरबेल की रोकथाम के लिए इस रसायन का प्रयोग करें |

बुवाई से पहले :-

ग्लाइफोसेट : –  इस दवा का प्रयोग बुवाई से पहले करना चाहिए | इस रासायनिक दवा को 2500 मिली. लीटर प्रति हेक्टयर की दर से प्रयोग करें | इस दवा के 2500 मिली. की मात्रा 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर समान रूप से करना चाहिए | इसका प्रयोग पहली वर्षा के 15 से 20 दिन बाद एवं बोनी के 15 दिन पूर्व करना चाहिए |

खड़ी फसल में :-

पेन्डीमेथालिन (38.7 %) :- इस रासायनिक दवा का प्रयोग खड़ी फसल में करना चाहिए , जब फसल पर अमरबेल का प्रकोप होता है | इस दवा के 750 मिली. फ्लैटफेन नोजल लगाकर 500 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर समान रूप से छिड़काव करें |

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